Category Archives: मुक्तक (अन्य)

बस अंत

बस अंत हुआ मानों सर्दी का, देखो बसंत नव आया है। बस अंत हुआ मानों विरहा का, रंग प्रेम बसंती छाया है। बस अंत हुआ छोटी रातों का,देखो दिनकर गहराया है। बस अंत हुआ मानों आलस का, ऊर्जा प्रकाश लहराया है। नीलम शर्मा ✍️

संग संग

सुरभित शीत बयार,घन गरजे चपला संग, आने को बरसात, विरहनी भरा मन उमंग। ताड़-तरु खग-विहग संग पूर्वा,लगी गाने, कूके कोयल, मोर, प्रकृति भी नाचे संग-संग। नीलम शर्मा ✍️

जरूरी तो नहीं

हजार कोशिशें की मैने , तुझको ही जिताने की । हो हरबार मेरी हार , जरुरी तो नही ॥ ताउम्र करता रहा , तेरी गलतियों को माफ । बख्शिस मिले हर बार , जरूरी तो नही ॥ हर मर्तबा चला यूं , अकेला ही राह पर । कोई साथ हो इस बार , जरूरी तो […]

सिसकियाँ

तड़पनें दो दिलों की,सनम सिसकियां याद रखती हैं मधुर प्रीतम की यादों को, हिचकियां याद रखती हैं । भले बीते अनगिनत साल ,तेरे दिदार को दिलबर, तिरी मीठी छुअन को दिल की कलियाँ याद रखती हैं । ********** बागबान चाहिये और चमन चाहिये मेरी चाहत को पूरा गगन चाहिये। डूबा कबसे अंधेरे में दिल है […]

” अपनी दिक्कतो से मजा”

अपनी दिक्कतो से भी मजा लेते है, हर परेशानी को दिल से लगा लेते है, दुनियाँ जलती है अपनी मोहब्बत से, हम तन्हाई में भी महफ़िल सजा लेते है, ” नीरज सिंह “

एक स्याह रात है

नींद हमे न आए तो, नही कोई बात है । कल की फिक्र का हमे, करना इलाज़ है । फ़िक्र आज की बूंदों से तर जज़्बात है । अपनी तो चाँदनी भी , एक स्याह रात है । . … विवेक दुबे”निश्चल”@…