काग़ज़ दिल के उद्देश्य तथा इस संगठन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने हेतु कृपया

निम्नलिखित सभी 06 चरण पढ़िए

01
अपने दिल की आवाज़ को पन्नों पर उकेरने वाले सभी रचनाकारों
और अपने दिल की आवाज़ को उन पन्नों में सुनने वाले सभी पाठकों का
“काग़ज़दिल.कॉम”
“KAAGAZDIL.COM” साहित्यसेवी संगठन हार्दिक स्वागत करता है 

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और अपने इस छोटे से प्रयास को आपके सहयोग से बड़ा और सार्थक बनाने के लिए जुड़ने का निवेदन करता है ।
काग़ज़दिल.कॉम एक प्रयास है
उस भाव को ,उस आवाज़ को ,एक पन्ना देने का
और उस पन्ने को ढूंढ़ता एक दिल ,” पाठक ” देने का
ये कोशिश है अलग अलग तरीकों से नई बदलती पीढ़ी को साहित्य रस में डुबाने का / रूबरू कराने का
अधिकतम रचनाकारों को एक मंच पर लाने का।

साहित्य एक साधना है , अपनी भावनाओं को ,रूह को सुकून पहुँचाने का और भाषा माध्यम है उसे सजा-सँवरा दिखाने का ।अभिव्यक्ति किसी भी भाषा में हो उसका भाव उस भाषा की खूबसूरती के आवरण को धारण कर और भी निखर आता है।

रचना हिंदी में हो तो अनमोल है
उर्दू में हो तो शहद से मीठा घोल है
दोनों मिल जाएं तो आसमां से उतरे बोल हैं
सज काग़ज़दिल के पन्नों पर नादिर उनका मोल है

भाषा वह माध्यम है जो अदृश्य मूक एहसासों की आवाज़ को अस्तित्व दे कर , उसे एक पहचान, आँखो को सुहाता एक रूप और कानों को सुहाता एक स्पर्श देता है और साहित्य उसमें बसी रूह बन कर सभी के दिल को छूता रहता है।
★★
साहित्य वह जो दुनिया से विशाल है
साहित्य वह जो समंदर से गहरा है
साहित्य वह जो आसमान से ऊँचा है
साहित्य वह जो प्रकृति से भी कहीं खूबसूरत है
भावनाओं के बादल बनाते जिसमें हर पल शब्दों की मूरत हैं
★★
जिसमें अनगिनत भाषाओं का मेला है
हर शब्द, हर हर्फ़ खुद में लिए एहसासों का रेला है
साहित्य वह जो
समेट लेता ब्रह्मांड भी जिसमें, एक कलमकार ही अकेला है

काग़ज़दिल.कॉम एक प्रयास है
इन अनगिनत भाषाओं की , अनगिनत दुर्लभ / चेतन्य /असीमित एहसासों की खूबसूरती से उमड़ती लहरों से कुछ लहरों को समेटने का ,
एक प्रयास है
बन पाठकों का किनारा, उन्हें साहित्य लहरों में भिगाने का
खिलती रचनाओं की महकती खुशबू से सींच कर
और एक खूबसूरत उपवन मंच सजाने का
हर कोंपल में विशाल वृक्ष बनने की उम्मीद जगाने का
आसमान सा कद लिए
तारों से अधिक गुण लिए
वरिष्ठ साहित्यकारों के साये तले
दुनिया का कण कण तो
पाठकों की रूह महकाने का
यूँ तो नहीं साहित्य मोहताज कभी किसी का
फिर भी एक प्रयास है
हर दिल के कागज़ पर एक और फूल खिलाने का
सभी के सहयोग से एक और साहित्यिक मंच बनाने का

CONTENT COPYRIGHT – KAAGAZDIL.COM
★Uploaded on 07 December 2017 – 12.07 A.M.★

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02
पाठक बंधुओं से निवेदन करते हुए , इन कुछ शब्दों पर उनकी नज़र-ए-इनायत करके इन्हें वजूद देने की गुजारिश करते हैं। 

