Category Archives: लघु कहानी (सामाजिक)

पुलकित

सुनो – रोमा :- ” जी ” साड़ी का पल्लू खोंसे रोमा एक हाथ से अपने बिखरे बालों को सही करते हुए अपने पति को देखती है और फिर चादर ठीक करने लगती है रमेश कहते है रोमा थोड़ा आराम से बैठ लो सुबह से भाग रही हो पुलकित सी रोमा एकटक रमेश को देखती […]

कर्ममंच ( कर्मा )

कर्ममंच ( कर्मा ) ************** तीखी यंत्रणा और सिसकिया दब कर रह गई मेरी।आज जहां बैठा हूं सायद नहीं होता।ह्रदय की ध्वनियां धम-धम कर रही थी। एकाएक मै एक बोझ बनकर अपनों की आँखों में खटकने लगा। मेरे अपनों ने कैसे मुझे अपने आप से काट कर खुद से अलग कर दिया था। ऐसा लगा […]

इन्सानियत

शाम का धुँधलका छाने लगा था, अनुप्रिया सड़क के किनारे खड़े होकर ऑटो रिक्शा की प्रतीक्षा कर रही थी। आज ऑफ़िस में कुछ ज़्यादा ही देर हो गयी, ये मल्टीनेशनल कम्पनीज़ की नौकरी मुई होती ही ऐसी है, आने का समय तो निश्चित होता है परन्तु जाने का कोई फ़िक्स टाइम नहीं , और आज […]

प्रदर्शनी

लघु कथा-प्रदर्शनी अख़बार पढ़ते पढ़ते माँ स्तब्ध हो बैठ गई।पिताजी समझ गए कि उन्होंने अवश्य ही मानवता को शर्मसार करती कोई खबर पढ़ ली है।वे बोले मनोरमा रेप और हत्या तो आजकल आम खबर है, कितनी बार कहा है तुम्हें ऐसी खबरें मत पढ़ा करो।माँ की आँखे नम थीं, सजल आँखों से वे बोलीं- नहीं […]

माता निर्माता भवति

सात साल पहले घर छोड़ा था उसने,घर क्या मकान छोड़ा था, जिसने मधुर कम और दुखद यादें अधिक दीं थी उसे। प्रभा अपने साथ केवल अपने दस वर्षीय बेटे अमित को ही लायी थी वहाँ से। विवाह के 12 साल बाद इतना बड़ा क़दम उठाने में उसे महीनों सोचना पड़ा था। आज अमित 17 साल […]

छलिया

उपवन से फूल तोड़ते फेंसिंग के तार में ऋषभ उलझ गया । कपड़े भी इधर उधर से फट गए और जख्म जो पुराना था फिर निकलने लगा खून वहाँ से। जैसे तैसे आत्म संयत कर निकलने की जुगत दर्द पर विजय पाने की कोशिश । पर आज होनी कुछ और दशा की ओर इंगित कर […]

बंधन

बंधन मुक्त रमेश घर आते ही पिंजरे में बंद तोते को आजाद कर दिया । तोता शायद धन्यवाद बोलता हुआ पिंजरे के चक्कर लगा उन्मुक्त नील गगन में ओझल हो गया। रमेश के आँखे भावावेश में डबडबा गयी। अरे ये परिवर्तन आज मम्मी ने उससे पूछा ,,,,,,,,क्या हुआ ? तुमने तोता को उड़ा दिया ,अब […]

नेक दिल

—-नेक दिल —- अपने प्रिय नेता को देखने जन सैलाव उमड़ पड़ा था। जनता को सिर्फ आधा घंटा ही इंतजार करना पड़ा। नेता जी सपरिवार अपने छुटभैयों के साथ स्टेज पर उपस्थित थे। नेता जी ने अपने सद्विचारों का पिटारा खोलना आरंभ किया ” आजकल हर राजनीतिक दल जातिगत राजनीति करता है। भाईयों! मुझे नफरत […]

जननी का आशीष

जननी का आशीष आँसुओं के सैलाब में रेवा का दिल डूबा जा रहा था,वह बेतहाशा छटपटा रही थी। तभी माँ की आवाज ने चौंका दिया।मां दरवाजे पर खड़ी थी। ” ऐ रेवा! फिक्र मत कर सब ठीक होगा, तू रो मत।” मां की आवाज के साथ ही रेवा ने आँखें खोल दी। उसका दिल जोरों […]

