Category Archives: ग़ज़ल (मोहब्बत)

वफा कर के देख लो

कभी बेवफा से भी वफा कर के देख लो मोहब्बत है कि नहीं ख़फ़ा कर के देख लो कभी आग दबी भी होती है इस राख में चाहो अगर ज़रा सी हवा कर के देख लो भरेगा जख़्म ए दिल तो मुहब्बत से भरेगा सुनो जितनी भी चाहे दवा कर के देख लो पहुँचेगा तुम्हारी […]

याद ऐसे सता रही है

मुझको तुम्हारी याद ऐसे सता रही है तुम हो यहीं कहीं पे खुशबू बता रही है जो कुछ चल रहा है दिल में तुम्हारे वो सब बातें तुम्हारी सूरत मुझको बता रही है सिमटे हुए से पलकों में ख्वाब हैं तुम्हारे जालिम ये नींद लेकिन उनकोे मिटा रहीं हैं महरूम हूँ मैं अब भी आगोश […]

हम   खुदाया  करम  देखते है

आशियाँ   ये  सनम  देखते हैं। फूटे    मेरे    करम   देखते हैं।। काँटों में र हके पायी मुहब्बत। ये   गुलाबों  में  हम  देखते हैं।। ऐसे मुझसे बिछुड़कर वो जैसे। मेरी आँखों को  नम  देखते हैं।। ज़िन्दगी  में  बदलते  है मौसम। हम   खुदाया  करम  देखते हैं।। आँख काजल से चाहे न खोना। उसका ये  वहम हम  देखते […]

“ऐतबार भी बहुत ज्यादा है”…

°°° न कोई वादा , न कोई कसमें , फिर भी साथ जाने का इरादा है । कोई है इक हमसफ़र जिसपे ख़ुद से ऎतबार भी बहुत ज्यादा है । •• क्या-क्या ख़्वाहिश है , एक बार पूछकर देख लिया मेरे हमसफ़र से , अब कुछ न चाहिये कहती है , उसका जीवन इतना सीधा-सादा […]

प्यार करती रही पर बता ना सकी

प्यार करती रही पर बता ना सकी। तुम वही हो जिसे मैं भुला ना सकी। चाहती थी भुलाना हर एक बात को। ख़त तुम्हारा भी लेकिन जला ना सकी।। तुम से वादे किये सैकड़ों थे मगर । एक वादा भी तुम से निभा ना सकी। ख्वाब में तुम मिले थे कई मरतबा । हाले‌ दिल […]

“हमराही मेरे”…

°°° हमराज़ बनकर ज़िंदगी में उतर गये हो हमराही मेरे । नज़रों में चाहत बनकर सँवर गये हो हमराही मेरे । ••जीवन का कोई मतलब पूछे तो बताऊँ तुम हो , कुछ सोच-समझकर दिल के अंदर गये हो हमराही मेरे । •• पास होते हो जब कभी सारे ग़म होते हैं कोसों दूर , खुशियाँ […]

मुद्दतों भूले हुए थे

ग़ज़ल साथ तेरा इस क़दर अच्छा लगा रास्ता भी पुर ख़तर अच्छा लगा ग़ैर को अपना बना लेता है तू गुफ़्तगु का ये हुनर अच्छा लगा मश्वरे देता है मुझको क़ीमती घर का वो बूढ़ा शजर अच्छा लगा साथ गुज़रा जो तुम्हारे साथ बस ज़िंदगी का वो सफ़र अच्छा लगा बाद मुद्दत आँख में आई […]

मौत सर पे ही खड़ी हो जैसे

2122 1122 22 मौत सर पे ही खड़ी हो जैसे साँसे आपस में लड़ी हो जैसे दिल ने फ़िर कर दी बग़ावत हमसे नज़रे उनसे ही भिड़ी हो जैसे नैनों  से  बहने  लगेंगी  धारा नैन  से  नैन  लड़ी  हो  जैसे पैरों में कंकड़ चुभे आपके जो चेहरें  में  शिकं  पड़ी  हो जैसे मज़बूत होंगी नफ़स […]

“ऐतबार रहता है”…

°°° न जाने कौन-सी क़शिश है , जो ये दिल बेक़रार रहता है ? दूर होकर भी कोई हर पल ज़ेहन में सवार रहता है । •• इस ज़माने में भरोसा न जाने कितनों ने हरदम तोड़ा , मगर कोई तो है जिस पर पल-पल अब ऐतबार रहता है । •• अब यह आलम है […]

“ये एक अहसास है”…

°°° तुम नहीं मगर तुम्हारी यादें मेरे पास है । बहुत ही ख़ूबसूरत हर-एक ये अहसास है । •• इक झिझक कोआसानी से तुमने यूँ मिटा दिया , आ गये हो ज़िंदगी में जबसे , बंदा ये बिंदास है । •• खामोशी बहुत दूर चली गयी है इस तरफ़ से , जब से देखा इधर […]

