Category Archives: ग़ज़ल (अन्य)

“असर है”…

°°° ख़ामोश है माहौल , आपसी रंज़िश का असर है । दीवाना है कोई , बेहिसाब क़शिश का असर है । •• विचारों का तालमेल जीने के वास्ते ज़रूरी , मौत आसां हुई आजकल , ये बंदिश का असर है । •• कठोर-दिल भी अब मुस्कुराहट लिए इधर फिर रहा , दिल पिघल ही गया […]

गज़ल [ खुश घर]

जीवन खिला चमन लगता है घर तुझसे ही घर लगता है| सोचों में हर पल खलता है आशियाना असल लगता है| ले मन में चाहत बस तेरी जग थमा बेहतर लगता है| . बादल घने चाँद भी गायब मुरझाया अम्बर लगता है| उस रब की मेहर लगता है आसाँ हर सफर लगता है| रेखा मोहन […]

“शबे-माहताब ऐसा भी”…

°°° काँटों के संग मुस्कुराता , इक गुलाब ऐसा भी । सवाल में ही नज़र आ गया , इक ज़वाब ऐसा भी । •• निगाहें ताड़ लेती हैं मुहब्बत की अदाओं को , छुपा पाया न ये कभी , इक तहे-नक़ाब * ऐसा भी । •• ज़ेहन में किसी को महफ़ूज रखना आसान कहाँ ? […]

आज भी मेरे कान जलते हैं

मुश्किलों से बहुत सँभलते हैं l तेरे कूचे से जब निकलते हैं ll तेरी सांसो की ज़द में आते ही, मेरे एहसास सब पिघलते हैं l लब की थिरकन बयान कर बैठी, तेरे ख़्वाबों में हम मचलते हैं l मख़मली सी छुअन वो होठों की, आज भी मेरे कान जलते हैं l जिनके दिल का […]

किसलिए दिन तू बुरे ज़िंदगी के याद करे

++ग़ज़ल ++(2122 1122 1122 22 /112 ) किसलिए दिन तू बुरे ज़िंदगी के याद करे क्यों गए कल के लिए आज को बर्बाद करे *** तालिब-ए-इल्म किया करते जो ख़िदमत की तरह क्या ज़माना है वही काम अब उस्ताद करे *** बह्र* की तह में पड़े ख़्वाब गुहर देखें यही (*समुन्दर ) कोई तो आये […]

सरदार लाज़मी हो असरदार तो जनाब

++ग़ज़ल ++(221 2121 1221 212 /2121 ) सरदार लाज़मी हो असरदार तो जनाब जो चुन सके अवाम के कुछ ख़ार तो जनाब **** ऐसा भी क्या शजर जिसे फूलों से सिर्फ़ इश्क़ कोई हो शाख शाख-ए-समरदार* तो जनाब (*फल से लदी डाली ) *** होगा नसीब में कि न हो बात और है ता-ज़ीस्त रहती […]

चापलूसी के दाम मिला करते हैं

हुज़ूरों की ख़बर रखते थे अख़बार अब अख़बारों की ख़बर हुजूर लिया करते हैं चापलूसी पे लोग हँसा करते थे कभी अच्छे दाम अब उसके भी मिला करते हैं लैम्प पोस्ट की रोशनी में पढ़ाई करके भी नाम रौशन करते थे अधपेटे बच्चे जो बेचते सारे शहर के लैंप पोस्ट वो अखबारों में पहले सफ़्हों […]

बदले में नफ़रत बशर क्या मोहब्बत पे आफ़त नहीं है

मिले नफ़रतों के जो बदले में नफ़रत बशर क्या मोहब्बत पे आफ़त नहीं है दिमाग़ अपना ठंडा करें और सोचें अदावत का बदला अदावत नहीं है *** बनाया ख़ुदा ने गज़ब है बशर को मगर बख़्शी थोड़ी शराफ़त नहीं है गढ़ा ख़ूबसूरत ये किरदार कितना शराफ़त बिना कोई क़ीमत नहीं है *** ख़ुदा ने दिया […]

शहर में अटपटा सा होगा

शहर में वो ज़रा .कुछ अटपटा सा होगा भीड़ के साथ होगा पर कटा सा होगा चीख़ मज़लूमों की तो आई होगी उस तक दिल जो पिघला कलेजा .भी फटा सा होगा उसके कमरे में ज़बरन धूप कब आई है खिड़की वा होगी पर्दा हटा सा होगा सलवटें यूं खबर ताज़ा पे आईं देखो अखबार […]

जिस्म तो मेरा फ़ना हो जाएगा

दर्द जिस दिन बावरा हो जाएगा l रूह का पंछी हवा हो जाएगा ll इक सुकूं की साँस ले लूँ आज तो, कल नया मुद्दा खड़ा हो जाएगा l क्यूँ चले आये हो यूँ ख़्वाबों में तुम, ज़ख्म फिर दिल का हरा हो जाएगा l एक सरगोशी सदा जिस दिन बनी, बस उसी दिन फ़ैसला […]

