Category Archives: सामाजिक कहानी

परछाईं

दिनभर जलता हुआ रबर ,उसका धुँआ आँखों मे जलन पैदा कर देता है,,गले मे खराश और खांसी की शिकायत लगभग हर मजदूर को है। रोज केला मिलता है ,मेडिकल चेकअप में जब भी डॉक्टर आता है ज्यादा से ज्यादा केला खाने को बोलता है।लेकिन कितने मजदूर टी बी के मरीज हो गये। खाने का डब्बा […]

मां बेटी मां

💕❤💕 💥जीना इसी का नाम है 💥 “नानी, मैं एक कुल्फी और ले लूं,प्लीज़. “चीकू ने फ्रिज खोलते हुए पूछा, “चीकू,तुम खा चुके हो ना?… गलत बात,वो कुल्फी नानी की है. हटो वहाँ से, “मैंने अपने ६ साल के बेटे को आँखे तरेरीं, लेकिन तब तक चीकू की नानी कुल्फी उसके हवाले कर चुकी थीं […]

तेरी इक नज़र

रात का साया धीरे-धीरे दिन के उजाले को ग्रसने लगा था. शाम का धुंधलका गहरे अन्धकार में तब्दील होने लगा था. जनवरी का महीना था. कड़ाके की ठन्ड पड़ रही थी. बाहर बरामदे में अपने पति के साथ बैठी वो सिगड़ी में जल रही आग की उष्णता को महसूस करके भी थरथरा उठी थी. “मांजी, […]

पराया धन

बेटा चल छत पर चलें कल तो तेरी शादी है,आज हम माँ बेटी पूरी रात बातें करेंगे।चल तेरे सिर की मालिश कर दूँ,तुझे अपनी गोद में सुलाऊँ कहते कहते आशा जी की आँखें बरस पड़ती हैं। विशाखा उनके आंसू पोंछते हुए कहती है ऐसे मत रो माँ, मैं कौन सा विदेश जा रही हूँ। 2 […]

ईश्वर की बेटी

आज छाया बहुत खुश थी ,उसकी दोनों बेटियों की शादी हो गई । जैसा उसने चाहा वैसी ही शादी हो गई। छाया के दो बेटियां और एक बेटा है, उसने अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दी। वो हमेशा सुनती रहती की फ़ला की बेटियों की शादी में इतना दहेज दिया , यह सुनकर छाया भी […]

अब और नहीं

अब और नहीं समाचार-पत्र लेकर बैठा ही था कि डोर बैल घनघना उठी, सोचा छुट्टी का दिन है कोई मित्र होगा। दरवाजा खोला तो पाया, बड़ी हवेली वालों का बूढ़ा नौकर है। हवेली की तरह ही बेचारा जरजर अवस्था में। बोला-” कँवर साहेब ने बुलाया है।”कहते ही नौकर जा चुका था। पत्नी जो आँगन में […]

फेसबुक फ्रैंड

ऑफिस से थकिहारी निर्मला जैसे ही घर में घुसी तो देखा उसका बेटा साहिल मोबाईल से चिपका हुआ है । सारा घर अस्त व्यस्त …..कही कपड़े बिखरे पड़े है तो कहीं जूते चप्पल फैले पड़े है । मेज पर चाय के जूठे कप ओर नाश्ते की प्लेट पड़ी है । साहिल ने उचटती सी नजर […]

लोभ

एक बार की बात है कि मैं बनारस जा रहा था। कर्मनाशा स्टेशन से देहरादून एक्सप्रेस पकड़कर मुगल सराय  पहुँचते हैं। वहाँ पर गाड़िया कुछ ज्यादा ही समय रूककर अपनी थकान मिटाती है।मैं गाड़ी से उतरकर बाहर प्लेटफार्म पर आराम करने लगा सुबह सबको प्यारी लगती है चाहे कोइ भी प्राणी हो कहावत भी है […]