Category Archives: नज़्म (मोहब्बत)

अपने तबस्सुम में इक संसार लिए चलते

वो जो अपने होंठों पर अंगार लिए चलते हैं मचलते यौवन का चारमीनार लिए चलते हैं ज़ुल्फ़ में पंजाब,कमर में बिहार लिए चलते हैं हुश्न का सारा मीना-बाज़ार लिए चलते हैं जिस मोड़ पर ठहर जाएँ,जिस गली से गुज़र जाएँ अपने पीछे आशिकों की कतार लिए चलते हैं कोतवाली बन्द,अदालतों की दलीलें सब रद्द सारे […]

हया से

मिलाके नज़रें झुका ली उसने सिमट गई खुद में,वो हया से। मचल मचल, अरमान जागे, लगा रहे सब अलग कयासे। यही हैं अरमान दिल में जागे कि हो तू कायल मेरी वफ़ा से। सुन नींद लूटी और चैन छीना माशूक ने अपनी हर अदा से। आ मिलके नीलम महका करें हम, प्यार के जहां में,बाद-ए-सबा […]

क्या तुझे भी मुझ सा दीवाना याद आता है

कोई क़यामत न कोई करीना याद आता है जब दुपट्टे से तेरा मुँह छिपाना याद आता है एक लिहाफ में सिमटी न जाने कितनी रातें यक ब यक दिसम्बर का महीना याद आता है ज़ुल्फ़ की पेंचों में छिपा तेरा शफ्फाक चेहरा किसी भँवर में पेशतर सफीना याद आता है छाती,सीना,नाफ,कमर सब के सब लाजवाब […]

अपनी साँसों में जी ले मुझे

उसने लगाया जो गले मुझे हज़ार वसंत ज्यूं मिले मुझे होंठ,सीना,नाफ़ और कमर हुस्न के खूब सिलसिले मुझे जन्नत दिखा जो तुम दिखे नहीं और ही कोई गिले मुझे मैं उमड़ घुमर के तुझपे आऊँ तू बारिश सा बस पी ले मुझे बस इतनी अब ख्वाहिश है अपनी साँसों में जी ले मुझे सलिल सरोज

जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन का

जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन का मुझे वही झमझमाती बारिश कर दो तुमसे मिलते ही यक ब यक पूरी हो जाए मुझे वही मद भरी ख़्वाहिश कर दो जो रुकती न हो किसी भी फ़ाइल में मेरी उसी “साहेब” से गुजारिश कर दो गर लैला-मजनूँ ही मिशाल हैं अब भी फिर हमारे भी […]

कितना सच्चा है प्यार मेरा देखिए

मुझे संभालो कि मुझे गुमाँ हो गया मैं किसी चाँद का आसमाँ हो गया कितना सच्चा है प्यार मेरा देखिए मैं किसी बच्चे की ज़ुबान हो गया इश्क़ मेरा जज़बात से महरुम नहीं मैं किसी बेघर का मकान हो गया मेरे इश्क़ पे सियासत की छींटें नहीं मैं होली तो कभी रमज़ान हो गया मेरा […]

आँखों के दरीचे में काश्मीर दिखे हैं

इन लहजों ने कुछ तो छिपा रक्खा है कहीं आँधी कहीं तूफाँ उठा रक्खा है आँखों के दरीचे में काश्मीर दिखे हैं हर अँगड़ाई में बहार बिछा रक्खा है हुश्न का मजाल तो अब समझ में आया दिल्ली कभी पंजाब जगा रक्खा है तुम्हारे नाम की जिरह शुरू हुई जैसे ही दोनों सदनों ने हंगामा […]

माहताब

है महज़ इक ख़्वाब सा तू,महबूब माहताब मेरे तुझको देखा किया करूं,या कि फिर भूल जाऊं। दिल के कागज़ पे लिखे,सुर्ख लहू से मजबूं मेरे पाकर तुझको ही, जिगर का अब सुकून पाऊं। जाने क्यूं लगता है,अधुरा ये सफ़र, बिन तेरे तेरी चाहत में कहीं रो रोकर ही न मैं मर जाऊं। देखे संग सब […]

आपने तो साल बदलते देखें है

आपने तो साल बदलते देखें है हमने तो यार बदलते देखें है देखा है दिल पे कुछ लब पे कुछ पल पल किरदार बदलते देखें है नफ़रत देखा,देखा हमने यों प्यार एक चेहरा सौ बार बदलते देखें है हर बार हमने उसे अपना समझा हम उसे हर बार बदलते देखें है तोडा मुझको वो खुद […]

फकत इंतजार तेरा बालम

न पूछो हमसे कि क्या हाल-ए-दिल का है आलम, नसीब में सुन लिखा फकत इंतज़ार तेरा बालम। रुह-ए नज़र की चाहत है बस दीदार-ए-सनम। दिल की भी चाहत है कि बस तेरा प्यार न हो कम। भर के हामी अपनी रजामंदी दे देकर मेरे प्यार का तोहफा तू कर कबूल नीलम। बनकर हमसफ़र रुकी ज़ीस्त […]

