Category Archives: ग़ज़ल (दर्द)

सितम नाज़ तो देखो

‘सितम नाज़ तो देखो’ आँखों से हया टपके है अंदाज़ तो देखो। नाज़ुक से मेरे दिल पे सितम नाज़ तो देखो। चाहत ने उसी की हमें दीवाना बनाया, अंजाम खुदा जाने है आगाज़ तो देखो। क्या जोशे-मुहब्बत का तुम्हें हाल बतायें, टूटा जो मेर दिल का वो साज तो दखो। तहरीर दिलो-जां पे ये तुमने […]

दिल दुखाके भी वो मेरा नादान सा है।।

चाँद तारे भी देखके तुमको हैरान सा है।। रुख़ क्यों आसमाँ का ही ये बेज़ान सा है।। मेरी भी ज़िन्दगी गुज़री परेशानी में ही।। बादलों के मध्य सूरज भी हैरान सा है।। ये सुई और धागे में ही तो मोहब्बत है।। दिल दुखाके भी वो मेरा नादान सा है।। इस हवा में तो साँसे लेना […]

ज़िंदगी  कोई  यहाँ  पे हैं  सज़ा हो जैसे

ज़िंदगी को भी तो हमसे यूं गिला हो जैसे दर्द उसको भी मुहब्बत में  मिला हो जैसे।। देख  ले  मेरा भी  कोई  मुक़द्दर यहाँ पे यार के प्यार की अब कोई दुआ हो जैसे।। मर  गया  वो  पतंगा  भी  तो इश्क़ में ही अब मुहब्बत से ही होती हैं नफ़ा हो जैसे।। भूख़ी आत्मा को […]

मुसाफ़िर बन गया हूँ!

गजल आईने सी टूटी हुई तस्वीर बन गया हूँ! रूठे हुए भाग्य की लकीर बन गया हूँ! अब कहाँ बसेरा इस बेबस इंसान को, दो गज की मिली जागीर बन गया हूँ! कैसे लगे निशाना अब अपने लक्ष्य पर, टुकड़े हुए कमान का तीर बन गया हूँ! बढ़ नहीं सकता दो कदम आश लिए , […]

रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा!

गजल छलकने वाले जाम का मयख़ाना कहां रहा! आजकल दिलजलों का ये ठिकाना कहां रहा! वो बैच गए पैसों पर अपने आप को यारो, मेरे दिल का वहां अब आशियाना कहां रहा! क्या चाहत है फ़रेबी चेहरे पर देखने को मिली, रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा! टूटा हुआ आईना पूछ रहा है मुझसे […]

तुझसे बिछड़ कर ये बात समझ में आई

तुझसे बिछड़ कर ये बात समझ में आई सुबहों-शाम और दिन-रात समझ में आई जिस्म जब थक के सोया था बिस्तर में हँसी-मज़ाक व मीठी बात समझ में आई मैं ढूँढता ही रहा तुझे हर शय,हर मंज़र में तेरी-मेरी पहली मुलाकात समझ में आई दरो-दीवार भी तेरा इंतज़ार करते रहते हैं बुज़ुबान चीजों की बात समझ […]

लौट आया हूँ

लौट आया हूँ मैं चोट खा करके अब| फाइदा कुछ नहीं दिल लगा करके अब| ++ रास्ता रोकता है बुलन्दी का जो, फैंकना है वो पत्थर उठा करके अब| ++ दोस्ती की जरा भी न की कद्र पर, खुश है वो दुश्मनी ये निभा करके अब| ++ मुझको तकलीफ बस एक ही बात की, वो […]

करवटें बदल कर हमने तमाम रात काटी

जबसे उनके ख्वाबों में अपनी नींदें बाँटी करवटें बदल कर हमने तमाम रात काटी बेचैन सिलबटों में जब उनकी याद जागी तस्वीर उनकी सिरहाने रखके रात काटी चाँद पूरे शाबाब पे जब आसमान में आया उसमें तेरा अक्स देखकर तन्हा रात काटी बादल उमड़-घुमड़ कर मुझे सताता रहा तेरी वस्ल में भीग कर हरजाई रात […]

मरज़ की दवा

तुम मरज की मिरे दवा कर दो या मिरा ज़ख़म और हरा कर दो मैं तो पत्थर हूँ राह का मुझको यूं तराशो कि देवता कर दो चोट देकर पुराने ज़ख़मों को दिल के हर दर्द को नया कर दो याद पहुंचे ना मेरे सीने तक दरमियाँ उतना फ़ासिला कर दो बद-गुमानी की धूल है […]

“फ़ना हो गया”…

2221 2212 2221 2212 °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° उसका ख़्याल मेरे लिए बस वाज़िब दवा हो गया । कैसा मरज़ है इश्क़ का , धीमा-सा नशा हो गया । •• कोई कसम खाकर कहे तो अब मान लूँ मैं इधर , वादा तोड़ने का तरीका कैसे वफ़ा हो गया ? •• बतलाना ज़रूरी नहीं है चाक़े-ज़िग़र को उसे […]

