Category Archives: कविता (प्रेम)

प्रेम_क्या_____है ?

#दिन-सोमवार #विधा-कविता प्रेम_क्या_____है ? प्रेम रूप त्याग है राधा,प्रेम भाव भक्ति है मीरा। प्रेम भरे पत्थर में आशा,जननी प्रेम की परिभाषा। प्रेम अक्षय असीम अपार है,यह परिवेश और परिवार है। ईश्वर का मानव जाति को,दिव्य अनंत उपहार है। प्रेम क्रंदन है आलंबन है,यह सुमिरन है, यह नर्तन है। आए न समझ जो हर किसी को,नीलम […]

जैसे राधा,कृष्ण के अंग लगती होगी

एक हम ही तो नहीं बेकरार यहाँ चाँदनी रातों में वो भी जागती होगी दुआओं में निगाह जो उठती होगी कुछ और नहीं वो हमें माँगती होगी जिस चौखट पर मेरी यादें लगाईं हैं वहाँ अपना अक्स भी टाँगती होगी कोई गुलाल न खिलेगा उस चेहरे पे गर खुद को वो मुझसे न रंगती होगी […]

एक पगली लड़की

सुनो एक पगली सी लड़की तुम्हे बहुत चाहती है तुम सिर्फ उस के हो ये सोच के इतराती है बेइंतहा कोई किसी को चाहे ये मुमकिन तो नही बस खूबसूरत से ख्यालों में डूब जाती है दर्द की हर एक दास्तां वो तुम्हारे साथ हो कर भूल जाती है यूँ तो जमाने मे भला कौन […]

बारिश की बूँद

बूँद हा,एक बूँद बारिश की पड़ती है तेरे तन बदन में पिघल उठता है मेरा मन हा, वही बूँद बारिश की जिसमे मिला था दो मन समा गई थी जिसमे साँसे नही रहा था होश कुछ भी मन मष्तिष्क में सिर्फ तुम थी और थी वो बूँदे, हा, वही बूँदे बारिश की जो आज भी […]

“बारिश”…

°°° इस बार की बारिश… कुछ ख़ास है… क्योंकि कुछ कुछ अनमोल लम्हें… अपने पास है…!! पहले की बारिश… विरह को बढ़ाने में तत्पर…! मगर…आज बारिश की बूँदें न बेअसर…!! रिमझिम बारिश की बूँदें… उसके छुअन की… स्पर्श करा जाती…! इक मीठा अहसास… कुछ स्मृति-पन्ने पर… बिना रोक-टोक के… दर्ज करा जाती…!! भले वो पास […]

इकरारनामा

…..✍️ हथेलियों को अपनी खाली रखना कुछ नमी सी महसूस हो तो उसे मेरा स्पर्श समझना यादों की चिनाब मेरी आँखों से हो कर बहेगी कहते हैं अश्क़ ही इश्क का नायाब मोती है पोर पोर बिखरने लगे ओस… वो मेरा ही रूप होगा सागर सारी उम्र मेरे मन में मचलता रहेगा दिल पर रख […]

तेरा – मेरा कल

तेरा – मेरा कल ************* कुछ याद भी है,या सब भूल गई हो। तन्हा तेरे सवेरे का,कभी मै, सूरज हुआ करता था। तेरे ह्रदय में कभी मेरा, बसेरा हुआ करता था। मेरी गैर-हाजरी से जब, तुम परेशां होती थी। होके बेचैन जब तेरी ओर से, कोई पैग़ाम आया करता था। वो दरख़्त जो की,ईंट की […]

प्रियतम

हर बार तुम शांत चित्त से मेरी पीड़ा हर लेते हो। कैसे हृदय दुखी मेरे को, हर्षित पुलकित कर देते हो? विरह वेदना में डूबे,मेरे तन मन को, चंचल चितवन कैसे कर देते हो? मेरे घने तम को तुम दिव्य ज्योति से भर देते हो। सजल नयनों से कैसे प्रियतम सारे अश्रु हर लेते हो? […]

सिंदूरी श्रृंगार

सुन, नहीं चाहती कभी निकलना जन्म जन्मान्तर तक मैं प्रिय। बस डूबी रहना चाहती हूँ ,हैं जो सिन्दूरी से अहसास हिय। अद्भुत सा स्पंदन और सिहरन सी तन मन में है फैलती। यादों में तेरी मैं जागूं, रहूं बावरी सी नित टहलती। सुन, होने का ख्याल तेरे,हया भर देता रोम रोम में देखूं स्वप्न जागी […]

पावस

कविता―पावस ऋतु देख चुका हृदय अगणित पतझर,ग्रीष्म- शरद, हिम पावस सुंदर, भूले बिसरे दर्द जगा कर,कर गयी विरह मम नैन समंदर सजल नयन जब दृष्टि घुल गई, स्मृतियों के साथ-साथ सुन,भर आईं नीलम आँखें,कंठ, हृदय बने,सागर सात। अश्रु, पावस ऋतु बन बरसे,बूंदें ज्यूं घन तरकश के तीर दामिनी रजत पंख लगाकर कड़की,विरहन उर हुआ अधीर। […]