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ रात की चादर हटे और तुम्हारा रूप खिले तब मैं तुम्हारे माथे पर ओंस सा चमकना चाहता हूँ कभी जुनून,कभी तिश्नगी,कभी आशना तुम जैसा […]

मैकदा और मीना अच्छा लगता है

प्यास कब से थी मरघटों सी मेरे लबों पे तुझे पा के फिर से जीना अच्छा लगता है तेरे चेहरे पे मुस्कान की कलियाँ यूँ ही खिलती रहें तेरे लिए हज़ार ज़ख़्म भी सीना अच्छा लगता है जो भी बूँद होके गुज़रे तेरे मदभरे लबों से मुझे आवारा बादल सा उसे पीना अच्छा लगता है […]

कभी चाँद बनके तू भी मेरी छत पे आ जाया कर

बस मुझे ही अपनी गलियों में यूँ ही न बुलाया कर कभी चाँद बनके तू भी मेरी छत पे आ जाया कर मैं जाता ही नहीं किसी भी मंदिर और मस्जिद में बस तू ही मुझे मेरे ईश्वर,खुदा सा नज़र आया कर मैं क्यों जाऊँ किसी भी काबा या काशी को कभी मेरी तासीर पर […]

तेरा एहसास

क्यों तेरा मिलना एक अधूरा सपना सा लगे है फिर भी तेरा एहसास मुझे अपना सा लगे है, तू मेरे साथ कहीं नहीं है फिर भी तेरा साया मेरे साथ हर लम्हा लगे है, जिसमे तेरा ख्याल नहीं वो ख्वाब भी मुझे तन्हा सा लगे है, अनजान है तेरा हर अक्स मुझसे फिर भी मुझे […]

नाचूँ आज इस कदर कि मैं खुद को खो दूँ

नाचूँ आज इस कदर कि मैं खुद को खो दूँ अपने जिस्म के हर अंग में मस्तियाँ बो दूँ भुला के संसार के हर रीत और रिवाज़ को ज़ोर से चीखूँ,चिलाऊँ,हँसूँ और फिर रो दूँ बारिश की बूँदों को अपनी ज़ुल्फ़ों से बाँधूँ उसी खुशबू को वापस माँगूँ मैं उन्हें जो दूँ फीका पड़ा है […]

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना या रात की ख़ामोशी सुनता है कोई और भी आसमान के नीदों में चहलक़दमी करके धरती के ख़्वाब बुनता है कोई और भी हवा के ज़ुल्फ़ों से बिखरे आफ़ताबों को ओंस की डाली में चुनता है कोई और भी धूप के टुकड़ों से सिली मख़मली चादर जिस्म […]

इंसान ही नहीं खुदा का भी सलाम आएगा

सवाल होंठों से करो,जवाब आँखों से आएगा ये मोहब्बत है, बस इसी तरह पैग़ाम आएगा करवटें बिस्तरों में अब ज़ब्त नहीं हो सकती सिरहाने में बेख़्वाब नींदों का अंज़ाम आएगा इश्क़ की महफ़िलों में कभी तो बैठ के देखो सुबह मीर , शाम ग़ालिब का कलाम आएगा इश्क़ करने वालों की ये वसीयत मुकम्मल है […]

दर्द-ए-दिल

मुझे दश्त-ए-इश्क़-ए-तवील से,तू सराब-ओ-आब-ए-रवाँ न दे मुझे शोख़ नज़रों से देखकर, मेरी तिश्नगी को हवा न दे मुझे भाए ना कोई रंग – ओ – बू, मेरी जुस्तजू बस तू ही तू मेरे पास आ मेरे हमनवाँ , मुझे फासले से सदा न दे तेरी क़मसिनी तेरा बाँकपन , तेरी चूड़ियाँ तेरा पैराहन ये हसीन […]

ख़ुद को भूल जाता

मैं तो सिर्फ सिफर के मानिंद,है सनद भी ख़ाली रोज़ पढ़ता हूँ कायदा और भूल जाता हूँ……। हाँ बस तुझी को खुद से ज़्यादा, सनम चाहता हूँ रोज़ पढ़ता हूँ तेरा चेहरा और ख़ुदको भूल जाता हूँ। ख़ामख़ा ज़ख्मों को दिल से मैं लगाता हूँ, हश्र तो ख़ाक है सभी का, भूल जाता हूँ। आयतें […]

डूबते आफ़ताब में भी पाया होगा

मुझसे जब दूर,खुदको दिलबर ने पाया होगा। खंज़र यादों का, खुदी दिल पे चलाया होगा। अश्क़-ए-ग़म का समंदर,नज़रों से बहाया होगा। होकर नाराज़ खुदी को, खूब तड़पाया होगा। बंद कमरे में पढ़े होंगे जाकर ख़त सारे। हर एक हर्फ़ में तस्वीर को मेरी पाया होगा। हो रही होगी रोशन, जब शमा से महफ़िल। मुझको डूबते […]