Category Archives: नज़्म (अन्य)

आजकल

मिसरा-आप की नजदिकियां क्यूँ दुश्मनों से आजकल। आफताबी जलती नज़र,करे रोज़ ही ख़ाक़ मुझे, आप की नजदिकियां क्यूँ हैं,दुश्मनों से आजकल। धोखा देने की सुनो, फितरत तो न थी आपकी, कौन है जिसकी हिदायत,पल रही है आजकल। पास आने से तेरे,ले महकने लगा फिर बागबान बातें तेरी मिश्री बनकर,घुल रही हैं आजकल। लब से निकलकर […]

मोहरा

ए जिंदगी क्या कहूँ तुझे, महज़ बिसात-ए-शतरंज है तू। बिछा देता बिसात पर ख़ुदा, बनाकर शतरंज का हमें मोहरा। कोई हाथी -घोड़ा, कोई चला बन ऊँट टेढ़ा। निज की लगा रहे हैं हम बाज़ी चले जा रहे हैं नित नयी चालें, ताकि अपने अहम रूपी बादशाह को बचालें। मोहरे अक्सर चलते हैं कूटनीति की चाल, […]

मेरा ख़ुदा

मेरा ख़ुदा यहां हमेशा पासबान है कैसे कहूँ कि मुश्किल ये इम्तिहान है।। हम ज़िन्दगी में मंदिर-मस्जिद ढूँढ रहे वो पूजता मठो में देता अब अजान है।। थोड़ा हवाओ रुख़ इधर तुम तेज़ करो इल्ज़ाम मुझपे न लगाओ मेरी भी जान है।। उड़ जाती हो ऐसे तुम बनके तितली कहाँ ख़्वाबो में आओ मेरे तुम्हे […]

मैं भी न सोया,वो भी तमाम रात जागते रहे

मैं भी न सोया,वो भी तमाम रात जागते रहे कभी खुद,कभी चाँद बनके मेरी छत पे ताकते रहे आँखों से एक झलक भी न ओझल हो जाए मेरी दहलीज को सितारों से टाँकते रहे कोई आहट होती है कि साँसें दौड़ पड़ती हैं फिर इक छुअन को रात भर काँपते रहे आवारा हवा की तरह […]

तुम्हारी महफ़िल में और भी इंतज़ाम है

तुम्हारी महफ़िल में और भी इंतज़ाम है या फिर वही शाकी,वही मैकदा,वही जाम है शायर बिकने लगे हैं अपने ही नज़्मों की तरफ पुराने शेरों को जामा पहना कर कहते नया कलाम हैं आप शरीफ न बन के रहें इन महफिलों में वरना शराफत बेचने का धंधा सरे-आम है रूमानियत,शाइस्तगी,मशरूफियात बेमाने हो गए जाइए बाज़ार […]

क्यूं नहीं होता

वो लड़ता झगड़ता है दिन रात मुझसे फिर बिना उस,गुज़ारा क्यूं नहीं होता। सुन माँ बाप ने ‌जिसको पाला जतन से फिर बता वो बेटा सहारा क्यूँ नहीं होता। ऐसी क्या खलिस बढ़ गई संगदिली की फिर ज़ख्म-ए-दिल पुराना क्यूँ नहीं होता। सितारा -ए-किस्मत डूबाया क्यूँ खुदाया फिर आफताब-ए-उजियारा क्यूँ नहीं होता। था जी जान […]

ले गया

कुछ ऐसी कशिश थी उस अंजान में वो नीलम जिगर से सद़ा ले गया। सुन,गया तो गया पर न दिल से मेरे वो क़ातिल होकर भी दुआ ले गया। वो देकर पहचानी सी ख़ामोशयाँ सुन, यादें मेरी ख़ुश-नुमा ले गया। वफ़ाई के बदले में वो देकर द़गा वो हसीं बाद-ए-सबा(सवेरे की हवा) ले गया। चुराकर […]

क्या करना

तुमको अधिकार दे,किया खुद को बंधक हमने दम घुटता है मेरा पर तुमको भला क्या करना। तेरी फितरत ही सनम बार-बार द़गा देना है नहीं सुधरोगे, तुम्हें देकर सज़ा क्या करना। इश्क की टूटी हुई कश्ती में खुद ही बैठे हम पक्का डूबेगी,अब इसकी सदा(पुकार)क्या करना। यही चाह है,मरकर ही सही, तुमको पा लूँ नीलम […]

जाता कहां है

दिल ले के मुफ़्त कहते हैं कुछ काम का नहीं जफादारों का जनाजा-ए-वफा, जाता कहां है। तेरा गुरूर समाया है इस क़दर दिल में मौला सूरूर चढ़कर तेरा सवाली पर, जाता कहां है। हर घड़ी जुस्तजू और पाने की चाहत तेरी दिल पर छाया जो तेरा असर, जाता कहां है। ये जो हसरत है तेरी […]

इन निगाहों से है रास्ता कोई

तेरे ख़्वाबों से है वास्ता कोई इन निगाहों से है रास्ता कोई उसे देखके मैं खिल उठता हूँ बच्चे में बसा है फरिश्ता कोई हमें तो हर धर्म की तहज़ीब है मेरा वतन ही है गुलिस्तां कोई चाँद जो यौवन के उरूज पे है मेरे महबूब सा है शाइस्ता* कोई मैं वक़्त को हराके अभी […]