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हम जब भी साहित्य अथवा रचनाओं की बात करते , पढ़ते और सुनते हैं तो हमारे ज़हन में बड़े-बड़े साहित्यकारों और अति मशहूर रचनाओं के नाम ही उभर कर आते हैं या फिर अधिकतर वह नाम जो टेलीविजन या अख़बार की सुर्खियों में अथवा किसी ऑडियो/वीडियो के माध्यम से हमारे दिल में जगह बना लेते हैं , नज़र आते हैं।
वो सभी उस सम्मान एवं प्रेम के हकदार भी हैं ,लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपके इस असीम प्रेम की जरूरत किसी और को नही है। राष्ट्रीय अथवा राज्य स्तर के रचनाकारों के अलावा भी अनगिनत रचनाकार ऐसे हैं जिनको जानकर ,जिनको पढ़ कर आप एक सुकून ,एक सुख की अनुभूति अवश्य करेंगे ।
काग़ज़दिल.कॉम एक प्रयास है, प्रख्यात एवँ लोकप्रिय रचनाकारों के गुणगान के साथ ही वरिष्ठ रचनाकारों के मार्गदर्शन एवँ सहयोग से नए ,उभरते रचनाकारों को एक मंच देने की, उनका हौसला बढ़ाने की, उनके द्वारा रचित खूबसूरत रचनाओं की खुबसूरती काग़ज़दिल.कॉम के पन्नों पर बिखेर कर , दुनियाभर के पाठकों को उनकी खुशबू से महकाने की
★ ताकि

नई कलमों बारे में भी दुनिया जान सके
आये उनकी आवाज़ तो, उन्हें भी पहचान सके

★सम्माननीय
पाठकगण….सुधिजन….

तारे और भी हैं देखिए तो तारों के पीछे
आसमां को निहारते हैं आप
कुछ पन्ने बिखरे हैं आपके क़दमों के भी नीचे

लेकिन कितने भी रचनाकार या रचनाओं से हम इस मंच को सजा दें ,जब तक आपकी दुआएँ, आपका प्रेम, आपकी हौसला अफ़ज़ाई नही मिलेगी, हमारी हर कोशिश अधूरी है।

पाठक बंधुओ से गुज़ारिश है कि अपने प्रेम की कुछ बूंदे काग़ज़दिल.कॉम के इस प्रांगण पर गिराते रहें ,जिससे कि ये ज़मीन इतनी उपजाऊ बन सके कि रंग बिरंगी, खूबसूरत, देश- दुनिया की रचनाओं को यहाँ सजा कर आपके और रचनाकारों के लिए एक खूबसूरत ,ईमानदार और

सच्चाई से महकता एक बगीचा और सजा सकें
भारतीय साहित्य है कितना सुंदर, दुनिया को दिखा सकें

*
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★Uploaded on 07 December 2017 – 12.07 a.m.★

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03
मंच दे कर या रचनाकारों की रचनाओं को जगह दे कर या पढ़ने मात्र से ये कार्य पूरा नहीँ हो जाता है

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भाषा और साहित्य के प्रचार प्रसार का जितना जोर है , उतना ध्यान उन रचनाकारों व साहित्यकारों की तरफ भी दिया जाना चाहिए जो साहित्य के विशाल (अनन्त ) वट वृक्ष को अपने जीवन की बूंदों से सींचते हैं ,
जिन्हें हम रचनाकार एवं साहित्यकार कहते हैं जो कि एक इंसान भी हैं,उनकी भी बुनियादी आवश्यकतायें हैं।
बेशक उनकी तरफ भी सोचा जाता है , लेकिन फिर भी, अभी भी, कहीं किसी को किसी मदद की आवश्यकता है।
जाने कितने ऐसे रचनाकार और साहित्यकार हुए हैं जो जीवन की विषम परिस्थितियों के बावजूद अपने तन-मन से साहित्य रस टपकाते रहे
तथा अपने शब्दों पर मिली तारीफ़ से ही अपना दर्द मिटाते रहे।

कितने तमाम उम्र ” वाह वाह ” की जिंदगी जी कर ,
जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर आकर ” एक आह ” को भी तरस गए या तरस रहे हैं ।
हमें उनके लिए सोचने की जरूरत है। यह कार्य सिर्फ सरकार अथवा कुछ ही लोगों का नहीँ है।

★ काग़ज़दिल.कॉम एक प्रयास है★
उन रचनाकारों की आवाज़ आप तक पहुँचाने का
और आपको उनकी आवाज़ सुनाने का
उनके उम्मीद के दीपक में, एक लौ जलाने का
उनके होठों पर आपकी मुस्कुराहट सजाने का

