Category Archives: प्रेरक कहानी

फेसबुक का प्यार

“आजकल प्यार कोई जज्बात कोई खूबसूरत अहसास नहीं, बल्कि गुड्डे-गुड़ियों के साथ खेलकर मन बहलाकर दूसरे खिलौनों की तरफ आकर्षित होने वाले खेल के जैसा बन गया है। और ऐसे में फेसबुक का प्यार तो आँखों में पट्टी बांधकर लुका-छिपी के खेल खेलने जैसा हो गया है” । मानवी बहुत मासूम सी और बस अपने […]

सम्मान

बाहरवीं कक्षा अच्छे नम्बरों से पास कर अब आगे की पढ़ाई के लिये शहर में जाना था ,तय हुवा की जयपुर जाकर अपनी आगे की पढ़ाई की जाए । जयपुर जाकर नरेन ने बी.सी. ए में प्रवेश ले लिया और अपनी पढ़ाई शुरू की वैसे बचपन से ही उसे आर्मी में जाने का जुनून था […]

वो बुजुर्ग दंपत्ति

सुनो ना, ऐसा कहते हुवे वह अपनी सीट से उठता हैं, तभी उसकी नजर अपने सीट के सामने बैठे हुये एक बुजुर्ग दंपत्ति पर पड़ती हैं।उनका प्यार और आपस में एक दूसरे की देखभाल वह देखकर हत्प्रब्ध होता हैं।वह बुजुर्ग दंपत्ति पिछले स्टेशन से ही उसके सीट के सामने वाले बर्थ पर रिजर्वेशन था उस […]

गरिब बच्चे

*गरीब बच्चों के सपने* अरे टिल्लू इधर आ? कब से बोला तेरेको चाय कप धोकर , 12 नम्बर को समोसा दे आ? और तू हैं कि वही मटरगश्ती कर रहा ? अच्छा तू फिर पुस्तक पकड़ लिया। रुक तेरा मस्ती निकलता हूँ, ग्राहकी के समय पढ़ाई? अरे काका न मारो, मैं तो बस दो पन्ने […]

समोसे वाला

चर्चगेट, मुंबई से मेरे घर से काम पर जाने के लिये लोकल ट्रेन की यह रोज़मर्रा की यात्रा थी। मैंने सुबह ६.५० की लोकल पकड़ी थी। ट्रेन मरीन लाईन्स से छूटने ही वाली थी कि एक समोसे वाला अपनी ख़ाली टोकरी के साथ ट्रेन में चढ़ा और मेरी बग़ल वाली सीट पर आ कर बैठा […]

ज़मीर जिंदा है

—-जमीर जिन्दा है—- शर्मा जी जब भी दफ्तर में जाते डिप्टी डायरेक्टर से लेकर हैड़ क्लर्क, क्लर्क तक छोटे बड़े सब एक कतार में बैठे नजर आते। क्लर्क से बात करते तो वह हैड़ क्लर्क पर और हैड़ क्लर्क से करते तो वह डिप्टी डायरेक्टर पर टाल देता और डिप्टी डायरेक्टर के पास जाते तो […]

बूट पॉलिश

“बूट पॉलिश” *********** ट्रेन अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी। सामने की सीट पर बैठा हुआ वो युवक उस रफ़्तार के साथ मेरा सुकून चैन सब उड़ाए लिए जा रहा था। मैं एक ५० साल की धीर गंभीर महिला और उसकी उम्र लगभग २८ से ३० के बीच। अपनी याददाश्त के हिसाब से मैंने […]

पापा के जूते

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया …. इतना गुस्सा था की गलती से पापा के जूते पहने गए …. मैं आज घर छोड़ दूंगा बस…. और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा … जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे …. तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है ….. आज […]

सुबह की पहली अज़ान

सुभानअल्लाह पुरानी दिल्ली के, पुरानी मस्जिद के बड़े मौलवी है। पिछले 40 बरसों से वो रोज़ पाँचों वक़्त की अज़ान दे रहे हैं.. और वही नमाज़ भी पढ़ाते है। लेकिन कहा जाता है कि मौलवी सुभानअल्लाह सुबह की नमाज़ बड़ी तवक़्कुफ़ के साथ पढ़ाते है और उतनी ही ख़ुशमिजाज़ी का आलम उनके पढ़ने वालों में […]