Category Archives: ग़ज़ल (मोहब्बत)

“सलामत है” …

°°° गुजरे ज़माने का ख़ूबसूरत अंज़ाम सलामत है । दे जाती नयी ज़िंदगी वो यादें तमाम सलामत है । •• पल-पल में लड़ना और पल-पल में जल्द मिल भी जाना , इक-दूसरे का होता अज़ब एहितराम सलामत है । •• भले उम्र का दौर बेहिसाब निकलता दिख रहा अभी , मगर बचपन का बेतक़ल्लुफ़ प्यारा […]

चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा

वो गया दफ़अतन कई बार मुझे छोड़के पर लौट कर फिर मुझ में ही आता रहा कुछ तो मजबूरियाँ थी उसकी अपनी भी पर चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा कई सावन से तो वो भी बेइंतान प्यासा है आँखों के इशारों से ही प्यास बुझाता रहा पुराने खतों के कुछ टुकड़े ही सही,पर मुझे भेज […]

“मुलाक़ात हो गयी”…

°°° कई बरस के बाद अब ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गयी । आज मिल गया कोई और खूब सारी बात हो गयी । •• ज़हान के रस्मों की अनसुलझी बातें अब कौन करे ? आपस में मिल गये तो बड़ी हसीन हालात हो गयी । •• दुआओं का आँगन न जाने कबसे सूना-सूना था ? […]

मोहब्बत की दरिया में नहाकर देखा है!

गजल मुहब्बत की दरिया में नहाकर देखा है! जबसे उन्होंने नजर मिलाकर देखा है! कारवाँ ही बदल गया जिंदगी का, उन्हें अपने दिल से लगाकर देखा है! शुरूआत अजीब थी अपने मिलन की, खुशियों की सेज को सजाकर देखा है! जमाना जलता है अपनी चाहत पर सनम, दीवारों के कान लगाकर देखा है! हम परिंदे […]

आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये

++ग़ज़ल++(2122 2122 2122 212) आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये | इस क़दर है आपकी उल्फ़त की चाहत देखिये | *** चैन से जीना न मरना है हमारे हाथ में आप ने करदी हमारी कैसी हालत देखिये | *** वस्ल का वादा किया फिर क्या सबब आये नहीं वक़्त बीता जा रहा उसकी […]

उलझनों में ही उलझती

उलझनों में ही उलझती ज़िन्दगानी रह गयी। बस वफ़ाओं की बदौलत शादमानी रह गयी।। तुम फ़लक पर चाँद बनकर रौशनी देते रहे। मैं महकती सी तुम्हारी रातरानी रह गयी।। हर घड़ी अहसास तेरा अनछुआ वो मन-छुआ। बात सच्ची इक यही दिल की बतानी रह गयी।। ख़्वाब सब बेनूर हैं बेरंग गुमसुम रौनकें। ज़िन्दगी तुम बिन […]

“चाहने लगे हैं”…

°°° वो दिलो-जान से बेइंतेहा चाहने लगे हैं । हर अहसास को मिलकर बेझिझक बाँटने लगे हैं । •• मुलाक़ातों के दौर के बेहद शुक्रग़ुज़ार हैं हम , जिसकी वज़ह हमें वो क़रीब से जानने लगे हैं । •• हमें देखकर ही लिखा आपने , कहना है उनका , और वो ग़ज़ल के शेरों पे […]

कोई मरासिम नही तुम से

दिल में हसरत है किसी रोज़ मनाने आओ और मिरी आँख में ख़ाबों को सजाने आओ तुम मिरा दर्द ना बाँटो तो कोई बात नहीं बस मिरे ज़ख़्म पे मरहम ही लगाने आओ सिर्फ हाथों के मिलाने से नहीं होगा कुछ तुमको मिलना है अगर दिल को मिलाने आओ मिल गई उफ़ ग़म-ए-जानाँ से रिहाई […]

आसमान पे बैठे खुदा को झुका तो सकूँ

अपने नज़्मों में ही सही मैं तुझे पा तो सकूँ क्या दरयाफ्त हैं सीने में मेरे सुना तो सकूँ एक आग लगी है अहसाओं के समंदर में तेरी निगाहों की बरसात से बुझा तो सकूँ बड़ा कमज़र्फ है ज़माना हमारे इश्क़ को तेरी जुस्तजू में कोई तूफ़ान उठा तो सकूँ क्या हुआ कि तुम और […]

इश्क़ की बिमारी

बह्र- 2122 1212 22 आज इस दिल पे क्यों खुमारी है। हो गयी इश्क़ की बिमारी है। और कुछ अब हमें दिखे भी क्यों, उस खुदा पर नज़र हमारी है। दिल फिदा चाँद पर हुआ मेरा, हाँ तभी तो ये बेकरारी है। चाँद तू चाह भी ले हमको, सुन हमारी तुझी से यारी है। फिर […]

