Category Archives: गीत (संदेशात्मक)

इस पर करो विचार

कितने दिल के अरमां टूटे , कितनी अँखियाँ तरसी । सावन के मौसम मे भोले , क्यों न बूंदे बरसी ।। थोड़ा इस पर करो विचार हो रही है क्यों हाहाकार । थोड़ा इसपर करो विचार हो रही है क्यों हाहाकार ।।१|| पिछले दशक में इसी माह में , खूबई बरसा होती । आज का […]

सदा दशहरे पर हम फेंकें

सदा दशहरे पर हम फेंकें शब्दों के रावण पर बाण | अपने उर का रावण मारो इसमें है सबका कल्याण || *** झूठ-कपट और द्वेष-भावना अहंकार को सब त्यागो | लालच तृष्णा काले धन के पीछे सारे मत भागो | ये रावण के बन्धु-बान्धव इनसे पा लें सब परित्राण | अपने उर का रावण मारो […]

“उदासी कैसी…?”

°°° बेवज़ह की ये दिल पे छाई है उदासी कैसी ? उमंग से बढ़कर जीवन में नहीं कोई हितैषी ।। . सभी उम्र में एक अदद ख़ूबसूरती होती है , मगर बीते दौर की भला कहाँ पूर्ति होती है ? हर्ष न रहे , सोच रह जायेगी वैसी की वैसी , उमंग से बढ़कर जीवन […]

बारिश

बारिश उमड़ उमड़ रहे घुमड़ घुमड़, घन बरसाने को वर्षा घरड़ घरड़ सुन गरज गरज, प्यासी धरा उर हर्षा। छम छम बूंदें बाज रहीं, थिरके प्रकृति अलबेली। श्रावण माह में पड़ गये झूले, सखियां करें अठखेली। हुलस हुलस कर कुहके कोयल, मधुर शहद सी उसकी बोली। आ हाथ पकड़ बरसात में भीगें, हम तुम सजना […]

कविता तो कविता होगी

जो आँख शुष्क है सदियों से अब उनमें भी सरिता होगी दरबारी कोई गीत नही बस कविता तो कविता होगी तुलसी केशव कालिदास सा कोई ज्ञान नही होगा रक्त पिपासा का कविता में कोई स्थान नही होगा मानव उर की पीड़ा के संग माँ की भी ममता होगी दरबारी कोई गीत नही बस कविता तो […]

आओ मेघा प्यास बुझाओ

गीत ———- आओ मेघा प्यास बुझाओ धरती तरस रही है । धरा सुतों की घोर निराशा छल छल बरस रही है ।। अम्बर में है सूरज तपता धरती तवा बनी है ग्रीष्म तपन में जाने कैसी ये तक़रार ठनी है ? विकल हुई देखो वसुधा जो अब तक सरस रही हैं । धरा सुतों की […]

“बाधाएँ आती हैं आयें”

राही को बढ़ते जाना है, बाधाएँ आती हैं आयें।। जान रहा है राही,चलना, उसके जीवन की नियती है। उसके पाँव के छाले जानें, क्या उसके ऊपर बीती है। धूमिल और पथरीली राहें, पग-पग पर रोड़े अटकायें।। दूर है मंजिल,लंबा रास्ता, आसमान से अग्नी बरसे। थकी देह है,सूखी आँखें, और कंठ पानी को तरसे। सीख रहा […]

झोंपडी और महल

गीत —— जब यह दुनियाँ वसुधा अंचल में सोती है । तब झोंपड़ियों से लिपट चाँदनी रोती है ।। क्यों ताजमहल से महल बनाये हैं जग ने क्यों प्रासादों में सुंदरता सरसायी है ? महलों के ऊँचे शिखरों के नीचे ही क्यों फिर दीन हीन झोंपडियाँ गयीं बनायी है ? रजनी की इन तम भरी […]

बेटी तो बेटी होती है

गीत ——– बाबा के आंगन की शोभा माँ के आँचल का मोती है । बेटी तो बेटी होती है ।। माता की कोख पवित्र करे जो जीवन सुखद विचित्र करे । उसके आंचल में गिर गिर कर बनता अंगारा मोती है । बेटी तो बेटी होती है ।। वह सीता है या सलमा है वह […]

ख़ुद को ज़िंदा रखना है तो पेड़ बचाओ

ख़ुद को ज़िंदा रखना है तो बीजो पेड़ बचाओ बाग़ | *** क़ुदरत के भंडारों को जब मानव करता अति दोहन | काट गले पेड़ों के कब तक क़ायम रक्खोगे जीवन | धरती की छाती में मानव छेद करोगे तुम कितने , रोको जल्द धरा का इतना ठीक नहीं है उत्पीड़न | क़दम उठा लो […]

कवि बनना आसान नही है

थोडा उद्यम करने से गीतकार तो बन सकता है लेकिन सच पूछो तो यारो कवि बनना आसान नही है। अंतः घट से रिस रिस करके क्रंदन स्वर में बहने वाली कविता तो कवि का सम्बल है शांति हृदय को देने वाली कुसुमो की कोमल शैय्या पर मुस्काना आसान बहुत है लेकिन सच पूछो तो कांटो […]

उमड़ता जब ह्रदय में प्यार कविता जन्म लेती है

उमड़ता जब ह्रदय में प्यार कविता जन्म लेती है | प्रकृति जब जब करे श्रृंगार कविता जन्म लेती है | *** नहीं देखा अगर जाये किसी से जुल्म निर्धन पर बने संघर्ष जब आधार कविता जन्म लेती है | *** हुआ विचलित अगर मन है किसी भी बात को लेकर गलत जब हो नहीं स्वीकार […]

आराधना

जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ । हे दया नंदिनी माँ मेरी मैं शीश झुकाने आया हूँ ।। नहि लाया पूजा की थाली । दोनों हाथ हमारे खाली ।। भावों को लेकर माँ केवल मैं तुझे रिझाने आया हूँ । जै विंध्य वासिनी मात मेरी मैं द्वारे तेरे आया हूँ ।। […]

मन के खेल

मन का ओर न छोर..। बावरे मन का ओर न छोर….।। कभी कहे इस ओर चला चल, कभी कहे उस ओर..। बावरे ,मन का ओर न छोर।। रंगबिरंगी उड़ें पतंगे हैं रंगबिरंगी डोर..। विचलित चित्त करेगीं इक दिन आज दिखें चितचोर..।। बावरे, मन का ओर न छोर..।। सहज राह से बचने कहता ये जालिम मुँहजोर..। […]

निचोड़

एक गीत देखिएगा दोस्तो धीरे-धीरे खुद को जैसे पा रहा हूँ .. ज़िन्दगी को गुनगुनाता जा रहा हूँ …. शुष्क शोषित भावनाओ की जहाँ परछाई देखी ! बुझ रहे दीपों की जब भी सिसकती रानाई देखी !! खो गए विश्वास की जब बेतरहा ढूढ़वाई देखी !!! भावना के बादलों को उर संजोये तप्त हृदयों पे […]