Category Archives: कविता (अन्य)

स्वपन्

यार मेरे सुन कल के दिन मुझपे इक सौगात हुई । गर्मी के मौसम में ज्यों बिन बादल की बरसात हुई ।। सुबह सुबह जब निकला घर से लगा कि कोई ताक रहा था । पीछे मुड़कर देखा हमने खिड़की से कोई झांक रहा था ।। हाथ हवा में उसने मारा लगा हमे ज्यों ताज […]

जीवन दैवे वारे वृक्षा

स्थानीय भाषा में सृजित रचना।। अबे न चेते,लग जैहे तौ, भइया भोतई घाटो। जीवन दैवे वारे वृक्षा, इन्हें कबुहँ न काटो।। अपने पुरखन से कछू सीखो,जिन ने इन्हें बचायो। देवता मान के इन वृक्षन की,पूजा करवो सिखायो। सदियन से पूजा कर रअ हो,तो अब इन्हें न छाँटो।। अबे न चेते लग जैहे तौ,भइया भोतई घाटो। […]

मधुर यामिनी

मधुर यामिनी पलकों पे निंदिया ले के आजा तारों की चुनरी ओढ़ के माथे चाँद दिखा जा थकी हारी मेरी आँखों को कोई ख्वाब दिखा जा। पलकों को मेरी भारी कर अपना जादू दिखा जा यामिनी के आगोश में सिमट जाऊ तारों की शीतल रश्मि से लिपट जाऊ आत्म विस्मृत होकर मै पिघल जाऊ मेरे […]

समझौता

क्यूँ मुझे महसूस होता नहीं बेइंतहाई उसके प्यार की क्यूँ असर होता नहीं अब धड़कते दिल के इकरार की ।। मैं ही उसकी धड़कन हूँ हूँ मैं उसकी यादों में मैं बसी हर पल में उसके मैं ही उसकी बातों में ।। हर घड़ी जहन पे उसके याद का मेरी पहरा है सूनी-सूनी आंखों में […]

रक्षाबंधन की शुभकानाएं: प्रेम का त्यौहार राखी

इबादत पूजा सब मेरी दुआ हैं मेरे भाई जैसा न कोई दूजा हैं बहन का प्यार ये ही दुलार हैं तुझे भाई बांधू राखी त्यौहार हैं -आकिब जावेद

बटोही बंजारण

सीमांत के किनारे सिमटते हैं साये, हवाएँ थम रही हैं मौन इस मधुर मिलन में !! सूरज का यूँ क्षितिज पर आकर हर शाम धरा से मिलना जुनून है इश्क़ की इन्तहां का !! सांकेतिक सा सम्मोहन जागे जब रूह की छुअन तब गहराता है विश्वास कि…”कोई है.. !!”” आसपास !! कोई है जो मजहबी […]

अंबर मन

तन्हा रातें तन्हा दिन । घुटती रातें लुटता दिन । सावन भी भींग रहा है । साजन देखो तुम बिन । आ भी जाओ बाहों में , गुजरें अब यादों के दिन । नर्म पड़ीं है ठंडी साँसे , आँखे नम है तुम बिन । रीत रहा है अंबर मन , बूंदों सा पल पल […]

नैनन मा तुम बसियो मोरे

नैनन मा तुम बसियो मोरे मोरे पिय तुमहो कोरे कोरे आँखियन मा डाका डारो मनवा को हमरो हर डारो पिय तुमसा कौनो न दूजा तुंही ने तो झोली भर डारो मैं तुम्हीं से दुःखड़ा बताईहौं मोरे पीड़ा का तुम हर डारो -आकिब जावेद #akib

आस

आज उठी उर पीर अति ,सजल नयन मम होय । बीता जीवन है सकल ,तुम्हे बिलख उर रोय । छंद रस लय रहित ,लगा रही अरदास । मम पूजा अर्चन यही ,दर्श देहु महराज ।। करौं जो पूजा यजन ,मिल जायेगी सिद्धि । रंग रूप रस शब्द की ,पूरण होवै रिद्धि । साधन पूजन से […]

मन सागर

मन सागर ****************** अच्छा लगता है यूं ही, किसी ख़्यालो में बहना। उमंगो की सागर में, अरमानो की नाव का, यूं धीमी गति से बहना। सरसराती हवाओं का, यूं मुझे छू के जाना। ठंडी सांसों में सुगंध बन, यूं तेरा उतर जाना। दिल की धड़कनो पे, मुस्किल होता है,काबू पाना। जब मेरे जहन में यूं […]

