Category Archives: गीतिका (वेदना)

दर्द को दिल में छुपाना आ गया

दर्द को दिल में छुपाना आ गया —————————— दर्द को दिल मे छुपाना आ गया । रोक आँसू मुस्कुराना आ गया ।। हो गया ऐसा असर है इश्क़ का चैन दिल का भी चुराना आ गया ।। ख़्वाब फिर हैं नैन में सजने लगे फिर लबों को गुनगुनाना आ गया ।। राह मंजिल की कठिन […]

बहुत पछताएँ

बहुत पछतायें तुझसे रूठके हम रहेगें खुश तुझे अब छोडके हम हमें आवाज ना दे ठीक है सब करें भी क्या भला अब लौटके हम ज़ुदा होने का हमको शौक़ ना था अलग तुझसे हुए कुछ सोचके हम नही अब शौक़ तेरे दिल में क्या है बहुत ही थक गये है पूँछके हम किसी भी […]

खेला बहुत है

मेरे जज़्बात से खेला बहुत है सुधर जा यार बस इतना बहुत है अभी से आज से मेरा नही तू कि मेरा एक दिन कहना बहुत है नही कुछ भी नही है लुत्फ़ तुझमें तुझे ए! ज़िन्दगी सोचा बहुत है बता कैसे करू तुझपे यकीं अब यही सच है कि तू झूठा बहुत है किसे […]

बुलाता है तुम्हें ये मन चले आओ चले आओ

बुलाता है तुम्हें ये मन चले आओ चले आओ।। कहीं उजड़े न ये गुलशन चले आओ चले आओ।। तुम्हारे कहकहे से ही मिरा घर बार रौशन था। बुलाता है तुम्हे आँगन चले आओ चले आओ।। बुलावा आ गया मेरा बहुत ही दूर जाना है। हुआ अब ख़त्म ये जीवन चले आओ चलें आओ।। तुम्हारी याद […]

बिलखती रही चीखती ही रही वो

बहुत ही सताया दरिंदों ने उस को। बहुत ही रूलाया दरिंदों ने उस को। बिलखती रही चीखती ही रही वो नहीं फिर भी छोड़ा दरिंदो ने उस को। किसी के जिगर का वो टुकड़ा थी लोगो मगर रौंद डाला दरिंदो ने उस को।। नहीं सख्त कानून अब तक यहां है। तभी मार डाला दरिंदों ने […]

नज़र से नज़र तुम मिला कर के जाते

गले से मुझे तुम लगा कर के जाते।। नज़र से नज़र तुम मिला कर के जाते।। मुझे बेवफ़ा कह के ओ जाने वाले वफ़ा क्या है मुझ को बता कर के जाते।। जो वादे किय थे मुहब्बत में तुम ने। वो वादे सभी तुम निभा कर के जाते।। अगर छोड़ कर मुझ को जाना ही […]

यमुना तीर

गुमसुम होकर राधिका ,बैठी यमुना तीर नही कृष्ण आये अभी ,कौन बधाये धीर कृष्णा पुकारे राधिका ,बनकर के गोपाल तांक रही है शून्य में ,नयनों में भर नीर ज्यो नजरें नीची हुई ,देखा अद्भुत दृश्य निज परछाई खो गई,कृष्ण दिखे है क्षीर देख कृष्ण की साँवली ,सूरत हुई बिभोर सुधबुध के संग राधिका ,खो बैठी […]

सूखी रेत का दरिया

मैं कैसे बताऊँ जाकर उन्हें अब कि वही तो है मेरे ग़म का ज़रिया मैं उदास राहों का हूँ एक मुसाफिर और मेरा दिल सूखी रेत का दरिया मेरे दिल के सुकूँ को अब छीनकर कहते हैं वो कि है सब यहां बढ़िया कैसे कहूँ उनसे कि तुमने कर दिया है ये मेरा दिल सूखी […]

तुम्हारी याद में

बुलाता है तुम्हें ये मन चले आओ चले आओ।। कहीं उजड़े न ये गुलशन चले आओ चले आओ।। तुम्हारे कहकहे से ही मिरा घर बार रौशन था। बुलाता है तुम्हे आँगन चले आओ चले आओ।। बुलावा आ गया मेरा बहुत ही दूर जाना है। हुआ अब ख़त्म ये जीवन चले आओ चलें आओ।। तुम्हारी याद […]

गमों से ये भरी है

गमों से ये भरी है…. जिन्दगी क्यूँ । कभी गम तो कभी है ये खुशी क्युँ।। कभी तन्हाईयो का है येआलम। कभी हंसती रही है जिन्दगी क्यूं।। सहे हर दर्द हम ने तो खुशी से। रही हर वक्त आँखो मे नमी क्यो।। कभी शिकवा नही हमको किसी से। रही मुझ से खफा ये जिन्दगी क्यो।। […]

उजड़ता गया शहर पुराने सा

उजड़ता गया शहर पुरानों सा । चलता गया एक  अनजानों सा रख कर अपनी ही नमी को , रिसता रहा मकान पुरानों सा । तंग नही गलियाँ शहर की मेरे , रास्ता मिलता नही ठिकानों का । तंग दिल नही है लोग मेरे वास्ते , थामे हर शख़्स दामन बहानो का । “निश्चल” जानता सारा […]

कुछ बच्चे

ख़ामोशी से सो जाते हैं ग़ुरबत का बोझ लिए                         भूखे ही सही मगर मज़बूत से कुछ बच्चे तन्हा रातों में सड़क किनारे सितारों को ताकते                       आँखों में हज़ारों ख़्वाब छिपाए कुछ बच्चे चन्द […]