Category Archives: पद

ले जा अपना ज्ञान पुराना

ले जा अपना ज्ञान पुराना । तेरे लाये अमृत – जल से हम को नहीं नहाना ।। जा कर कहो कन्हैया से फिर धारे वो ही बाना । मोर मुकुट तिरछा पग नटखट वंशी मधुर बजाना ।। यमुना की चाँदी सी सिकता पर आ रास रचाना । डाल गले में बांह कन्हैया हंसना और हंसाना […]

चलो मन

चलो मन उस वृंदावन गाँव । जहाँ बजाये श्याम बाँसुरी खड़ा कदम्ब की छाँव ।। यत्न किये पर सुलझ न पाये जीवन के उलझाव ।। वैरी सारे जग के बन्धन जिन से रहा जुड़ाव ।। छोड़ो झंझट चल जमुना तट अब तो करो पड़ाव ।। माया मोह रज्जु नित लिपटी करिये श्याम बचाव ।। ——————————–डॉ. […]

चित्त

अस्तांचल रवि पीताम्बर नभ,जग सतरंगी वस्त्र पहनावत। आकुल व्याकुल विरह विरहणी,पिय गृह आवन वाट निहारत। सांझ को आन के गृह तरु पर खग कोलाहल कर नभ गुंजावत। मंदिर-मंदिर धाय के रमणी विरह विसार हरि चित्त लगावत।। नाम-कृष्ण कान्त तिवारी “दरौनी”