Category Archives: नज़्म (मोहब्बत)

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ रात की चादर हटे और तुम्हारा रूप खिले तब मैं तुम्हारे माथे पर ओंस सा चमकना चाहता हूँ कभी जुनून,कभी तिश्नगी,कभी आशना तुम जैसा […]

मैकदा और मीना अच्छा लगता है

प्यास कब से थी मरघटों सी मेरे लबों पे तुझे पा के फिर से जीना अच्छा लगता है तेरे चेहरे पे मुस्कान की कलियाँ यूँ ही खिलती रहें तेरे लिए हज़ार ज़ख़्म भी सीना अच्छा लगता है जो भी बूँद होके गुज़रे तेरे मदभरे लबों से मुझे आवारा बादल सा उसे पीना अच्छा लगता है […]

कभी चाँद बनके तू भी मेरी छत पे आ जाया कर

बस मुझे ही अपनी गलियों में यूँ ही न बुलाया कर कभी चाँद बनके तू भी मेरी छत पे आ जाया कर मैं जाता ही नहीं किसी भी मंदिर और मस्जिद में बस तू ही मुझे मेरे ईश्वर,खुदा सा नज़र आया कर मैं क्यों जाऊँ किसी भी काबा या काशी को कभी मेरी तासीर पर […]

तेरा एहसास

क्यों तेरा मिलना एक अधूरा सपना सा लगे है फिर भी तेरा एहसास मुझे अपना सा लगे है, तू मेरे साथ कहीं नहीं है फिर भी तेरा साया मेरे साथ हर लम्हा लगे है, जिसमे तेरा ख्याल नहीं वो ख्वाब भी मुझे तन्हा सा लगे है, अनजान है तेरा हर अक्स मुझसे फिर भी मुझे […]

नाचूँ आज इस कदर कि मैं खुद को खो दूँ

नाचूँ आज इस कदर कि मैं खुद को खो दूँ अपने जिस्म के हर अंग में मस्तियाँ बो दूँ भुला के संसार के हर रीत और रिवाज़ को ज़ोर से चीखूँ,चिलाऊँ,हँसूँ और फिर रो दूँ बारिश की बूँदों को अपनी ज़ुल्फ़ों से बाँधूँ उसी खुशबू को वापस माँगूँ मैं उन्हें जो दूँ फीका पड़ा है […]

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना या रात की ख़ामोशी सुनता है कोई और भी आसमान के नीदों में चहलक़दमी करके धरती के ख़्वाब बुनता है कोई और भी हवा के ज़ुल्फ़ों से बिखरे आफ़ताबों को ओंस की डाली में चुनता है कोई और भी धूप के टुकड़ों से सिली मख़मली चादर जिस्म […]

इंसान ही नहीं खुदा का भी सलाम आएगा

सवाल होंठों से करो,जवाब आँखों से आएगा ये मोहब्बत है, बस इसी तरह पैग़ाम आएगा करवटें बिस्तरों में अब ज़ब्त नहीं हो सकती सिरहाने में बेख़्वाब नींदों का अंज़ाम आएगा इश्क़ की महफ़िलों में कभी तो बैठ के देखो सुबह मीर , शाम ग़ालिब का कलाम आएगा इश्क़ करने वालों की ये वसीयत मुकम्मल है […]

दर्द-ए-दिल

मुझे दश्त-ए-इश्क़-ए-तवील से,तू सराब-ओ-आब-ए-रवाँ न दे मुझे शोख़ नज़रों से देखकर, मेरी तिश्नगी को हवा न दे मुझे भाए ना कोई रंग – ओ – बू, मेरी जुस्तजू बस तू ही तू मेरे पास आ मेरे हमनवाँ , मुझे फासले से सदा न दे तेरी क़मसिनी तेरा बाँकपन , तेरी चूड़ियाँ तेरा पैराहन ये हसीन […]

ख़ुद को भूल जाता

मैं तो सिर्फ सिफर के मानिंद,है सनद भी ख़ाली रोज़ पढ़ता हूँ कायदा और भूल जाता हूँ……। हाँ बस तुझी को खुद से ज़्यादा, सनम चाहता हूँ रोज़ पढ़ता हूँ तेरा चेहरा और ख़ुदको भूल जाता हूँ। ख़ामख़ा ज़ख्मों को दिल से मैं लगाता हूँ, हश्र तो ख़ाक है सभी का, भूल जाता हूँ। आयतें […]