★ काग़ज़दिल.कॉम एक प्रयास है★
उनकी मदद करने का , एक प्रयास है साधनों के अभाव में कहीं गुमनामी के अंधेरों में अपनी बची हुई पीड़ादायक जिंदगी गुजार रहे रचनाकारों को ढूंढने और उनके पास उपलब्ध साधनों के द्वारा कोई मदद पहुँचाने का ।
इस कार्य को काग़ज़दिल इस वेबसाइट पोर्टल ( जिससे कि वो दुनिया भर के लोगों से जुड़ सके एवं जोड़ सके ),के अलावा अपनी एक प्रमुख सहयोगी सहयोगी N.G.O. और वेबसाइट पोर्टल की संचालन सहयोग समिति से जुड़े सभी साहित्यसेवियों के परिचय इस वेबसाइट के संचालन कार्यालय में मौजूद हैं तथा ये सभी साहित्यसेवी व रचनाकार एक जगह से न होकर देश के अलग अलग राज्यों से काग़ज़दिल.कॉम मंच के आह्वान पर ,काग़ज़दिल. कॉम साहित्यसेवी संगठन में अपनी सेवाएं निस्वार्थ और निशुल्क देने के लिए समर्पण का भाव लिए दिल से जुड़े हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में रहते हुए अधिक से अधिक इस कार्य को करने का प्रयास कर सकें
और विशिष्ट सलाहकार समिति में जो वरिष्ठ साहित्यकार ,रचनाकार , साहित्य प्रेमी , समाज सेवी हैं वह भी निःशुल्क अपनी सेवाएं एवँ सलाहें अलग अलग रूप में देकर साहित्य जगत में सेवा भाव लिए, अधिक से अधिक योगदान देने के लिए प्रयासरत हैं।
एक दिन सभी के सहयोग से काग़ज़दिल. कॉम ऐसे लोगों तक उपलब्ध साधनों के अनुरूप कोई भी मदद पहुँचा सके या गुमनामी में जी रहे किसी रचनाकार को अथवा उसकी कहानी को आप सभी के सामने ला सके ।
ये उम्मीद और प्रयास लिए, तेज नही धीमे ही सही पर काग़ज़दिल.कॉम का चल पड़ा ये कारवां अब चलता ही रहेगा और आपसे इसमें शामिल होने की गुजारिश करते हुए , हर हर्फ़ को हक़ीक़त में बदलता रहेगा ।

★ जो ★
★ बन सके ★
” आवाज़ आपके दिल की “
KAAGAZDIL.COM

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( Uploaded on 7 DECEMBER 2017- 12.07 a.m.)

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04
★ मेरी आवाज़ सुनो ★
रचनाकारों ,साहित्यकारों को खोजने में, सहायता करने में, मदद करें

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यदि आपको ऐसे किसी भी रचनाकार , साहित्यकार की कहानी अथवा उनकी जानकारी है
और आपका दिल कहता है कि दुनिया के सामने उसकी कहानी या आवाज़ या उसकी पहचान आनी चाहिए या उस तक कोई मदद पहुँचनी चाहिये तो आइए मिलकर प्रयास करते हैं , उनकी तरफ अपना हाथ बढ़ाने की , आप हम तक वो जानकारी पहुँचाने की कृपा कर के इस प्रयास में शामिल हों ।
किसी भी विशेष जानकारी को हम प्रयास करेंगे अपनी ई पत्रिका में ( जो कि व्हाट्सएप्प , मेल के जरिये पत्रिका के सदस्यों पर भी पहुँचेगी ) वरीयता देने की , अति विशेष को साइट के मुख्य पृष्ठ पर ★ “काग़ज़ दिल पोस्ट” ★ पर प्रकाशित करने और इस साइट पर
★ मेरी आवाज़ सुनो ★ – मेन्यू में मौजूद फ़ीचर
के माध्यम से (अथवा जो भी संभव होगा उसके माध्यम से ) उस आवाज़ को उठाने की, जो भी संस्था या पत्र /पत्रिका / मीडिया , इसमें मदद कर सकें उन तक भी उनकी बात पहुँचाने की और उनकी कहानी/खबर सभी के सामने लाने की या वहाँ तक संभव या उपलब्ध मदद पहुँचाने की ।
ये जानकारी आप ★ मेरी आवाज़ सुनो ★ के संदेश बॉक्स में भेज सकते हैं । जानकारी के साथ अपना नाम , पिता-माता का नाम और अपना एक फोटो , अपनी -ईमेल आई डी- एवं राज्य के अलावा उस जानकारी से संबंधित जो भी साक्ष्य या जानकारी संभव हों , अवश्य
भेजें ।