हाल-ए-दिल उनको सुनाना न आया

हाल-ए-दिल उनको सुनाना न आया मोहब्बत निगाहों से बताना न आया जब खुद को देखा मेरी निगाहों से फिर खुद को ही छिपाना न आया हम तेरे तार्रुफ़ से हुए कभी गाफिल ऐसा कभी कोई भी ज़माना न आया ये खुली ज़ुल्फ़ें और झुकी हुई नज़रें क्यों फिर याद कोई फ़साना न आया तेरे मरहमी […]

मुझे देखकर सब तेरा नाम पूछते हैं

मुझे देखकर सब तेरा नाम पूछते हैं रात-दिन और सुबहो-शाम पूछते हैं कैसे छिपा रखा है तुझ को खुद में बारहाँ सब मुझसे वही राज़ पूछते हैं तसब्बुर में आके तासीर में ढल जाना मेरे रक़ीब अब मेरा ये अंदाज़ पूछते हैं जो सवाल उठा कभी तेरे सहमे लबों पे उसका आज भी मुझसे जवाब […]

ये मीरा भी है, सिर्फ राधा तो नहीं

तुम्हें चाहूँ तो तुम्हें पा भी लूँ तुझसे ऐसा कोई वादा तो नहीं हुश्न अपना हो और गिरफ्त में हो इश्क़ का ऐसा कोई इरादा तो नहीं मोहब्बत कई रंग में नज़र आती है ये मीरा भी है, सिर्फ राधा तो नहीं खुद से खुद ही को लेके जाएगी प्यार का सौदा सीधा-सादा तो नहीं […]

किया किसी ने है जादू कमाल आँखों से

++ग़ज़ल++( 1212 1122 1212 22 ) किया किसी ने है जादू कमाल आँखों से | बिछा दिया है मुहब्बत का जाल आँखों से | *** ये नूर रुख का सनम आज ढा रहा है सितम झलक रहा है गजब का जमाल आँखों से | *** ये तिश्नगी तो हमारी हुजूर बढ़नी थी पिला रहे हो […]

हम भी अपनी तारीफों में असर करके देखते हैं

तेरा अक्स भी बारिश की बूँदों से धोकर देखते हैं हम भी खुद को चाहतों में भिंगो कर देखते हैं ये रंगत, ये चाहत, ये नज़ाकत और ये क़यामत मैकशी में ही कुछ घड़ी बसर करके देखते हैं बिंदी,लाली,चूड़ी,कंगन,पाजेब और तेरी कमीज पहना कर अब ज़रा अपनी ग़ज़ल को देखते हैं मौसम का शबाब और […]

गज़ल फिर आप मेरी क्यूँ हमेशा गुनगुनाते हैं

यूँ ही हर बात पर अक्सर जो हँसते-खिलखिलाते हैं l नुमाया करके मुस्कानें वो ग़म सारे छिपाते हैं ll हमारी मस्तियों का राज़ बस इतना सा है सुन लो, अहद लेते नहीं कोई जो लेते हैं निभाते हैं l घटाओं जा के’ ये पैग़ाम तुम महबूब को दे दो, जुदाई के ये’ पल लेकर हमारी […]

“तुमसे मिलकर”…

°°° हर एहसास हमदम हो गया है तुमसे मिलकर । ये प्यार भी तो चरम हो गया है तुमसे मिलकर । •• तेरी अदा का बस मैं ही एक दीवाना नहीं ? ये वक़्त भी तो सनम हो गया है तुमसे मिलकर । •• इतने सालों से पाये सूखेपन का क्या कहें ? एक झटके […]

तुम ही चाहत मेरी

.—तुम ही चाहत मेरी —- तुम ही चाहत मेरी तुम मुहब्बत भी हो। तुम खुदा हो मेरीे तुम इबादत भी हो। जिन्दगी तो सहज यूँ गुजर जायेगी, है मजा तब ही जब कुछ मुसीबत भी हो। हाल अपना सुनायें तुम्हें हम तभी, लब कुसाई की गर कुछ इजाजत भी हो। जिन्दगी का मजा तो है […]

मयस्सर होंठों की क्यों दवाई नहीं मुझे

मैं पीने को तो समंदर भी उठा लाता तेरी निगाहों से क्यों रिहाई नहीं मुझे महफ़िल झूम उठा है तेरी झलक से वो तस्वीर तेरी क्यों दिखाई नहीं मुझे वो नज़्म तेरे ही गाके मशहूर हो गया दिलकश तराने क्यों सुनाई नहीं मुझे चर्चे थे हमारे ही नाम के ज़माने में ये राज़ कभी भी […]

मैं सब जानता हूँ तुम्हारी बदमाशियाँ

मैं सब जानता हूँ तुम्हारी बदमाशियाँ तुम्हारे हुश्न की कहर ढाती अठखेलियाँ ज़ुल्फ़ है कि गहरा सा कोई तिलिस्म या हैं किसी जादूगरनी की पहेलियाँ मेरी कहाँ सुनती ही हैं अब ये फ़िज़ाएं हवा,बादल,चाँद सब तुम्हारी सहेलियाँ मैं दीवाना न हो जाऊँ तो क्या करूँ श्रृंगार तेरा ऐसा कि हो नई-नवेलियाँ तुम जहाँ बरसो सावन […]