मुस्कराहट

मुस्कुराहट तेरे होठों पर खिलती जो,मेरे चेहरे की वो रौनक है। मुस्कुराहट-मुस्कान तेरी, कभी है शहद, कभी नमक है। सुन, दिव्य आभा और नूर सहेजे है तेरी मुस्कान। हृदय मेरे का सुरूर सहेजे है तेरी मुस्कान। स्वर्णिम प्रभा और सिंदुरी शाम है तेरी मुस्कान। मेरे जीने की चाहत का जाम है तेरी मुस्कान। नव दुल्हन […]

क्यों तुम याद आती हो

क्यो तुम याद आती हो जब बरसते हैं बादल धमक ढ़ुमक नभ बाजते वादन क्यों तुम याद आती हो जब होतीं अकेली लगती अनबुझ पहेली क्यो तुम याद आती हो जब टिमटिमाटे है तारे खिलते उपवन सारे महकती हैं फिजॉए क्यो तुम याद आती हो जहॉ होतीं राहे अनजानी नयनों से गिरते जब पानी बहुत […]

अपना खून पिला कर

माँ अपना खून पिला कर जीवन का आधार दिया। अपना दूध पिला कर जीवन का आहार दिया। अपनी आँचल की छाँव में एक सुखी संसार दिया। अपने बच्चों के खातिर अपना सब कुछ वार दिया। प्यार से भी बढ़कर तुमने बच्चों को है प्यार दिया। खुद आँसू पी कर भी बच्चों को दुलार दिया। नि:स्वार्थ […]

मुलाकात

करके अनुपम श्रृंगार, भर के आंखों में प्यारl मिलने को मुझसे आई थी, परियों की रानी इक बारll शरमाते हुए सामने से आकर, अपनी पलकों को झुकाकरl थमा गई हाथ में मेरे, एक प्यारा-सा गुलाबl मिलने को मुझसे आई थी, परियों की रानी इक बारll मुस्कुराते हुए कुछ कह रही, मुझसे थी वह बार-बारl कुछ […]

सपनों के सौदागर…!

आ मेरे सपनों के सौदागर, मेरी बाहों में खो जाओ। प्रेम की बौछार से साजन, नीलंबर को ताल बनाओ। इंद्रधनुषी रंगी हैं फिजायें, गुलाबी है अंबर गुलाबी हवाएं। स्नेह की कूची से बादल रंगें हैं, ज्यूँ अंबर से टकराके लौटी दुआएँ। सुन,वातावरण परिवेश सभी, तेरी प्रीत रंग में रंगें हुए हैं। जबसे है थामा, पिया […]

मैं तुम्हें लिखूंगी

अपनी कविता में भर- भर एक दिन मैं तुम्हें लिखूंगी शब्दों के सारे पर्वत लाँघ कागज़ पर जी कर भरपूर गुलाबों से हर पंक्ति सींच मैं भी सुगंध में रचूँगी अनंत भाव आकाश सा अपनी बाहों में गहकर सागर की सारी गहराई एक प्रेमान्जुली में भरकर मौन का दुष्कर बंधन तोड़ स्वर सरिता में आकंठ […]

अल्फाज़

बहुत खूबसूरत गजल लिख रही हूं तुझे सोचकर आजकल लिख रही हूं दिन मुस्कुराहट तो रातें हैं साया तुझसे हैं महकी ये ठंडी हवाएं शायद नजर तेरी पड़ रही है मदमस्त सी हैं जो ये फिजाए आँखों को गहरी नीली सी झीलें तो होठों को तेरे कमल लिख रही हूं तुझसे मिलन हो तो कशमकश […]

उसने कहा – क्या पता

अतुकांत कविता *क्या पता* मैने पूंछा?- ‘तुम्हें शापित संसार की- अखण्डता और नश्वरता यकीनन प्रतीत होती है।’ विचाराधीन होकर उसने कहा- ‘क्या पता?’ मैने पूंछा?- ‘व्याकुल व्यथित हृदय की- अभिव्यक्त अभिलाषायें, सार आधारित होती हैं।’ उसने एकटक होकर कहा- ‘क्या पता?’ मैने पूंछा?- ‘स्वप्न सम्बन्ध– नेत्र संगमन या मननशीलता पर आधारित होते हैं।’ उसने पलकें […]

मातृ वन्दन

मातृ दिवस पर विश्व की समस्त माँओं को समर्पित⚘⚘⚘⚘⚘ हे मात तुम्हारी जय कार जीवन दायी विषाद हरणी वंदन बारम्बार मैं अंश तुम्हारा दयामही हे दिव्यरूप अनुग्रह प्रदा जय प्राण आधार भरत दीप

मेरे प्रिये

तुम बिन दिल अब कहीं न लागे, धरूँ मैं कितना धीर प्रिये। प्रीत की डोरी रेशम जैसी, न समझो जंजीर प्रिये। दर्द मिला जो प्रेम में मुझको, मीठी है वो पीर प्रिये। देता खट्टी मीठी यादें, प्रीत की ये तासीर प्रिये। खोकर पाना पाकर खोना, बदले रंग तक़दीर प्रिये। याद में तेरी नैना बरसे, लोग […]