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05. ” कलमकार पाठक “
*****

पहली बार पाठकों को *कलमकार पाठक का नाम देते हुए ,

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यह सम्बोधन उन पाठकों के लिए काग़ज़दिल द्वारा 7 दिसम्बर 2017 से पहली बार इस्तेमाल किया गया है जो कि अपने दिल के भावों को कागज़ पर उतारने का जरा भी शौक रखते हैं या कोशिश करते हैं ।

( कलमकार पाठक शब्द संबोधन पहले से प्रचलन में नहीँ है , हमारी जानकारी के अनुसार )
साहित्य की खुशबू के और भी नए फूल महकाने के लिए , साहित्य के प्रचार प्रसार के लिए काग़ज़दिल. कॉम साहित्यसेवी संगठन एक मुहिम चलाने का प्रयास करता है ।
जो भी पाठक जरा भी लिखने का शौक किसी भी रूप में रखता है , उसे कोई भी जानकारी ना सही , अपने वरिष्ठ साहित्यकारों , सलाहकारों एवँ काग़ज़दिल समिति के सहयोग से वह भी मय प्रोफाइल अपडेट के अपनी कलम से रूबरू करवाने में और भविष्य में उसे धारदार बनाने में , और दिल के एहसासों , विचारों को काग़ज़दिल के पन्नों पर सजाने का , बाहर लाने के लिए एक मंच देता है ।
जिससे कि जहाँ सुंदर भाव दिलों में ही छिपे रहते हैं, घुटते रहते हैं और दम तोड़ देते हैं उन भावों को शब्दों में बदलने के साथ उन दिलों को हल्का करने का भी प्रयास है ।

जिससे कि वो अपने दिल को कागज़ में बदल कर दिल में सजे , छिपे या घुटते भावों को उस कागज़ में शब्द बनाकर उकेर सकें और सभी उसे पढ़ सकें , सराह सकें और एक दिल हल्का हो खुशी और सुकून महसूस करे।

★ इससे पहले घुटते एहसासों को पागल कर दो
बेहतर है अपना दिल ही कागज़ कर दो
इसलिए बना लीजिये
★ आवाज़ आपके दिल की ★
KAAGAZDIL.COM

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06
कागज़दिल.कॉम का प्रयास है भारतीय रचनाकारों की एक निर्देशिका/डायरेक्टरी
INDIAN POETS DIRECTORY
INDIAN WRITERS DIRECTORY
तैयार करने का ।

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जिससे कि विश्वभर में फैले भारतीय रचनाकारों के संपर्क सूत्र एक जगह पर उपलब्ध कराए जा सके। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव ना करते हुए बस रचनाकार होने को महत्व दिया जाएगा और जिसके लिए रचनाकार को अपनी किसी भी एक रचना अथवा एक पुस्तक के प्रकाशन और माध्यम का उल्लेख करना अनिवार्य है।
और वरिष्ठता का परिचय देने के लिए उसके प्रकाशन का महीना एवं तारीख भी डायरेक्टरी में उपलब्ध रहेगी।
भविष्य में कागज़दिल.कॉम इसे एक ★ निःशुल्क प्रिंट पुस्तक के रूप में भी उपलब्ध करवाएगी ★ जिसे कुछ नियमों के तहत, निःशुल्क एवं न्यूनतम लागत मूल्य पर उसे कोई भी प्राप्त कर सकेगा ।
चाहे एक लंबे वक्त में ही सही ,पर ये सफर भी काग़ज़दिल.कॉम धीरे-धीरे तय करता रहेगा ।
इस कारवां में शामिल हो कर आपके अतुलनीय सहयोग की उम्मीद काग़ज़दिल हमेशा करता रहेगा
और एक दिन अधिक से अधिक रचनाकारों के संपर्क सूत्र एक ही जगह पर एकत्रित करके , ( प्रिंट पुस्तक के अलावा ) उसे एक
एक खास डिजिटल पुस्तक का रूप प्रदान करेगा

” आवाज़ आपके दिल की “
★ KAAGAZDIL.COM ★

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