“कैसे हटाऊँ तुझे”…

°°° दिल की धड़कन कहो तो इक बार सुनाऊँ तुझे । चाहत की परिभाषा कहो तो बताऊँ तुझे । •• आसानी से कैसे कहा , चाहत नहीं पता ? क़शिश रही कभी , उसे क्या याद दिलाऊँ तुझे ? •• दिल की बात इक बार जो प्यार से सुन लो कभी , इश्क़ के मैदां […]

“सलामत है” …

°°° गुजरे ज़माने का ख़ूबसूरत अंज़ाम सलामत है । दे जाती नयी ज़िंदगी वो यादें तमाम सलामत है । •• पल-पल में लड़ना और पल-पल में जल्द मिल भी जाना , इक-दूसरे का होता अज़ब एहितराम सलामत है । •• भले उम्र का दौर बेहिसाब निकलता दिख रहा अभी , मगर बचपन का बेतक़ल्लुफ़ प्यारा […]

चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा

वो गया दफ़अतन कई बार मुझे छोड़के पर लौट कर फिर मुझ में ही आता रहा कुछ तो मजबूरियाँ थी उसकी अपनी भी पर चोरी-छिपे ही मोहब्बत निभाता रहा कई सावन से तो वो भी बेइंतान प्यासा है आँखों के इशारों से ही प्यास बुझाता रहा पुराने खतों के कुछ टुकड़े ही सही,पर मुझे भेज […]

“मुलाक़ात हो गयी”…

°°° कई बरस के बाद अब ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गयी । आज मिल गया कोई और खूब सारी बात हो गयी । •• ज़हान के रस्मों की अनसुलझी बातें अब कौन करे ? आपस में मिल गये तो बड़ी हसीन हालात हो गयी । •• दुआओं का आँगन न जाने कबसे सूना-सूना था ? […]

मोहब्बत की दरिया में नहाकर देखा है!

गजल मुहब्बत की दरिया में नहाकर देखा है! जबसे उन्होंने नजर मिलाकर देखा है! कारवाँ ही बदल गया जिंदगी का, उन्हें अपने दिल से लगाकर देखा है! शुरूआत अजीब थी अपने मिलन की, खुशियों की सेज को सजाकर देखा है! जमाना जलता है अपनी चाहत पर सनम, दीवारों के कान लगाकर देखा है! हम परिंदे […]

आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये

++ग़ज़ल++(2122 2122 2122 212) आ गये हैं छोड़कर रब की इबादत देखिये | इस क़दर है आपकी उल्फ़त की चाहत देखिये | *** चैन से जीना न मरना है हमारे हाथ में आप ने करदी हमारी कैसी हालत देखिये | *** वस्ल का वादा किया फिर क्या सबब आये नहीं वक़्त बीता जा रहा उसकी […]

उलझनों में ही उलझती

उलझनों में ही उलझती ज़िन्दगानी रह गयी। बस वफ़ाओं की बदौलत शादमानी रह गयी।। तुम फ़लक पर चाँद बनकर रौशनी देते रहे। मैं महकती सी तुम्हारी रातरानी रह गयी।। हर घड़ी अहसास तेरा अनछुआ वो मन-छुआ। बात सच्ची इक यही दिल की बतानी रह गयी।। ख़्वाब सब बेनूर हैं बेरंग गुमसुम रौनकें। ज़िन्दगी तुम बिन […]

“चाहने लगे हैं”…

°°° वो दिलो-जान से बेइंतेहा चाहने लगे हैं । हर अहसास को मिलकर बेझिझक बाँटने लगे हैं । •• मुलाक़ातों के दौर के बेहद शुक्रग़ुज़ार हैं हम , जिसकी वज़ह हमें वो क़रीब से जानने लगे हैं । •• हमें देखकर ही लिखा आपने , कहना है उनका , और वो ग़ज़ल के शेरों पे […]

कोई मरासिम नही तुम से

दिल में हसरत है किसी रोज़ मनाने आओ और मिरी आँख में ख़ाबों को सजाने आओ तुम मिरा दर्द ना बाँटो तो कोई बात नहीं बस मिरे ज़ख़्म पे मरहम ही लगाने आओ सिर्फ हाथों के मिलाने से नहीं होगा कुछ तुमको मिलना है अगर दिल को मिलाने आओ मिल गई उफ़ ग़म-ए-जानाँ से रिहाई […]

आसमान पे बैठे खुदा को झुका तो सकूँ

अपने नज़्मों में ही सही मैं तुझे पा तो सकूँ क्या दरयाफ्त हैं सीने में मेरे सुना तो सकूँ एक आग लगी है अहसाओं के समंदर में तेरी निगाहों की बरसात से बुझा तो सकूँ बड़ा कमज़र्फ है ज़माना हमारे इश्क़ को तेरी जुस्तजू में कोई तूफ़ान उठा तो सकूँ क्या हुआ कि तुम और […]