Category Archives: मेरा लेख (साहित्य, रचनाकार, पाठक)

प्रेम

✍️……..#प्रेम….👌👌 अपने आप में पूर्ण होती परिभाषा ईश्वरीय परम पुंज कह लो या इंसानी अहसास समझो प्रेम एक प्राकृत भावना है किसी की देय नहीं कहते हैं न “प्यार हो जाता है….”👌👌 ठीक वैसे ही जैसे बरसात की बूंदों को ओस में तब्दील होने की किसी से इजाज़त नहीं लेनी होती बस यूँ कि फूलों […]

कल्पना बनाम नवसृजन….✍️

कल्पना बनाम नवसृजन………✍ कल्पना निरभ्र गगन में उन्मुक्त पंछी कल्पना रोचक रोमांचक स्वछंद उड़ान। कल्पना सप्तरंगी सपनों का मधु प्रारब्ध, मन देह की सीमाओं में जो नहीं होती आबद्ध। कोई व्यक्ति जो कुछ भी हासिल करता है, वह सर्व प्रथम उसकी कल्पना में प्रकट होता है। अतः कल्पना मानव जीवन और समस्त संसार की प्रत्येक […]