Category Archives: कविता (वेदना)

नारी मन

सुन, अक्सर झांका करतीं आंखें,काले घने बादलों बीच। दूर धरा से रहते फिर भी,बंजर उर-मन को देते सींच। यूं ही नहीं ताकता नारी मन,नीलम बादल चंद्रमा में पाती खुद को उन दोनों में,सजल नैन शीतलपन में। मन प्रबल पर इच्छा रखती,तुड़े-मुड़े से काग़ज़ सी बीच भंवर में डूबे नौका, जैसे कश्ती काग़ज़ की। भाव हृदय […]

व्यथित मन

**व्यथित मन** अरे, सुनो जरा ये कौन रो रहा है ये किसके सिसकने की आवाज है, मैंने इधर उधर देखा, कहीं कोई भी न था। फिर देखा कि , मेरा मन रो रहा था न जाने कितनी पीड़ा थी कौन से दुःख को झेल रहा था जब पूछा उससे मैने व्याकुल होकर बोला बच्चो से […]

कलम तो एक जरिया है

कलम तो एक जरिया है, दिल के दर्द जताने का। असल मे हर्फों में बयां हो जाये वो हम नही है। जन्मो लगेंगे तुम्हे हमे समझने में। बहुत आसानी से कह देते हैं लोग, भूल जाओ पुरानी बातों को। क्या रखा है बीती बातों में। नही समझते कि वो हर लम्हा हर पल कैसेे घुट […]

कठपुतली

💐💐💐💐💐💐💐 ” कठपुतली ” न कोई जज़्बात है न कोई अरमान है मेरी जिंदगी की डोर किसी और के हाथ है स्वतंत होकर निकलूँ मैं जब भी बरसात हो ऐसी मनोकामना मेरे ह्रदय में रहती है कठपुतली हूँ मैं औरो के इशारे पर चलती हूँ मेरे मन की पीड़ा अपार अपनों के लिए बंधी रहती […]

अटल कहानी दे गये

रोता अंबर भी आज व्यथित हो धरती पर छाया सन्नाटा कैसा। जो थे अटल स्वयं एक रक्षक। सोते हैं आज धरती की गोदी में। होनहार थे जन्म से ही वो शिक्षा में भी उन्नत थे। सेवा की सदियों से देश की, परिवार के बंधन से विमुख थे। लड़े लड़ाई देश की स्वतंत्रता के लिए अनशन […]

विनम्र श्रद्धांजलि अटल बिहारी वाजपेयी

विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🌼🌼 धरती कलपी अंबर रोया विह्वल हर कंठ सुजान हुआ हर नेत्र हुआ अश्रुपूरित मुस्कानों का अवसान हुआ सत्ता रोई कविता रोई निष्ठुर कैसा भगवान हुआ चिर निद्रा में जब गए अटल अवसादित हिन्दुस्तान हुआ यह कहा मृत्यु से तनिक ठहर मैं आज नहीं कल जाऊँगा अपने भारत का राष्ट्र पर्व मैं अन्तिम […]

अटल तुम अटल थे- अटल बिहारी वाजपेयी

ज़िन्दगी जीने में वो सफल रहे। काल की गोद में ही पलते रहे। अटल तुम अटल थे अटल रहे। मृत्यु भी ना कुछ बिगाड़ सकी। सामने काल देख वो हँसते रहे। अटल तुम अटल थे अटल रहे। वो सरस मन कवि ह्रदय रहा। देश को कभी न झुकने दिया। देश के दिल में सदा बसते […]

अनाम प्रेयसी का खत

हे मिताक्ष !! हे मिनाक्ष !! भूल से भी कभी अदृश्य तुम्हारी छवि पर किसी मन्तव्य से राग न जगा मुझमें !! तुम्हारे अरूप रूप डील-डौल या सुगढ़ काया से प्राप्य काम्य की कभी ख्वाब में भी कल्पना न की मैंने !! फिर भी युगों से अतृप्त नयन में ओस सा तुम्हें सहेज कर रख […]

दाह संस्कार

दाह सँस्कार आज मरे कल दूसरा दिन !! सारी सारी रात जाग कर जिसने सबकी मंशा पूरी की थी 👌 रात अपना ” दाह संस्कार ” देखा मेरा शव एक चबूतरे पर रख कर आसपास अगरबत्तियां जलाकर पिंड दान करके मुझे खुद से अलग कर लिया मेरे अपनो ने और मैं प्रेतयोनि में चला गया […]

छोडो मायाजाल को

जिन्दगी एक गाड़ी है, संसार के तमाम स्टेशन मे यह रूकती है,,। कभी दुःख का मौसम आता है, कभी सुख की फुलवारी आती है,,,।। कभी कोई छोड़कर जाता है, कुछ बिन मांगे ही मिल जाता है, राहो मे कांटे तो होगे,लेकिन अपने पथ पर निरन्तर बढते चलो,, हंसते हंसते सफर तय करना होगा,मंजिल की मत […]

