Category Archives: मेरा लेख (सम सामयिक घटना)

स्त्रीत्व की राजनीति

स्त्रीत्व की राजनीति आरोपों और प्रत्यारोपों की बारिश में हमेशा नारियों को ही भींगना होता है ।हर बार स्त्रियों के शील-शैय्या पर विषधर छोड़ दिये जाते हैं,जो स्त्रीत्व को अपने विषैले फन से बुरी तरह से नोच डालते हैं । आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस हद को पार कर गयी है,कि वे स्त्रियों के अंतःवस्त्रों […]

शिक्षित व् अशिक्षित : बेरोज़गारी।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने भी बार बार कहा है कि कहा कि देश में नौकरियों की भारी किल्लत है और सरकार इस पर सही से ध्यान नहीं दे रही है। रघुराम राजन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी और नोटबंदी से देश को नुकसान […]

हिंदी की करुण दशा

सच सोचनीय विषय है,जब हिंदुस्तान में हिंदी का सम्मान नही तो और कही कैसे होगा? सर्वप्रथम हम सब को अपनी मातृ भाषा से प्रेम करना होगा। हर कोई अंग्रेजी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है, जब शिक्षा ही योग्य नही मिलेंगी, तो संस्कार और हिंदी का प्रचार और प्रसार कैसे होगा? सरकार को […]

सोशल मीडिया और युवा साहित्य का लेखन

सोशल मीडिया और युवा साहित्य का लेखन आज का साहित्य और उसका चिंतन नई सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण पहले के साहित्य और उसके चिंतन से कई मायनों में बदल गया है। चिंतन की जगह सूचनाएं इनके औज़ार हैं। नई पीढ़ी बदले हुए सामाजिक समूहों को आधार बनाकर नया साहित्य रच रही है जो तकनीक के […]

सोशल मीडिया पर भ्रामक संमचार

*सोसल मीडिया पर बगैर ठोस सबूत के समाचार जारी करना– कितना उचित?* कल दिन भर एक दुखद समाचार ने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खी बटोरी थी । कई उस समाचार प्रदाता के समाचार पर विश्वास कर ? श्रद्धांजलि भी दे दिए। ऐसी घटना अभी कुछ दिन पूर्व एक मीडिया चैनल ने भी जारी कर दी […]

लेख – बलात्कारी की जात नहीं होती ।

बलात्कारी मतलब बलात्कारी फिर चाहे वो कोई भी जाति धर्म का क्यों ना हो । फांसी होनी ही चाहिए । तुम लोग सुधारना नहीं, बलात्कारियों । तुम्हारी माँ बहिन और बीवी को भी इसी हादसे का शिकार होना चाहिए तभी तुम्हारी आंखें खुलेंगी क्या ??? कठुआ, उन्नाव, सासाराम, सूरत, गाज़ीपुर और गाज़ियाबाद के बाद अब […]