Category Archives: काग़ज़ दिल रचना

कागज़ दिल पर कर रही, नीलम सृजन श्रृंगार

श्रृंगार कागज़ दिल पर कर रही,नित नीलम काव्य सृजन श्रृंगार। हुलस रही हृदय हर्ष भर हरीतिमा,कर वसुंधरा श्रृंगार। देखो स्वर्णिम ऊषा रानी, वसुधा मुख नूर खिलाती बासंती चुनरिया उढ़ा,झर रही बसंत बयार। परिवेश सौंदर्य बढ़ा रहे,तरु वल्लरी हार श्रृंगार। कलरव खग सुंदर कर रहे,सुन प्रेमगीत छाया खुमार। घटाएं काली जुल्फ सजाती,सिरताज बनें गिरीराज। कंगना बन […]

मोहब्बत काग़ज़ दिल से

लड़े जा रहे हैं सभी ज़िंदगी से खुशी से मरे ,कुछ मरे खुदकुशी से गिरी वक्त की गाज हम पे कुछ ऐसे रहे दूर हम प्यार की रोशनी से हुए पल में तोला हुए पल में माशा वो रंगत बदलने लगे हैं अभी से निकलते ही मतलब बदलते हैं तेवर जो थे अपने कल तक […]

काग़ज़ दिल एक नया आसमान

ढूंढा काग़ज़ दिल मैंने एक नया आसमान जिसके तारे करते हैं पूरा हर अरमान नहीँ टूटते, बस चमका करते हैं वो जो बुझते से माँगों, कैसे करे रोशनी दान यहाँ तो बादल ही कागज़ बन उमड़ते हैं बरस जाते दिल पर, सुन जरा करुणा गान समझो यहाँ सचमुच में इंसान बसते हैं किसी का दिल […]

कागज़ दिल से तस्वीर मिटाना मुश्किल है

धड़कन ही थम जाए तो ज़िंदा रह पाना मुश्किल है । अब कागज़ दिल से तेरी तस्वीर मिटाना मुश्किल है । वो जो नशीली आँखों के पीछे लग के घर छोड़ गया , उस दिल का सीने में वापिस लौट के आना मुश्किल है । जिन आँखों में घंटों अपना चहरा देखा करते थे , […]

आवाज-ए-काग़ज़ दिल

कागज़ दिल पर इस दिल की दरकार लिखेंगे। नाम लखेंगे अपना तुमको प्यार लिखेंगे। तुमको पा कर दुनिया पा ली है मैंने। तुमको अपने जीवन में उपहार लिखेंगे। रोज़ नए लगते हो रोज़ जुदा सबसे। नई अदा में हम तुमको अखबार लिखेंगे। आफताब तुम रातों के शहजादे हो। तुमको नीले अम्बर का सरकार लिखेंगे। तुमसे […]

कागज दिल की बात

*कागज दिल की बात* हो जाइये कागज दिल , करते कितने आस । उड़ चलिये सुदूर गगन,लगते कितने पास ।। लगते कितने पास ,पतंग बन झूम रहिये । मीत मिलते सुवास , सुर सजा झूम गाइये ।। कागज दिल पर काज,करते अब न शर्मायिये ।। लिखते मन के राज , सुना कहानी मोहिये ।। नवीन […]

कागज़ दिल मुस्कुराये किस तरह

राह चलते गैर को अपना बनाये किस तरह, हाथ उनसे दोस्ती का हम मिलाए किस तरह। जिंदगी ने हर कदम पर ठोकरे दी दोस्तों, ऐसे में कागज़ दिल मुस्कुराये किस तरह।। साथ दो कदम कोई चलता नहीं ज़माने में, हमकदम फ़िर उम्र भर का हम बनाये किस तरह। क्या पता किस मोड़ पर हो जाये […]

कागज दिल है कर डाला – छाला

चाहत करके दिलवाले ने कागज दिल है कर डाला उसी ह्रदय से गीत गजल लिख गीता को भी पढ़ डाला लिखी किसी ने मधुशाला तो कागज दिल कुछ बोल उठे मगर नयन से नीर झलक कर वो कहने लगा उर का छाला गली गली में घूम रहे, लाज शरम पर दे ताला उन लोगों ने […]

कागज़ दिल है तेरे नाम

लिख दो कागज़ दिल पर मेरे आके साजन अपना नाम दिल की ये धड़कन है तुम्हारी सांस भी तेरे नाम हमारी काजल बिंदिया चूड़ी कंगन आंखे मेरी तेरा दर्पण अपने दिल की कलम उठा कर लिख दो कागज़ दिल पर मेरे आके साजन अपना नाम कागज़ दिल है कोरा कोरा जैसे कोई चाँद चकोरा ज़ुल्फों […]