अवर्णित काव्य

……….✍️ मेरे अधर राग के मालकौंस मन वीण पर तुम विराजित !! मद्दम सुर के आलाप मुदित नयन दृग बिंदु पर शोभित कंचन आनन स्वरेश्वर सिरमौर तुम !! सुप्त श्वास की आस कंवलित कलि कुमारिका के कौमार्य अनघ प्रेयस रूप सागर हिलोर तुम !! हे सुभग श्याम सिंगार हे “कामायनी” सुकुमार मितभाषी … मधु हास […]

अंतर्मन ।

अंतर्मन की व्यथा हूँ तुझको मैं सुनाती हूँ चाह परिंदा उड़ जाने की अंतर्मन से गाती हूँ। चाहती हूँ उड़ जाऊ परिंदा पंख कट जाती है पपीहा बोलने से पहले ही बहार लूट ली जाती है। मेरे से जन्म लिए नित नई स्वप्न सजाती हूँ आशा का महल बनाकर ही स्वयं पतीत हो जाती हूँ। […]

मैं. खुद को लिखती हूं

मैं खुद को लिखती हूं ****************** मैं दर्द लिखती हूं किसी ओर की नही अपनी हयात लिखती हूं। ना रस ,ना छंद , ना गैरो की चर्चा। मै ढलती शाम, अपनी कहानी लिखती हूँ। मन पंछी बेचैन मेरा तिनका -तिनका मैं, जब थक जाती हूं ज्बातो के तहरिर, लिखती हूं। निर जो बहता है, बनके […]

कविता सावन

कविता सावन सावन तो आया अरमान है न्यौता तो पाया अब जाना हैं . अम्मा आज लगा दे झूला , इस झूले पर मैं झूलूँगा। इस पर चढ़कर, ऊपर बढ़कर, आसमान को मैं छू लूँगा। झूला झूल रही है डाली, झूल रहा है पत्ता-पत्ता। इस झूले पर बड़ा मजा है, चल उच्चे , ले चल […]

कहमुखरी

आवे जावे मन बहलावे। जो जो पूछो बात बतावे। दूरन से वो लागे अपना। ऐ सखि साजन?ना सखि सपना। छैल छबीला वो हो जावे। मदमस्त चाल से वो रिझावे। साथ कभी उसने नहिं छोड़ा। ऐ सखि साजन?ना सखि घोडा। बिन उसके कुछ भी न होवे। दिन रात की निदियां खोवे। नहि कोई भी उसका सानी […]

गर हूँ वतन का हिस्सा तो मुझे भी खुद्दारी चाहिए

अब तुम्हारा रहम नहीं मुझे भी हिस्सेदारी चाहिए मुल्क चलाने के वास्ते मुझे भी भागीदरी चाहिए हर हाथ हो मज़बूत अपने नेक इरादों को लेकर अपना भाग्य लिखने को मुझे भी दावेदारी चाहिए सदियों तक हुआ राज़तंत्र भेष बदल बदल कर तुम्हारी नियतों में तो मुझे भी ईमानदारी चाहिए न ही लालच,न सहारा और न […]

बादल

☁⛅🌈बादल🌈 ⛅☁ ☔☔⚡⚡☔☔ कभी श्यामल कभी धवल से बादल, खिलते श्वेत पद्म,कमल से बादल। (१) मां देखो इनका आकार, करते ये सपना साकार। कभी बैल से, कभी शैल से। कभी रूप ये पेड़ का धरते, कभी भेड़ बन नभ में विचरते। कभी शेर बनकर दहाड़ते, कभी झरना ये कभी पहाड़ से। कभी बन चोर सिपाही […]

अधूरा प्रेम

पता नही कौन अचानक यूँ ही कर रहा था बैचैन रह-रहकर । फिर तुम्हारी याद जब अश्रु बन छलक गई कपोलों पर। तो लग रहा है पहले से काफी बेहतर । बस फिर से न आ जाऊँ तेरी बातो में । ड़रती हूँ रह- रहकर। तुमसे मिलन और विछोह दोनों ही हैं बड़े कष्टकर। न […]

अक्स

परछाई…..। स्नेहिल हो सजल नयनों से है कोटि-कोटि आभार व्यक्त। संग मेरे रहती ये सदा अदृश्य होकर,हर पल और हर वक्त। साथ नहीं देता जीवन में हर पल कोई भी शख्स रहता साथ जो बिना जताए,एकमात्र अपना अक्स हूं हृदय से आभारी मैं उसकी वो साथ मेरे चहूं ओर है। वही करती होंसला अफजाई हां, […]

सावन

सावन की यह काली घटा देखो कितनी सुहावन इसकी छटा बरसाती बूंदे अनमोल धरा नदी तलाब जल कूप भरा सावन की यह काली घटा कितनी सुहावन इसकी छटा वसुधा करती सब हरा भरा जन जीवन चहुँ ओर बढ़ा फिर झुम झुम मन नॉच उठा सावन की यह काली घटा कितनी सुहावन इसकी छटा