कवियों के सरताज गोपाल दास नीरज

जो करते थे शब्दों से प्यार वो कवियों के सरताज रच कर इतिहास चले छोड़ हमारा साथ चलें सुनकर जिनके अल्फाज बढ़ जाता मन में विश्वास अपने शब्दों के जादू से जो करते हर एक दिल पर राज ऐसे कवि थे श्री गोपालदास शांत छवि मधुर मुस्कान सदा याद रखेगा यह जहां जिनके गीत बढ़ाते […]

ख्वाब —तुम्हे समझाएं क्या

#ख्वाब……तुझे समझाएं क्या ________ चले इस कदर साथ कि चल ही न सके लाख पाला ऐ ख्वाब तुम्हे दिल में पर तुम खुद पल ही न सके नहीं आता तुम्हे खुद अपने ही सखाओं में रहना दर्द और दुःख हतासा में बहना पलना हैं अगर ख्वाब दिल में तुमको तो झमेले ये सब सहने होंगे […]

प्रताड़ना का बाजार

समाज हमारा बन रहा क्यों प्रताड़ना का बाजार मानवता हों रही कलंकित बनी वासना का औजार हो रहा निस काल विसंगत, बढ़ रहा व्यभिचार प्रलय घटा बन काम वासना कर रही हाहाकार। अनैतिकता का कोहरा सघन हो रहा दीन ईमान का दहन हो रहा। स्वार्थांध में मनुष्यता की नित शिला ढह रही आशाओं की​ ज्योति […]

कभी मिलना उन गलियों में

कभी मिलना उन गलियों में जहाँ छुप्पन-छुपाई में हमनें रात जगाई थी जहाँ गुड्डे-गुड़ियों की शादी में दोस्तों की बारात बुलाई थी जहाँ स्कूल खत्म होते ही अपनी हँसी-ठिठोली की अनगिनत महफिलें सजाई थी जहाँ पिकनिक मनाने के लिए अपने ही घर से न जाने कितनी ही चीज़ें चुराई थी जहाँ हर खुशी हर ग़म […]

घुटन

स्त्री सिर्फ तब तक तुम्हारी होती है जब तक वो तुमसे रूठ लेती है,लड लेती है आंसू बहा बहाकर , और दे देती है दो चार उलाहना तुम्हे। कह देती है जो मन में आता है उसके बिना सोचे,बेधडक लेकिन जब वो देख लेती है उसके रूठने का, उसके आंसुओं का कोई फर्क नहीं है […]

बर्फ

बर्फ! फ्रिज में रहे तो कड़क, बाहर रख दो सिर्फ पानी, हाँ बर्फ! नही उसका कोई आकार, नही रखे कभी कोई प्रकार, जैसा चाहो ढल जायेगा, वैसा ही बन जायेगा,हां बर्फ! ए काश! जिंदगी भी बर्फ की मानिंद हो जाये, जैसा हम चाहे वैसे ही अब ढल जाये, सिर्फ काश! काश!सिर्फ शब्द ही ना रह […]

जान बाकी है

वो अपने कौन लगते है , जो हम कुछ कर नही पाए । ज़ख्म क्या इतने गहरे है , जो अबतक भर नही पाए ॥ उस बेवफा की अब तलक पहचान बाकी है । जरा सी देर ठहरो तुम मुझमे जान बाकी है ॥ हमारे जलवे ऐसे है कि हम पतझड़ मे खिलते है । […]

-एक खत माँ के नाम-

-एक खत माँ के नाम- कैसे कहूँ तूझसे दूर कैसी हूँ माँ जन्म दिया तुने लेकिन तूझसे ही मिल नही पाती हूँ ताने जिनके सुनती हूँ रोज उनके ही नखरे ऊठाती हूँ कैसे कहूँ तुझसे.. तेरे पास जब थी मेरी भूख का एहसास तुझे मुझसे पहले ही हो जाता था अब तो अक्सर ही रोते-रोते […]

दहेज का दर्द

जैसे जैसे होती मेरी बिटिया सयानी क्षण क्षण बढ़ती चिन्ता मेरी कैसे इसका ब्याह रचाऊं, हो रही दहेजों की मांग भारी जैसे जैसे होती। जीवन अपने जो भी कमाया, सारी इनकी परवरिश में है लगाया। अब कहां से लाऊं इतना धन, जिससे बनेगी मेरी बिटिया दुल्हन। जैसे जैसे होती मेरी………. देखकर दुनिया की जालिम रीति […]

मैं किसान हूँ

इक नाम और गरीब मेरा, मैं किसान हूँ| सबसे बुरा नसीब मेरा , मैं किसान हूँ| ++ भूखा हूँ पर अनाज के गोदाम भर दिये, किस्सा बड़ा अजीब मेरा, मैं किसान हूँ| ++ पैदा नहीं हुआ वही मँहगा मिले मुझे, जादा उपज सलीब मेरा , मैं किसान हूँ| ++ सींचूँ पसीने से वो खजाना तो […]