डूबते आफ़ताब में भी पाया होगा

मुझसे जब दूर,खुदको दिलबर ने पाया होगा। खंज़र यादों का, खुदी दिल पे चलाया होगा। अश्क़-ए-ग़म का समंदर,नज़रों से बहाया होगा। होकर नाराज़ खुदी को, खूब तड़पाया होगा। बंद कमरे में पढ़े होंगे जाकर ख़त सारे। हर एक हर्फ़ में तस्वीर को मेरी पाया होगा। हो रही होगी रोशन, जब शमा से महफ़िल। मुझको डूबते […]

रखा हुआ है

बागबाँ सूख गया राह तकते दिलबर बेशक, बंद किताबों में फूल तेरा दिया रक्खा हुआ है । तेरी ख़ातिर कि तू आएगा,भले देर सही अँधेरी राहों में रौशन कर,जिया रक्खा हुआ है। आईना देखते हैं तो यूँ लगता जैसे तेरी तस्वीर को दर्पण में पिया रक्खा हुआ है। आ ही जाओगे इक दिन तुम, ख्वाबों […]

रिश्ता कोई अबद से होगा

तुम आई हो तुम आई हो तो कुछ तो तकदीर का भी मकसद होगा बेरुखी पर भी मुस्कराई हो तो रिश्ता कोई अबद से ही होगा अब आ गई हो मैं भी ना रोक सका हूँ जब तुमको आओ बैठो इन्हीं पर, जख्मों के सिवा मुझपर कुछ नहीँ है बैठाने को बस जाने क्यों हो […]

पारसा मोहब्बत

मुहब्बत पारसाई है मगर ये जग-हँसाई है मुहब्बत है हसीं जज़्बा मुहब्बत ख़ुश-नसीबों को मिल्ला करती है दुनिया में मुहब्बत इक सहीफ़ा है इस बदनाम मत करना मुहब्बत का भरम रखना उसे मिटने नहीं देना मुहब्बत ख़ूबसूरत से परिंदों की कहानी है मुहब्बत जावेदानी है हसीं एहसास का पंछी करे परवाज़ तारों में कभी हो […]

“गुजारिश”

“बहुत सादगी से हो रहे हैं गुम…, तुम्हारी बाते …तुम्हारे रास्ते… और तुम।। मुझे सोचो,मुझे चाहो, मुझे अपना बना लो ….. बस इतनी सी तुमसे……..गुजारिश थी! उतरकर रूह में मेरी….. आहिस्ता से ठहर जाओ ……. यही इस दिल की …… …ख्वाहिश थी ! ना देखे अब कोई तुमको, ना चाहे अब कोई मुझको… तुम मुझमें […]

मुझमें कतरा कतरा तू ही तो समाई है

🎶🎼🎸🎸🎵🎶🎶🎶🎼 मेरे हर एहसास के एहसास में तू मेरी हर बात में तू सिर्फ तू मेरे लिखे में सभी को नज़र आऊँ मैं मेरे लिखे में सभी को नज़र आऊँ मैं मुझ में तो कतरा कतरा तू ही समाई है वक्त भी तो गुजरता ज़रा ठहरा ठहरा वक्त भी तो गुजरता ज़रा ठहरा ठहरा छूआ […]

पूरी ग़जल बन गए

ज़ज़्बात से जो पूरी ग़जल बन गए । एक बात से बात कुछ यूँ बन गए । तेरी यादों में चैन बैचेन हो रही । नर्म सेज चुभन अहसास दे रही । इन तन्हा तन्हा बैचेन रातों में। जज़्ब किया तेरी ही यादों को । आता नही चाँद, चाँदनी रातों में । भूला झील सी […]

मोहब्बत दिन की रात से

जब दिन मिलता है किसी रात से मोहब्बतजगाता है शाम की सौगात से रात हटाती है तब शर्माती सी घुंघट अपना तब दिन , देख रंग रूप चांदनी के खो देता है होश अपना माथेपर गोल चांद की बिंदी गहने चमचमाते तारों के मांग टीका कुछ यूँ के गंगा निकले आकाश से तब दिन-रात को […]