Category Archives: गीत (अन्य)

सिन्दूरी से अहसास हिय।

सुन, नहीं चाहती कभी निकलना जन्म जन्मान्तर तक मैं प्रिय। बस डूबी रहना चाहती हूँ ,हैं जो सिन्दूरी से अहसास हिय। अद्भुत सा स्पंदन और सिहरन सी तन मन में है फैलती। यादों में तेरी मैं जागूं, रहूं बावरी सी नित टहलती। सुन, होने का ख्याल तेरे,हया भर देता रोम रोम में देखूं स्वप्न जागी […]

प्रिय अटल बिहारी वाजपेयी जी!

हम नमन हृदय से करते हैं। नम नयनों से अनायास ही, अश्रु विकल होकर गिरते हैं। हम नमन हृदय से करते हैं।। हे जन नायक ! हे महाप्राण! तज देह चले करने प्रयाण। क्या ब्रह्मलीन यूँ हो जाना? क्या सम्भव ऐसे सो जाना? जो बीज प्रेम के बोते हैं, वह महापुरुष कब सोते हैं? जो […]

कहीं दो बूँद कहीं पर बाढ़ अजब बरखा तेरे उपहार

एक बरखा गीत ========== कहीं दो बूँद कहीं पर बाढ़ अजब बरखा तेरे उपहार | कहीं तू ओलों से दे मार कहीं पर बरसे मूसलधार | ** कृषक जन सपने बोते हैं हमेशा तेरी आवक से | अगर न आती तू दिन-रात गुज़रते जैसे पावक-से | बहुत आशाएं भी सबकी टिकी रहतीं बारिश तुझ पर […]

अब गीत स्वयं के गाऊंगा

गाये गैरों के गीत बहुत अब गीत स्वयं के गाऊंगा | ** मेरा भी मन क्या कहता है लिख कर जग को बतलाऊँगा | ** भाषा छंदों का ज्ञान नहीं मन उपजे भाव लिखे मैंने | अपने हो या हो औरों के केवल अहसास लिखे मैंने | अनचाहे मेरे शब्दों में दुख-दर्द ढले हैं अपनों […]

भटक रहा है हृदय दिवाना

युगल चरण थक गये राह पर इतना अधिक चली भटक रहा है हृदय दिवाना अब तक उसी गली ।। टूट गयी पायल पाँवों की घुंघरू बिखर गये धुंधले हुए नयन पर सपने कितने निखर गये । बिखरे पत्तों वाली मन को बंदनवार खली । भटक रहा है हृदय दिवाना अब तक उसी गली ।। जगी […]

सावन में छाई हरियाली……

हरियाली गीत सावन में छाई हरियाली हरियाली…… बनी बींदणी विरह, विरहिन की,गूंजी हिबड़ा मधुर शहनाई, छम -छम नाचे मन की मोरणी,रे जैसे बिरखा सुखद बरसाई सावन में छाई हरियाली हरियाली,सावन में छाई हरियाली हरियाली (२) ज्वलंत विरह से मिली है मुक्ति, होगा हर पल-क्षण सुखदाई, देखो धरिणी बणी सुहागन, है जागी कान्हा मन करुणाई। सावन […]

कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल-ए-यार….

कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल-ए-यार की, बंद पलकों में सजाये ख्वाब निगाहें-ए-प्यार की। रूठ वो किस बात पर हमें कोई अंदाजा न था, बीत गयी सारी रात आंखों ही आंखों में यार की। जिन्दगी का जिन्दगी से रहे राब्ता जीवन भर, बरसा दो लफ्जों से प्यार जलधार की। निगाहें फेर हमसे जीने का […]