Category Archives: गीतिका (प्रेम)

कन्हैया को कभी दिल मे

कन्हैया को कभी दिल मे ————————- कन्हैया को कभी दिल मे बसाया ही नहीं तुमने । इसी से प्यार में प्रतिदान पाया ही नहीं तुमने ।। यही डर था कि जादू कर न दे घनश्याम मनमोहन निगाहों से निगाहों को मिलाया ही नहीं तुमने ।। दिवाना साँवरा नवनीत का यह जानते हैं सब हृदय की […]

करवाचौथ

करवाचौथ सुनो,चाँद,विधु,सुधाकर,कलानिधि, निशापति, शशांक। तुम चन्द्र हो चांदनी निशा के और मेरे पिया हैं मेरे मयंक। साज-श्रृंगार मेरे साजन से,खुमार शुमार रहता साजन से। घर परिवार सभी साजन से,प्यार बयार बहती साजन से । हे पूनम सुहास चंद्रमा सातों जन्म के साथ का वर देना । हे रजनी उजास चांद तुम नीलम अंबर पर सु-दर्शन […]

अहसास कुछ खास

प्रेम का एहसास है कुछ खास समझ लेता है हृदय नयनों की भाष। कुछ तो पा ही लेते हैं प्यार की मंजिल कुछ तड़पते हुए बनजाते हैं बस ज़िंदा लाश। प्रीत की रीत से चाहत का दीप सुनो, नव निर्मल एहसास लिए जलता है। सुन, वजूद प्रेम के होने का, नित नई आस लिए पलता […]

समर्पण

मैं प्रतीक्षा कर, तुम्हारे, इक प्यार की ही खुश रहूँगी।। मैं तुम्हारे दर्द का , संसार लेकर खुश रहूँगी। मैं तुम्हारे क्रोध का , अंगार लेकर खुश रहूँगी।। मैं तुम्हे हर हाल में, स्वीकार करके खुश रहूँगी। मैं तुम्हारे प्यार को प्रिय ! प्यार देकर खुश रहूँगीं।। तुम मुझे हिय में बसाओ , या भुला […]

दरिया में अब रंवानियाँ  रख जा

इश्क़ में कोई कहानियाँ रख जा दरिया में अब रंवानियाँ  रख जा।। गली में मंडरा रहे आशिक देखो अब कुछ तो निशानियाँ रख जा।। याद  करते  रहे  हम तुझे ता उम्र इन किताबो में तितलियाँ रख जा।। मुरझा रहे है वो खिले गुलाब प्यार की अब वो डालियाँ रख जा।। वो सज  सँवर के  ऐसे […]

देह मन्दाकिनी

गीतिका ————- देह मन्दाकिनी निर्मला हो गयी । आज एकादशी निर्जला हो गयी ।। दूध सी रोशनी है बरसने लगी चाँदनी चन्द्रमा की कला हो गयी ।। छिप रही थी अँधेरों के आगोश में कामना चाँद की उज्ज्वला हो गयी ।। खिल गयी रातरानी घने कुंज में महमहाई पवन चंचला हो गयी ।। श्याम की […]

तुम से प्यार करता हूं

इश्क में तेरे डूब कर, खता हर बार करता हूं, मोहब्बत है तुमसे बस तुम से ही प्यार करता हूं। ख्वाबो में तुम्हें पा कितना हड़बड़ा जाता हूं, समंदर की लहरों में,हर लम्हा लम्हा बहता हूं। जुदा हो कर तुमसे हम, छिप छिपकर कितना रोये, उन्हें क्या पता कि मैं उनकी पलकों पर बसता हूं। […]

अबके फागुन में…..

  अबके फागुन में प्रियतम मैं एक अनूठा फाग लिखूं, तेरे और मेरे इश्क की एक नई दास्तान लिखूं। धानी चुनर ओढ़ कर मैं फागुनी बयार में इठलाऊं, अधरो पर नाम ले तेरा इश्क की नव बहार लिखूं। तन भीगा मन‌ भी भीगा, भीगी कुछ पलकें मेरी, बहकते मन से भीगे मन से तू कहें […]

रश्में उल्फ़त

दिल किसी से जब लगाना चाहिए। रश्में उल्फ़त भी निभाना चाहिए।। प्यार में रूसवाईया भी गर मिले अश्क आँखो में न आना चाहिए।। इस ज़माने को न हो जाये खबर। आह दिल में ही दबाना चाहिए।। बेवफ़ा उस बेरहम के प्यार में। दिल नहीं अपना जलाना चाहिए।। ग़मजदा हो कर जियेंगेे कब तलक। भूल ग़म […]

आवाज दिल की

सूखे पेड़ो मे कहाॅ फूल खिला करते है। वो तो कलियो के बहारो मे,मिला करते है।। *यू मेरे दिल कि धड़कनो मे वो बसने वाले। आ के तू देख यहाॅ,कैसे जिया करते है। *याद आते है तेरे साथ के,हर लम्हे मगर। गुजरे हुये पल वो कहाॅ,फिर से मिला करते है।। *भूल जाने की लाॅख कोशिसे […]