कागज़ दिल पर तुम जानां

नाम तुम्हारा आकर लिख दो क़ाग़ज़ दिल पर तुम जानां गीत नया इक गाकर लिख दो क़ाग़ज़ दिल पर तुम जानां ** दर्द-ए-दिल जब सह न सको तो याद रहे खूं-ए-दिल में अपना क़लम डुबाकर लिख दो क़ाग़ज़ दिल पर तुम जानां *** सपनों की परवाज़ करो गर जख्म परों में हो जाये सपने नए […]

कागज दिल पे लिखी दास्तां

एक राह चलती हुई इक कसक ,हमकदम सी मंज़िल ए तलब की ज़ानिब सुकूं अभी सफ़र में है बस इतनी ही है ‘कागज़ दिल’ पे लिखी दास्तां ए इश्क़ अपनी।

दर्द पुराना काग़ज़ दिल पे

कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है मेरे कागज दिल पे| लिखकरके इक नाम मिटा है मेरे कागज दिल पे| कैसे कह दूँ कुछ न लिखा है —— ++ ख्वाब नुकीला कभी सजा है मेरे कागज दिल पे| यूँ ही ना येे   जख्म  हुआ है मेरे  कागज दिल पे| कैसे कह दूँ कुछ न लिखा […]

काग़ज़ दिल सुरीला साज

ग़ज़ल कागज़दिल से राज़ मिला । लिखने का अंदाज़ मिला ।। इतने दिन के बाद मुझे । एक सुरीला साज़ मिला ।। आज थमा तूफ़ान शुकर । मिट्टी में परवाज़ मिला ।। कभी सुना है क्या जीजा। साली से नाराज़ मिला ।। चिड़ियाँ आज कहाँ जाएँ। हर डाली पर बाज़ मिला ।। सूर्य पुत्र ‘सुर’ […]

क़ाग़ज दिल – जीवन है

ज़र्रे -ज़र्रे में जीवन है बोलो किसमें जान नहीं। क्यों कहते हो इस दुनिया का कोई भी भगवान नहीं। दिल,दिल है या काग़ज़ दिल जो हर्फे – उल्फ़त मिटा रहे। रूहानी स्याही का मिटना इतना भी आसान नहीं।। शुभा शुक्ला मिश्रा ‘अधर’

कागज़ दिल पर लिखती हूँ हर बात

अपने दिल की बात मैं किस से कहूं। अब तुम भी तो मेरे पास नहीं हो, मुझे तन्हा छोड़ कर चले गये। आज मैं  कागज़ दिल पर लिखती हूं हर  बात  कागज़ दिल पर लिख कर मन हल्का हो जाता है, लगता है जैसे मैं तुम्हें ही सब लिख रही हूं, तुम कभी तो आओ […]

ये काग़ज़ दिल

बहुत नाजुक बहुत भोला था प्यारा सा ये काग़ज़ दिल, किसी की आंख का रहता था तारा सा ये कागज़ दिल। ज़माने की हवाओं ने थपेड़े इस क़दर मारे, हुआ खारा समंदर सा किनारा सा ये काग़ज़ दिल। —–मिलन साहिब।

कागज़ दिल जल भी गया तो क्या

नफरत का सिक्का चल भी गया तो क्या …. इस से तू ज़रा सा बदल भी गया तो क्या …. तुम इज़हारे उल्फ़त कर दो खुलकर दिल तो बच्चा है मचल भी गया तो क्या .. हाँ वो आकाश नहीं छू पायेगा जोश में दो फीट उछल भी गया तो क्या …. प्यार धुआँ बनकर […]

खुशियाँ लाए काग़ज़ दिल

ग़ज़ल साथ हमारी खुशियाँ लाए काग़ज़दिल। आप बड़ी ही देर से आए काग़ज़दिल।। नकलें करते लोग कहानी नग़मों की। किसकी गज़लें, कौन सुनाए, काग़ज़दिल।। पानी को जो रोज़ तरसती थी पल पल। चिड़िया प्यासी आज नहाए काग़ज़दिल।। सबने लूटी ख़ूब मलाई लेखक की। भूखे रहकर कष्ट उठाए काग़ज़दिल।। राहों से अंजान भटकती नदियों को। सागर […]

काग़ज़ दिल ज़रा लिखना हुआ

°°° कागज़-दिल पे अनायास ज़रा लिखना हुआ । हकीकत है आजकल जो कभी सपना हुआ । •• मैं तुझे भूल जाऊँ , कभी सोचना भी मत , यादों का सरे-आम हर पल लिपटना हुआ । •• ऐतबार होगा दिल की बात सुनो तो सही , क्या ख़ूब लफ़्ज़ों का धीरे से कहना हुआ । •• […]

कागज दिल लिख डाला है

कागज दिल पै,उतारी है मैने अपने दिल की बातें कागज भी है थका ..थका सा, जैसे मेरी ये सांसे नाम तेरे बिन कोई भी कागज, अमर कैसे हो पायेगा जब तक ना तस्वीर बनें , ना लिखूं कोई तेरी बातें मैने दिल को इस कागज पै , “कागज दिल” लिख डाला है एक निमंत्रण तुम्हें […]