Category Archives: क़ता (अन्य)

असबाब

मुख़्तसर से असबाब ए हयात लिए घूमता हूँ मैं लबों पर रोज़ हज़ारों सवाल लिए घूमता हूँ न जाने कब बख़्श दे वो परवर दिगार मुझको मैं सदा साथ रहम की फरियाद लिए घूमता हूँ

मजलिस

नाबीना होने का नाटक करते हैं सहते हैं सौ ज़ुल्म मगर चुप रहते है दुनिया ऐसे ही लोगों की मजलिस है हम जैसे कुछ लोग ख़सारा सहते हैं भरत दीप नाबीना=दृष्टि हीन मजलिस =सभा ख़सारा= नुकसान

बना रहता

तजुर्बे जोड़ न पाया कभी भी अपने जीवन में अपने बडो का लिये साथ कव कोरा बना रहता. बहुतो शेरों से भरे कागज भी सभाले थे हमने खफा इस बात पे हूँ रेखा ज़ाना रुतबा बना रहता. रेखा मोहन ४ /६ /२०१८

आदमी वो ख़ास था

धूल थी चेहरे पे उसके दिल मगर शफ्फाक़ था हमने पहचाना नहीं पर आदमी वो ख़ास था मलगुजा सा पैराहन था सलवटें थीं हर तरफ खेत से लौटा था शायद पुरसुकून अंदाज़ था भरत दीप

निगाहें

निगाहें अक्सर मचल जाती है, जब तेरी नजरों से मिल जाती हैं। निगाहें बेसब्र हो जाती हैं, जब वो जुल्फें चेहरे से हटाती हैं। निगाहें गैर हो जाती हैं, जब उनकी आंखों से टकराती हैं। निगाहें कातिल बन जाती हैं, जब वो दिल में उतर जाती हैं।।

पृथ्वी संरक्षण

माँ से करने लगे क्यूँ आतताई दोस्तों हरियाली दुष्शासनों से खिंचवाई दोस्तों अस्तित्व खुद ही का खतरे में जब अभी अस्मत माँ की बचानी याद आई दोस्तों।। शुचि(भवि)

प्रेम और हौसले

डूब गए खुशी से तो किनारे की तलाश किया नहीं करते इश्क़ में रज़ा हमारी थी ग़म औ खुशी का गिला नहीं करते तड़पेंगे एक दिन सितमगर देखकर हौसला बुलंद मेरा मक़सद बदलते रहते हैं मगर एहसास कभी मिटा नहीं करते शिवानी ,जयपुर

हम प्याले, वो एक जाम हो गये ..

ज़िंदा रहा तो देखा नहीं , मुड़कर कभी मुझे । आज मर गया तो चर्चे , अब सरेआम हो गये ॥ जो कहते थे कभी हराम है, मैं पीता मिलूं अगर । मौकापरस्त हम प्याले, वो एक जाम हो गये ॥ – कवि योगेंद्र तिवारी

मंज़र

  अपने अन्दर हैं समेटे जो तबाही मन्जर हम को हैं आज वही देते दिखाई मन्जर हर तरफ खून से मासूम के लिपटी लाशें देख कर दिल बहुत देता है दुहाई मन्जर अरशद साद रूदौलवी

छोटा बड़ा गिलास

शुक्रे-ख़ुदा अदा किया मैंने बुझा के प्यास कुछ लोग देखते रहे छोटा-बड़ा गिलास पानी की गर हो बात तो ज़मज़म को छोड़कर पाकीज़गी में कौन है गंगा के आसपास शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

वो

कैसे भला कह दूँ हसरत दबाता नहीं है वो जो जजबात हैं दिल मे ,,बताता नहीं है वो क़यामत है ,जानलेवा हर अंदाज है उसका चाहत है बहोत गहरी ,पर जताता नहीं है वो #Anil