Category Archives: मुक्तक (वेदना)

“उम्र भर”…

°°° हर उम्र में हर शौक़ हर किसी का बस बदलता रहा , पलकों तले हसीं ख़्वाब आहिस्ता से पलता रहा । मिल गया तो ज़हान की हर खुशी अपनी मुट्ठी में , और नहीं मिला तो मन बहुत ही बस मचलता रहा ।। . हर शय से इश्क़ करने की इक ख़्वाहिश आज भी […]

अंगारों का शोर

आज प्रेम ने मुझे ,यूँ दिया झकझोर । जैसे बरसे आँगना, हो अंगारों का शोर। जाने किसका हो गया, मेरा नन्दकिशोर। अब न दिखती रोशनी, बस है अंधियारे का जोर। मीनू पाण्डेय

धोखा

छलने बालों की कमी नही है दुनिया में । एक बिछड़ेगा तो दूजा भी मिल जाएगा। तुम अगर तमाशा बीन बनने के लिए ही पैदा हुए हो । तो फिर तुमको जमाने से भला कौन बचाऐगा। ड़ाॅ मीनू पाण्डेय

खुशियां रास नहीं आती

खुशियों को भी खुशियां मेरी ,रास नहीं आती। गुजर जाती हैं गलियों से, पास नहीं आती। जिस घड़ी का इं तजार करते हैं बरसों से, सजती है कई महफ़िल,वो घड़ी खास नहीं आती। Shobha kiran

जिंदगी एक मेरी अमानत नहीं

जिंदगी से शिकायत करें भी तो क्या। जिंदगी एक मेरी अमानत नहीं।। उम्र भर कैद रहना ही है जिंदगी। इस सज़ा में मिलेगी जमानत नहीं। अंशु

कैसे जमाने आ गये

क्या कहें यारा ये अब कैसे जमाने आ गये। अपने क़ातिल फैसला हमको सुनाने आ गये। जब भी चाहा ढूंढना हम ने तो दुनिया में खुशी, हाय! हाथों में मेरे गम के ख़ज़ाने आ गये। ——राजश्री——

“अंतर्मन की आवाज़ “…

°°° अपनी अंतर्मन से आवाज़ क्यों निकलते नहीं… पता नहीं आँखों में हसीं ख़्वाब क्यों पलते नहीं…? देखा जहां में सपनों के घरौंदे को टूटते … शायद यही वजह है कि सपने अब मचलते नहीं…?? •• तलाशने पर सच्चे एहसास अब मिलते नहीं… नई ख़्वाहिश की एक भी कोंपल अब खिलते नहीं…? कहो ! कौन […]

दर्द सहज

पंक्तिया थोड़ी कठिन हैं ,पर हैं मेरे अल्फ़ाज़ सहज मेरे दिल के कागज़ पर, दर्द के बिखरे अहसास सहज इतनी तड़पी है रूह मेरी की ,विरह के अहसास सहज इस विक्षिप्त टूटे दिल को, अब सारे झूठे अनुराग सहज

पल में ख़ुशी को मातम बनाती है ज़िन्दगी

पल में ख़ुशी को मातम बनाती है ज़िन्दगी। साहिल पे ला के कश्ती डुबाती है जिंदगी।। जीना भी ज़िन्दगी को हमें सीखना पड़ा, जीने लगे को मर के दिखाती है ज़िन्दगी।। ©अंशु कुमारी