Category Archives: नज़्म (दर्द )

ज़िन्दगी में कोई आइना नहीं है

सुकूँ का  कुछ  पता नहीं है तुमसे कुछ भी छुपा नहीं है सारी यादो को दफना दिया है अब याद  करना ख़ता नहीं है कोई चुभन चुभती नही दिल में उनसे हमारा कोई राब्ता नहीं है तन्हा थे अब यूँ तन्हा ही रहे ज़िन्दगी में कोई आइना नहीं है दिल से अश्को का बंटवारा यूँ […]

वो लौट कर आया नहीं

नज़्म किया था जो वादा,उसने निभाया नहीं। जिसे दिल ने कभी समझा, पराया नहीं। भूल कर भी न आ जाए आँसू उनके, इस तरह का कभी कदम मैंने,उठाया नहीं। लाखों हँसी चेहरे हम पर फिदा हुए, हमने किसी और को दिल में,बसाया नहीं। दर्द ए गम अक्सर हम छुपाते रहे यारो, क्या गुजरी होगी दिल […]

गोपाल दास नीरज की याद में दिल से निकली पंक्तिया

वो चले गए उनसे मैं मिल पाया नहीं वो फिर कब आएंगे ये भी उन्होंने बताया नहीं कहा था उन्होंने कभी ढूंढ लेना जरूर मुझे तुम कविताएं कहती हैं कभी तुमने इतना रुलाया नहीं मेरी कलम भी लिखते में अटक सी जाती है उनका गीत मेरे खामोश लबों ने आज गाया नहीं चार कदम दूर बस वो रहते […]

अपनी ही माटी का दर्द कोई सुनता नहीं

बच्चे जबसे बड़े हुए, सब परदेस चले गए सूने से घर में माँ के सिवा कोई रहता नहीं गाँव की पगडंडियाँ हैं सारी वीरान पड़ी बूढ़े बरगद पे अब वो भूत भी बैठता नहीं कुएँ के चबूतरे विधवाओं सा विलाप करें पानी अब भी मीठा है, कोई कहता नहीं बच्चों की छपछप,ललनाओं की क्रीड़ाएँ सूखे […]

दवा, ज़ख्म के पनाह में थी

वो इंसान की शक्ल में वहशत थी ज़ुबान पे बेटी,छाती निगाह में थी उसके मंसूबों तक में दहशत थी हरकतें शामिल हर गुनाह में थी दर्द में लिपटी ये कैसी राहत थी कि दवा, ज़ख्म के पनाह में थी बेटी हुई विदा तो सबने कहा कि ख़ुशी अब पति के निबाह में थी जब टटोला […]

तेरी यादों को कहाँ संजोया नहीं

क्या था कि उसने खोया नहीं ज़ख्म था गहरा पर रोया नहीं बेटी हुई जबसे विदा डोली में बाप एक घड़ी को सोया नहीं नन्हें उँगलियों के निशानों को माँ ने चेहरे से कभी धोया नहीं मिटटी की जात पता नहीं थी वर्ना किसान ने क्या बोया नहीं दिल रो सकता तो दिखता कि तेरी […]

लहलहाता था हर रिश्ता खेत सा

ज़ख़्म है दिल में इक ज़माने से क़ुर्बत से अब ये दुखने लगा है ज़िन्दगी भर ऊँचा रहा जो सर डर-ए-हुकूमत से झुकने लगा है जो लड़कर तूफानों में जलता रहा वो हवा के जद से बुझने लगा है मंज़िल पहुँचे के ही दम लेते थे वो क़दम हर मोड़ पे रुकने लगा है लहलहाता […]

बच्चियाँ आदि हैं कैद की

वहाँ बस कहने की रस्म है सुनने की नहीं जहाँ बेटे की चाह है बेटी होने की नहीं ये अजीब ही कहानी है औरत बने रहने की जहाँ भूख है खेलने की, वहाँ रहने की नहीं आदत है फ़िज़ाओं को भी कैद करने की जिन्हें छूट है बस तड़पने की,बहने की नहीं बारहाँ दौर चल […]

जिन हसीं पलों को समेटा था कल जीने को

कल खुद को देखा आईने में और मैं डर गया किसी का कद मेरे रिश्तों पे यूँ भारी पड़ गया जिस शाख में सिमट कर ज़िंदगी गुज़ारी थी आज वो जड़ समेत ही मिटटी से उखड गया जिन हसीं पलों को समेटा था कल जीने को वक़्त के तूफ़ान में ना जाने कब गुज़र गया […]

टूटती आस

दिल से मेरे प्यार का, मिट गया नामोनिशान। हे खुदा कैसा दिया ,मोहब्बत का अंजाम । चलते-फिरते यार हम, दिल में रहे दिनरात। फिर भी न तुम समझ सके,रूमानी जज़्बात। ये तो बता मेरे खुदा, क्या है मेरी औकात। क्यों जिसको भी चाहूँ मैं, छलता है दिनरात। कभी-कभी ये सोचती, बिगड़ी है तकदीर। कभी साफ […]

