Category Archives: प्रेम कहानी

महत्वाकांक्षा

महत्वाकांक्षा “प्यार की मजार पे चढ़ाए गए फूल भी फूल ही होते हैं,जो बीतते वक़्त के साथ मुरझाने लगते हैं। जो फूल कभी अपनी खुशबू के लिए प्रेयसी के बालों में झूमा करते हैं, वो दिन बदलते ही किसी चौराहे पे अपरिचित की तरह दुत्कार दिए जाते हैं” दिव्या और संभव ने अपने प्यार की […]

स्त्री-मन

सिद्धान्त और भावना कॉलेज की कैंटीन में घंटों से बैठे हुए थे लेकिन उनकी अभी तक एक कॉफ़ी खत्म नहीं हुई थी । दोनों घंटों से एक दूसरे की आँखों में डूब कर उस रस का आनन्द ले रहे थे जो किसी कॉलेज की किसी भी कैंटीन में नहीं मिलती । भावना और सिद्धान्त सामजशास्त्र […]

प्यार का मुकाम

किसी – किसी की किस्मत में सच्चे प्यार के नाम पर कुछ रहता है तो बस खुद की वफा और सारी जिंदगी खत्म न होने वाला इंतजार। जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक पहुंचते -पहुंचते प्रिया को एहसास होता है कि अब तक वो न जाने कितनी झूठी खुशी झूठी उम्मीदों और फरेबी सपनों की दुनियां […]

रोटियाँ

“चाची,रोटी क्या इतनी भी गोल हो सकती है,मानो कि पूनम का चाँद हो जैसे और वो भी बिना किसी दाग के। अगर तुम ऐसी ही रोटियाँ मुझे खिलाती रही तो मैं तो पूरे महीने का राशन एक दिन में खा जाऊँगा।” कौशल चाची की तारीफ करते-करते न जाने कितनी रोटियाँ खा चुका था। चाची बोली […]

“तुम चलोगी क्या?”

“तुम चलोगी क्या?” क्षितिज ने जूतों के फीते बाँधते हुए रसोई में व्यस्त रश्मि से पूछा। कुकर की सीटी में क्षितिज की आवाज़ कहीं दब गई और सवाल जस का तस वहीं खड़ा रहा। जब कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया तो उसने फिर पूछा-“रश्मि,तुम चलोगी क्या?” उसकी तेज़ आवाज़ सुनकर मानो रश्मि किसी […]

प्रतीक्षा

आज कॉलेज का वातावरण बेहद चहल पहल भरा थाI वार्षिक समारोह की तैयारी बड़े जोर शोर से चल रही थी Iबस कुछ ही देर बाद कार्यक्रम प्रारंभ होने वाला था Iसभी प्रतिभागी अपने- अपने कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे I कोई नाटक के अपने हिस्से के संवाद याद करने में व्यस्त था तो कोई […]

प्रेम की पराकाष्ठा

बात उन दिनों की सुमि रायपुर बैंक में लेखाधिकारी थी , और हम बेरोजगारी के महदंश से जूझते एक प्रायवेट कम्पनी में कारिंदे थे। सुमि एक खूबसूरत पर तुनक मिजाज लड़की थी व लगभग सभी ग्राहक उससे बैंक स्टेटमेंट या बैंक पास बुक एंट्री करवाने से डरते थे फलस्वरूप कुछ न कुछ झिख जिख होना […]

प्रेम पत्र : प्रेम कहानी

एक लड़का कई सालों से लाइलाज़ कैंसर से जूझ रहा था. बीमारी के कारण वह अपना अधिकांश समय घर पर ही गुज़ारा करता था. एक दिन उसने अपनी माँ से कहा, “माँ, मैं घर में रहते-रहते ऊब चुका हूँ. कुछ देर के लिए बाहर जाना चाहता हूँ.” माँ ने उसे बाहर जाने की अनुमति दे […]