Category Archives: गीत (वेदना)

“निकल गये”…

°°° जाने क्या ख़्वाब देखे , ज़ेहन में क्या-क्या पल गये ? कुछ अच्छा कुछ बुरा , दोनों अश्क़ बनकर निकल गये ।। . हर लम्हें में कुछ न कुछ पाने की ज़रूर आस थी , खुशियों की सभी चाबी मानो अपने ही पास थी । मगर अहसास और उम्र मिलकर जाने क्यों छल गये […]

गीतकार गोपाल दास नीरज को समर्पित

गीतों की अद्भुत कहानी दे गए आँखों में आँसू निशानी दे गए ।। शब्द में ढ़ाला है खुद को इस तरह खुश्बू घुलती है हवा में जिस तरह गीत को अपनी जवानी दे गए,,, *आँख में आंसू,,,,,,,,* थी कठिन जीवन की राहें ये बड़ी मुश्किलें मिलती रही थीं हर घड़ी हौसला हमको तूफ़ानी दे गए,,,, […]

जल बिन जीवन विकल

हैं बाट जोहती नल पर……. कुछ सोच रहीं क्यों जल जीवन? कुछ कलश सहेजे कमर पर। हैं बाट जोहती नल पर……… कोई न नद जल कूप शेष बिन छाँव बिलखते,हृदय कलेश। स्याम देह, विचलित यौवन, कड़ी धूप,कठिन कर्म-वचन- मन, रिक्त कलश अहसास, हुई जल बिन मन मीन उदास। कुछ सोच रहीं क्यों जल जीवन? कुछ […]

सजना तुम ना आये

बरखा की रुत आई फिर से सजना तुम ना आये | *** रातें तो बैरन पहले से दिन अब हुए पराये | *** याद आज भी प्रथम मिलन की पहली बरखा आती | कड़की बिजली लिपट विटप से एक लता शर्माती | धड़का था दिल तब जोरों से गूंज आज भी मन में | झंकृत […]

दरकती रूह के जज़्बात

दरकती रूह के अनकहे जज़्बात दरकती रूह है,और इश्क की मीनारें हैं। चलो जो तुम तो, सफर की ही सरोकारें हैं। बिन तेरे चैन कहाँ, कैसे सफर हम ये करें। हमको हर वक्त तेरे , प्यार की दरकारें हैं। तुमको दिल में पनाह देके, क्या गुनाह किया। बसाया नजरों में, तुझे ही आफताब किया। तेरे […]

पिया बिछड़न

सखी रे राति दिन मा नाहि बीतेला मोर भरी-भरी आबे नयना में नोर कि सखी रे पियबा गइले परदेशबा भोर-भोर कि सखी रे जिया घबराबे मोरा खुब जोर कि सखी रे राति दिन मा नाहि बीतेला मोर… जबे जबे आबेला मोरा याद सजनवा होखेला मनवा भारी ओउरे चित्त बेरंगा कि सखी रे एको छणमा भेंटे […]

नहीं पास रहता है कोई

नहीं पास रहता है कोई फिर भी आहट कैसी है. सखी ज़रा बतलाओ मन में ये घबराहट कैसी है. क्यों लगता है चुप चुप आया,कोई मन के अब द्वारे. कब कैसे अनजाने अपना,ह्रदय लग रहा ये हारे. नयन बड़े बेचैन निरंतर बाट जोहते क्यों किस की, यौवन में क्या होता ऐसा दिन में दिखते हैं […]

निर्भया-न्याय?

थी निर्भया या दामिनी, या मात्र नारी याचिनी। सृष्टि – अभया दिव्य पूजित, दुख सह रही जग- दायिनी।। कैसी विधा है न्याय की, क्या न्याय – परिभाषा रही। पलड़ा बराबर यदि नही, क्या माप की आशा सही।। क्षत विक्षत तन मन किया ज्यों, अवरुद्ध कर दो प्राण त्यौ। कोख माँ की कह रही है, दण्ड […]

गीत- खिली रातरानी खुशबू पर

गीत ——– याद प्रसून जहाँ खिलते वह सूखी डाली है । आज न जाने क्यों मन मेरा खाली खाली है ।। खिली रातरानी खुशबू पर हैं सौ सौ पहरे , तितली भौंरे इन फूलों पर लेकिन कब ठहरे । हर गुलाब का शूल आज बन गया सवाली है । आज न जाने क्यों मन मेरा […]

मर कर भी न मिटने पाएगी

छायावादी की स्तम्भ महादेवी वर्मा को उनके जन्मदिवस पर उन्हीं की छाप ली हुई एक  रचना जिसे गाया भी है प्रस्तुत करती हूँ,. ,इसी रचना के माध्यम से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करती हूँ मर कर भी न मिटने पायेगा मैं ऐसी बनी एक अफसाना तेरे रहते ओ ऊपर वाले संसार हुआ मेरा वीराना ।। […]

“ये क्या हो गया है…?”

°°° बस्तर की वादियों में आजकल ये क्या हो गया है ? इंसान तो हैं मगर मानवता अब तो खो गया है ।। . कभी बसते थे ये गाँव , आज हर तरफ़ है सुनसान , ख़ौफ़ इधर , हवा में बारूदी गंध की है फ़रमान । खेत सिसक रहा है , जंगल भी आँखें […]

फिर सियासत ने भूख छीनी है …..

फिर सियासत नें भूख छीनी है फिर से चादर ये झीनी ,झीनी है क्यूं नही आता है तरस हम पर, जिन्दगी क्यूं ये पानी , पानी है ………फिर सियासत ……. काला धन कौन ले के आयेगा भूख ना कोई बांट पायेगा जिनके घर में है नोटों के बोरे उनके पास एक नई कहानी है ……….फिर […]