जाने क्यूँ

जाने क्यूुँ आज कुछ भी अच्छा नही लग रहा है ये चाँद भी साथ मेरे नहीं जग रहा है दिल बेचैन है मन परेशान है जाने किधर तारों का भी आज ध्यान है बस तूझसे लिपटकर रोने को कर रहा दिल है मैँ अकेली हर तरफ तो मुश्किल है रूत हसीन है मौसम बेईमान है […]

-झूठ कहते हो-

झूठ कहते हो कि मेरे साथ ही रहते हो मुझसे बेहद मोहब्बत बताते हो है तो क्यों नहीं निभाते हो मेरे दर्द का तुम्हे एहसास होता तुम्हारी आँख का कोई आंसू तो रोता मुझे तन्हा छोड़कर न जाते तुम यादों से निकल गले भी लगाते तुम जिंदगी मे खुशियाँ मिलती या ग़म मिलता कभी तन्हाई […]

दास्ता

ना उदास होना तुम मेरे गुज़र जाने पर मै फिर लौट आऊगी तुम्हारे पास अपनी अधूरी दास्ता सुनाने‌ को जब तक पुरी न होगी मै चैन से कहां सो सकुगी तुम्हारी बांहों से बेहतर और कोई जगह कहां तलाश सकुगी नही नही देखना मैं लौट आऊंगी। फिर से सिर्फ तुम्हारे पास। अंशु

खुद को सामने देख मैँ भी हैरान था

इतने वक्त बाद ………… खुद को सामने देख मैँ भी हैरान था एक मुद्दत बाद अपने दिल से ……………………………. बाहर आया था मैं जिंदगी से लदी सांसे ….. आँसू भी पसीनों से तर-ब-तर ……..बदहवास डरे से एहसास ………सहमे दिल में छिपती …………….. कंपकंपाती धड़कन लिए ………. अमित तक को वहीं छोड़ आया था मैं मोहब्बत […]

सुनो वज़ह तुम , दर्द लिखने की

कोशिश करता हूँ मैं जिस दिन भी जिंदगी सीने की किसी ना किसी हिस्से में सांसों के ****************** एक जख्म की मौत #आ_जाती_है सोचता हूँ अब उसे याद नहीँ करूँगा जरा मैं कोई ना कोई याद उसकी , दिला के हँसीं , #रुला_जाती_है मैं भी चाहता हूँ हँसना ,जीना चाहता हूँ , निकल बेबसी से […]

पत्थर में बदल चुका है सदमों पर गिर जाने से

चुप चुप ये सिसक रहा है सपनों के भी बदल जाने से ……….. दिल फिर भी धड़क रहा है पत्थर में ये बदल चुका है सदमों पर गिर जाने से ……….. दिल फिर भी धड़क रहा है खून इससे टपक रहा है गमों को पीते जाने से ………… दिल फिर भी धड़क रहा है ज़ख्मों […]

सांस है चलती , उम्मीद है पलती

लिए फिरता है दर्द का दरिया मुझको जाने किस गम ए समुंदर की अभी तलाश है रूह तो है थमी वहीं दहलीज़ पर उसकी …….. ले जा रहा यह क्यों सिर्फ़ मेरी लाश है घुल रहा हूँ मैं भी अब अदम बहते बहते उठाये सबकी उम्मीदों की गठरी को खेल रहा हर कोई मुझसे ………………….. […]

मुझे बचा लो – बचा लो कोई

हर रोज़ है वो चिल्लाता ………………….डूब रहा हूँ मैं ………………………… मुझे बचा लो कोई किसी से बिछड़ा अरमान हुँ ………………………. मुझे जगा लो कोई किसी का निकला मतलब हुँ ………………. मुझे अपना लो कोई गम के समुद्र से लिख कर हर रोज़ ……….एक पुडिया वो फेंक जाता है ………पढ़ने वाला हर शख्स ……..इस अदा पर […]

अज़ीब से ख़वाब देखता हूँ मैं

अजीब से ख्वाब देखता हूँ मैं….!!! कितने नादान दिख रहे है अबतक, वफा के सूख चुके दरिये में, प्यार की मछलियों की चाहत में जाल एहसास का डाले बैठे, कितने तस्कीनजदा लगते हैं !! अजीब से ख्वाब देखता हूँ मै….!! समंदर दौड रहा नदी की तरफ , कैसा मंजर ,अजीब बात है न ! सूरज […]

तूं मेरी तरह दिल को रोजाना दुखाया कर

टूटे हुए ख्वाबों की तस्वीर बनाया कर तूं मेरी तरह दिल को रोजाना दुखाया कर बारिश का भरोसा क्या बरसे की नही बरसे आँखों से हमेशा तु अश्को को बहाया कर परछाइयों से अक्सर लगती है यहां ठोकर परछाइयों से इतना रिश्ता न बढ़ाया कर….. . मसरूफ क्यूं है इतना तूं दूसरों की खातिर कुछ […]