Category Archives: मेरा लेख (सामाजिक)

गुरु वंदना

3 महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को लगभग 3000 ईसा पूर्व में हुआ था। उनके सम्मान में ही हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। वेद, उपनिषद और पुराणों का प्रणयन करने वाले वेद व्यास जी को समस्त मानव जाति का गुरु माना जाता है। बहुत से लोग इस दिन […]

एक चेहरा

एक चेहरा! प्रकृति वसुधा परिवेश पर्यावरण पीड़ा में रहें हैं कबसे पुकार। अब तो अति हो गई मानव, अपना व्यवहार सुधार। रात को पर्यावरण पर कुछ लिखते लिखते सो गई और सपनों ने अपने आँचल में मुझे ले लिया।हरा भरा उपवन, लहलहाते वृक्ष, कलरव करते पक्षी और पास ही स्वच्छ निर्मल अविरल बहती नदी,मैं नदी […]

खाली दिमाग़ या शैतान का घर!!!

Idle mind devil’s workshop. जी हाँ,खाली दिमाग अर्थात 👹👿☠💀शैतान का घर और जिस हिसाब से हर जगह कंस्ट्रक्शन चल रही तो अपार्टमेंट,बिल्डिंग, पेंटहाउस,बंग्लो कुछ भी कह लो, रहता उसमें शैतान ही है।15 दिन बीत गए हैं छुट्टियों के हम तो कहीं गए नहीं पर श्री श्री श्री 108 वें अखंड महाआलस्य महाराज बोरी बिस्तर बाँध […]

कर्तव्य

कर्तव्य “कर्तव्य” शब्द का अभिप्राय उन कार्यों से होता है, जिन्हें करने के लिए हम नैतिक रूप से प्रतिबद्ध होते हैं। इस शब्द से यह बोध होता है कि हम किसी कार्य को अपनी इच्छा, अनिच्छा या केवल बाह्य दबाव के कारण नहीं करते अपितु आंतरिक नैतिक प्ररेणा के कारण करते हैं। विषम परिस्थितयों में भी गंतव्य […]

क्रोध बनाम ब्लड प्रेशर…..

क्रोध बनाम ब्लड प्रेशर….. क्रोध इंसानी फितरत है। ये सबके स्वभाव में होता है। क्रोध एक नेचुरल इमोशन है और आना भी स्वभाविक है, मगर हद से ज्यादा सेहत के लिये घातक भी होता है।क्योंकि जब यह नियंत्रण से बाहर होता है तो यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आपके अपनों के साथ […]

जीवन का उद्देश्य

ऑफिस से थकिहारी निर्मला जैसे ही घर में घुसी तो देखा उसका बेटा साहिल मोबाईल से चिपका हुआ है । सारा घर अस्त व्यस्त …..कही कपड़े बिखरे पड़े है तो कहीं जूते चप्पल फैले पड़े है । मेज पर चाय के जूठे कप ओर नाश्ते की प्लेट पड़ी है । साहिल ने उचटती सी नजर […]

सेल्फ से दूर करती –‘ सेल्फी ‘

सेल्फ से दूर करती–‘सेल्फी’ पेट की भूख हो या शोहरत की, अति हर हाल में नकारात्मकता को जन्म देती है। आजकल सोशल-मीड़िया पर बच्चे, जवान व बूढ़े हर कोई सक्रिय दिखाई देता है। अपने करीबी रिश्ते-नातों के लिये वक्त नहीं है, किन्तु सैल्फी लेने व सोशल मीड़िया पर पोस्ट करने का समय है। इंसान आत्म-केंद्रित […]

दर्द

आज सुबह से ही मन कुछ खराब सा हो रहा था,कुछ अच्छा नही लग रहा था।बार बार कल वाली बात न चाहते हुए भी याद आ रही थी ।मेरी तबियत खराब हो रह थी डॉक्टर ने कुछ इंजेक्शन ओर ड्रिप चढ़ाने के लिये कहा पास में ही एक नर्स थी उसे घर पर बुलाया ।वो […]

स्वच्छता मिशन और,,

स्वच्छता मिशन और? अरे आज सारा कचरा कहाँ गया, सोचते,विचरते रमौतीन सुने सड़क पर चली जा रही । रोज कचरे से पटा सड़क आज चकाचक ? अचानक लावूड स्पीकर पर तेज आवाज में देशभक्ति फ़िल्मी गीत ने विचरमग्नता को नया रूप प्रदान किया । आवाज गांधी पुतले के पास चूना से घेर कर कचरे रखे […]

हमारी संस्कृति

*हमारी संस्कृति* हमारी संस्कृति जल की तरह निश्चल है । जो जल की प्रवृत्ति है विलेयता, घुलनशीलता की वही हमारी संस्कृति है , *सबको अपने में समाहित कर लेना । विशाल हृदय का परिचायक बन जाता है* । जल एक गंध हीन, रंग हीन तरल पदार्थ के रूप में प्रायः पाया जाता है । पर […]

दहेज़ प्रथा परिणाम और निदान

दहेज़ प्रथा एक विकराल समस्या के रूप में कुरूपता से सारे संसार में व्याप्त है । *मैं अमीर व गरीब पर चर्चा न कर एक सामान्य,मध्यम परिवार पर ही ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा* ,। दहेज़ लेना और देना पर हमेशा विरोधाभासी सोच लोगो, जन मानस में रहता है । जब दहेज़ लेने की बारी आये […]