भरोसा खुदा पर किये जा रही हूं

भरोसा खुदा पर किये जा रही हूं। मुसीबत से अपनी लड़े जा रही हूं।। मिले ज़ख्म जो वक्त उस को भरेगा इसी आस पर मैं जिये जा रही हूं।। मुझे प्यार का रोग जिसने लगाया उसे भी दुआ मैं दिये जा रही हूं।। कई ख्वाब आंखों में मरने लगे हैं मगर ख्वाब फिर भी बुने […]

यादों ने क्या ज़ुल्म किये दिल जानता है

ग़ज़ल ————— यादों ने क्या ज़ुल्म किए दिल जानता है कैसे हम कल रात जिये दिल जानता है किन लोगों का हाथ रहा बरबादी में किस किस ने एहसान किये दिल जानता है टूटे ख़्वाबों की किरचों ने सारी रात आंखों पर क्या जब्र किये दिल जानता है ग़ैर तो आख़िर ग़ैर थे उनसे क्या […]

“वो हो लेने दो”…

°°° मत टोकना , अश्क़ों से तकिया भिगो लेने दो । किसी की याद में ग़र खोते हैं तो खो लेने दो । •• ये इंतज़ार के पल क्या लब पे हँसी देंगे ? ग़र नहीं तो आज अब जी भर के रो लेने दो । •• हो सकता है आगे चल अहसास मिले अच्छे […]

ये शुहरत इज़्ज़त कुछ नही क़िस्मत से ज़ियादा

221–1221–1221–122 ये शुहरत इज़्ज़त कुछ नही क़िस्मत से ज़ियादा दरख्वास्त तुम्हारी है ज़रूरत से ज़ियादा मै बिक जाऊ ऐसे ये मुझे मंज़ूर नही मै अनमोल हूँ अपनी क़ीमत से ज़ियादा तवज़्ज़ो देते नही लोग यूँ अब तकब्बुर में मै बदनाम हूँ अपनी शराफ़त से ज़ियादा हर शख़्श मिला मुझे मेरा ही अब साया वो मुझ […]

आईना कौन था

तेरे चेहरे का ऐ महजबीं आईना कौन था मैं अगरचे ना था फिर बताओ ज़रा कौन था वो अना थी तिरी या तिरे हुस्न का था ग़रूर जो बढ़ाता रहा दरमियाँ फ़ासिला कौन था तीरगी हमसफ़र बन के चलती रही रात-भर दोस्तो वरना सफ़र में मिरा कौन था पांव के आबले दे रहे हैं गवाही […]

आंखो मे बरसात

बेबसी आँखों में बरसात लिए बैठी है दर्द ही दर्द मिरी ज़ात लिए बैठी है मुफ़लिसी किस से करे कोई शिकायत उस की दिल पे जो अपने वो सदमात लिए बैठी है ज़िंदगी लाख सवालों की है ज़द में तो किया मौत सारे ही जवाबात लिए बैठी है कोई रोता कोई हँसता है परेशां कोई […]

लड़खड़ाती जिंदगी…..

लड़खड़ाती जिंदगी, तन्हाइयाँ हंसती रहीं। चंद माज़ी की मेरीे परछाइयाँ हंसती रहीं। हसरतें फूलों सी हम दिल में बसाये थे मगर, दिल में तेरी याद थी, रुसवाइयाँ हंसती रहीं। होठों पर लेके हंसी और दर्द सीने में लिये, होके बे गैरत मेरी मजबूरियाँ हंसती रहीं। चन्द ख़वाबों के तसव्वुर नेबहुत हैरां किया लब पे खामोशी […]

“असर बाकी है”…

°°° मेरी ज़िंदगी में कुछ फासले पे असर बाकी है । लफ़्ज़ निकले थे यहीं कभी , उनकी क़दर बाकी है । •• न जाओ इतनी जल्दी मेरे ख़्वाबों से निकलकर , सदा बताना ठीक नहीं अभी तो सहर बाकी है । •• हसरतें न जाने कबसे इंतज़ार में हैं बैठे , मगर अच्छे पलों […]

आज घर अब बदल रहा हूँ मैं

आज घर अब बदल रहा हूँ मैं तेरे  दिल  से निकल रहा हूँ मैं तेरी  यादों  में  दिन  गुजारेंगे खुद में ही अब पिघल रहा हूँ मैं नाम  मेरा  न  तू  कभी  भूला सोचकर खुद ही जल रहा हूँ मैं वक़्त था  मेरा  भी  कभी साया कोई  गुजरा  वो  पल  रहा हूँ मैं तेरी  आँखों  में  दे  दी  […]

मेरी तन्हाई मेरा जुनूं और मैं

—– ग़ज़ल———– मेरी तन्हाई मेरा जुनूं और मैं ए शबे हिज्र कितना चलूं और मैं डाल दे क़ैद ख़ाने फिर से मुझे तेरे दरबार में सर निगूं और मैं ? कर रही है ज़रूरत तक़ाज़ा मगर तुझ पे कोई क़सीदा लिखूँ और मैं ? तुझ को पाने की धुन में भटकते रहे एक बे चारा […]