कौन दुश्मन और जहाँ में कौन अब हमदर्द है

++ग़ज़ल ++(2122 2122 2122 212) कौन दुश्मन और जहाँ में कौन अब हमदर्द है जुस्तज़ू* में रात दिन इसकी ही औरत-मर्द है (*तलाश ) *** भीड़ रिश्तों की रफ़ीक़ों की रक़ीबों की मगर आदमी दुनिया में अक़्सर फिर भी रहता फ़र्द* है (*अकेला ) *** हम जिधर भी हाथ डालें मिल रहा धोका फ़रेब हो […]

तन्हाइयों में बैठ के ख़ुद से लड़ा करें

++ग़ज़ल ++(221 2121 1221 212 ) तन्हाइयों में बैठ के ख़ुद से लड़ा करें मुमकिन नहीं फिर आप किसी का बुरा करें *** लम्हात चंद आपको मिलने ख़ुशी के हैं जब भी नसीब हों इन्हे खुलकर जिया करें *** गर आपको समझना किसी ला-मकीं* का ग़म (*बेघर ) ख़ुद अपने घर से आप भी बेघर […]

“ऐ ज़िंदगी”…

°°° ऐ ज़िंदगी तू रूठकर मुझसे अब कहीं जाना नहीं । जीने के लिए जान मुझसा कोई दीवाना नहीं । •• बड़ी शिद्दत से मुस्कुराने की वज़ह ढूँढ रहा हूँ , गुज़ारिश है नज़र इक पल के लिए भी हटाना नहीं । •• अब चाहे आँधी आ जाये या फिर कोई तूफान , मैं तेरे […]

नज़ारे बदल गये

मेरी कलम से ……………. नजरे बदली तो नज़ारे बदल गए तारीख़े बदली तो सितारे बदल गए । साहिल पर तूफान ए कहर जो पड़ा लहरे बदली तो किनारे बदल गए । हौसलो से परिंदो ने बनाये थे घोसले हवाएं बदली तो सहारे बदल गए । आशियाना मोहब्बत का बनाया मगर दीवारे बदली तो चौबारे बदल […]

आज इक ऐसा करिश्मा हो गया

              ग़ज़ल आज इक ऐसा करिश्मा हो गया, आसतीं का साँप सीधा हो गया। आज फिर दिल ने उन्हें आवाज़ दी, ख्वाब फिर अपना सुनहरा हो गया। बेसबब उनसे मेरी नजरें मिलीं, फिर मिलीं, फिर-फिर मिलीं, क्या हो गया। दिल में जिसकी जुस्तजू थी, चाह थी, वो ही पल […]

किसको है

  तेरे प्यार के स्पर्श से चितवन हुई उजली, मेरी भावनाओं का आभास किसको है। सजाकर बसंत सम मम रूप दिया नूतन, मेरी सांसों में छन्दों सा उल्लास किसको है। संवारा नीरस जीवन को तुमने दिव्य आभा से, मम प्रियतम सम स्वर्णिम उजास किसको है। मुझे प्यार है बस तुमसे, तुम्हीं ज़िन्दगी मेरी, मेरी इस […]

नई रिवायत

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ” नई रिवायत ” दोस्तों से कुछ शिकायत हो गई है आजकल, हमे दुश्मनों से मोहब्बत हो गई है आजकल, फुरसत नही है किसी को जो मेरा हाल पूछे, अब तो उन्हें खुद से नफरत हो गई है आजकल , बन्दिशों के बाद भी वो याद करता है सबको , ये तो खयालो वाली […]

जान लेंगी मेरी आज ये हिचकियां

मुतल्ला गजल : कुमार अरविन्द जान लेंगी मेरी आज ये हिचकियां याद आती रही वस्ल की मस्तियां रास आने लगी जब से तन्हाइयां फुसफुसाती रही रात भर आंधियां कोई जाने हमारी न मजबूरियां दूर रहकर बनाई हैं नजदीकियां उम्र दर उम्र करते रहे गलतियां जान कर भी बजाते रहे तालियां इश्क में बारहा लग चुकी […]

पहलू क्या क्या निकाल रख्खे हैं

हमने सिक्के उछाल रख्खे हैं वो सनम दिल निकाल रख्खे हैं।। तेरी बातो पे था यकीं मुझको गुमाँ क्या क्या जो पाल रख्खे हैं।। पैर में तेरे आज है छाले दर्द हमने ही पाल रख्खे हैं।। संगमरमर की अब है जो मूरत पहलू क्या क्या निकाल रख्खे हैं।। देख सूरत ये आइना हंसता सपने कितने […]

तेरी नज़ाकत किसी काम की नहीं

ज़ुल्म होता रहे और आँखें बंद रहें ऐसी आदत किसी काम की नहीं बेवजह अपनी ही इज़्ज़त उछले तो ऐसी शराफत किसी काम की नहीं बदवाल का नया पत्ता न खिले तो ऐसी बगावत किसी काम की नहीं मुस्कान की क्यारी न खिल पाए तो फिर शरारत किसी काम की नहीं तुम्हें छुए और होश […]