फूल खिलते हैं तो आलम भी महक उठता है

  फूल खिलते हैं तो आलम भी महक उठता है तेरे आने से सनम गम -ए -दिल भी चहक उठता है हम अगर चाहें भी तो नहीं रुकता दिल ये मरजाना, डूब कर आँखों के तेरे मयखाने में ,बेजबां दिल ये सनम बहक उठता है करदे नजरअंदाज मेरे दिल की तू ये गुस्ताखी तेरी चाहत […]

नज़्म

मैं नज़्म लिखूं या कि फिर कोई ग़ज़ल ज़ख्म बन यादें तेरी,क्यूं खींची आतीं हैं। फासले यूं ही नहीं आए दरमियां हरपल, तेरे लफ़्ज़ों की चुभन,तीर से चुभाती है। है हर हर्फ मेरे दिल का फ़साना निश्छल, आंखें मूंदूं तो तेरी छुअन सहलाती है। कर सब्र माना नीलम ह़क में नहीं ये पल मत भूल […]

इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए

इस रस्म की शुरुआत बस मेरे बाद कीजिए जिनसे रौशन है हुश्न, उन्हीं को बर्बाद कीजिए गर पूरी होती हो यूँ ही आपके ख़्वाबों की ताबीरें तो खुद को बुलबुल और मुझे सैय्याद कीजिए ये कि क्या हुज़्ज़त है आपके नूर-ए-नज़र होने की दिल की बस्तियाँ लुट जाएँ,और फिर हमें याद कीजिए जो थे सितमगर,सबको […]

वो शज़र भी यों बे’असर रहा

वो शज़र भी यों बे’असर रहा।। जिसमे परिंदों की क़दर नही।। साख से ही टूट गई वो पत्तियां जिनमें शज़र की क़दर नही।। रोज़ खिलती है कलियां उनमें सूरज भी उनसे बेअदब नही।। मौसम आँखों में पालना डाले नैनन को भी यहाँ ख़बर नही।। चाँद  जंगले  से यों झांक रहा चाँदनी को भी तो ख़बर […]

तुम्हारे हुश्न की मनमानी देख लिया

दरिया भी देखा,समन्दर भी देखा और तेरे आँखों का पानी देख लिया दहकता हुश्न,लज़ीज नज़ाकत और तेरी बेपरवाह जवानी देख लिया कचहरी,मुकदमा,मुद्दई और गवाह सब हार जाएँगे तेरे हुश्न की जिरह में ये दुनियावालों की बेशक्ल बातें देखी और तेरे रुखसार की कहानी देख लिया किताबें सब फीकी पड़ गयी तेरी तारीफ के सिलसिले हुए […]

चुल्लू भर की बात

नज़्म ताउम्र कोशिशों को मेरी नाकाम कहता हूँ! मैं खुद को शायर, मौजी, बदनाम कहता हूँ! बस खता करता हूँ असलियत बताने की, उसी खता में शामिल ये पैगाम कहता हूँ! यहां मयखानें में छलकते ग्लास टूटे हैं, मैं साकी के नशे को ही जाम कहता हूँ! क्या फायदा किसी कुचखाने में आकर गिरे, ऐसे […]

चुप रहना

दास्तान-ए-ग़म सुना कर चुप रहा अशक आँखों में छिपा कर चुप रहा रोक लेती है मुझे ख़ुददारियां मैं गिला होंटों पे ला कर चुप रहा ज़िंदगी तो चाहती थी रो पड़ूँ पर ग़मों में मुस्कुरा कर चुप रहा ज़ब्त मेरा ज़िंदगी तू देख ले क़ुफ़्ल होंटों पर लगा कर चुप रहा ज़िंदगी करती रही मुझसे […]

रात जागती रहती है

रात दबे पाँव न जाने कहाँ भागती रहती है किसी से कुछ कहती नहीं,जागती रहती है किसी मोड़ पे किसी परछाई की तलाश में आँखें मींच के हर शख्स को ताकती रहती है उजाले की बिल्कुल भी कोई ख्वाहिश नहीं बस हर घड़ी पूनम का चाँद माँगती रहती है नींद की गलियों में क्यों कर […]

बच्चों सा ही मुझे चाहा कर

मेरे दिल में नहीं तो ना सही मेरी निगाहों में तो रहा कर अगर मुस्कान की सूरत नहीं तो आँसू ही बनके बहा कर जरूरी नहीं हर राज़ कहना कभी कुछ यूँ भी कहा कर दवा नहीं मर्ज हर ज़ख़्म की कुछ देर तो दर्द भी सहा कर गर चाहता है मैं भी तुझे चाहूँ […]

उठाओ जो लफ्ज़ तो एहतियात से उठाना

उठाओ जो लफ्ज़ तो एहतियात से उठाना बिगड़ के बनने में फिर ज़माना लगता है किताबें कल कह रही थी मुझसे बारहां तू मुझे अब भी चाहता है,दीवाना लगता है वो हर्फ़ की खुशबू,वो अहसासों की रानाई अपनी धुन में चले तो कोई तराना लगता है बंद कमरे की मद्धम रोशनी में छिपाकर मुझमें खत […]