ऐ दिल! सँभल

।। ऐ दिल! सँभल ।। ***************** आज घर में पार्टी थी।अनुपम आज सर्जन बन गया था।दिल का डॉक्टर और अगले ही माह उसके दिल की रानी भी घर की रानी बनने वाली थी।डॉक्टर ईशा से वह पिछले सात वर्षों से परिचित था और दोनों ने सात वर्षों का लंबा इंतजार भी तो किया था। जब […]

चौकड़ी

“चौकड़ी” मूसलाधार बारिश ने जनवरी की ठंड़ को अत्यधिक तीक्ष्ण बना दिया था। भीतर वाली कोठरी में तीन बेटियों की माँ कमला बेटे की आस में, प्रसव-पीड़ा से छटपटा रही थी। सास उसे ढांढ़स बंधा रही थी– ” बस बेटी इबकै और हिम्मत कर ले, एक छोरा सा हो ज्या तै फेर छुट्टी करिये बालक […]

।। शातिर वो नज़र ।।

आज ही आयी थी वो, हॉस्टल छोड़ पेईंग गेस्ट बनकर रहने के लिए।हॉस्टल का खाना ही तो बस समस्या बन गया था उसकी। वर्तमान के उसके आवास और किचन में सात सौ मीटर का फासला था।रोज़ शाम लगभग साढ़े पांच बजे, पैदल ही वह अपने खाने का पैकेट लेने बाज़ार को पार करके जाती थी। […]

तबियत

श्यामा प्रसाद पिछले तीन दिन से अपने बेटे कह रहे थे कि बेटा तुम्हारी बुआ की तबीयत ज्यादा खराब है मुझे उनसे मिला कर लाओ पर शेखर हर बार कह कर टाल देता कि ‘अभी टाइम कहाँ है पापा,,, आपको तो पता ही है न मार्च का एंडिंग चल रहा है ,मुझे तो ऑफिस में […]

गौ हत्या

मोहल्ले में सन्नाटा सा पसरा था। सब लोग अपने घरों में दुबके थे। पुलिस घर घर जा कर पूछताछ कर रही थी पर कोई बताने को तैयार ही नही था कि पीपल के पेड़ के नीचे बहुत बुरी हालत में मरी पड़ी गाय की हत्या आखिर किसने की । मीडिया वालों ने इस घटना को […]

न्याय

जगन की मेहरारू सुगना की खूबसूरती के चर्चे पूरे गाँव मे फैले थे । तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद भी उसकी सुन्दरता जस की तस थी । साहूकार की नजर काफी दिनों से थी उस पर । वह बहुत कोशिश कर चुका था सुगना को अपने जाल में फाँसने की । ये बात […]

आत्मग्लानि

अचानक से आँख खुल गयी ….पसीना पसीना हो उठी मै ,कानों में तेज के स्वर गूंज रहे थे , “”क्यों नही मेरे होठों से अपने होठ मिलाये …क्यों नही अपनी साँसों का जाल फेंक कर मेरी साँसों को लिवा लायी तुम….क्यों इस तरह चले जाने दिया मुझे ….अभी तो मैं ओर जीना चाहता था !! […]

तोहफा

नमन जी😊 अलका को बहुत इंतज़ार था सुमित के लौट आने का। सुमित कहकर गया था कि उसे आज एक तोहफा दूंगा। उसका इंतजार कट नहीं रहा था, बार बार घड़ी देखती थी। अलका बार बार सोचती क्या लाएंगे। और खुद ही कभी शर्माती, कभी खुश होती तो कभी नाचने लगती, काफी महीने गुज़र चुके […]

आजी

बारह बरस की आजी चौदह बरस के दद्दा,,’ढेर कुल गहना कपड़ा मिली’ ये रंग -बिरंगे सपने लिये आजी ससुराल आ गईं ।.समझने को कुछ नही बस जिसने जिस काम में लगा दिया वो कर दिया । करीब हफ्ता दस दिन बीता ,दुआरे की गइया,बछिया,बत्तख , पट्टू, खरगोश अम्मा ,बाबा , , ,एक हूक सी उठी […]