Category Archives: ग़ज़ल (संदेशात्मक)

दौलतें विश्वास की जब जब दिलों से घट गईं

++ग़ज़ल++(२१२२ २१२२ २१२२ २१२ ) दौलतें विश्वास की जब जब दिलों से घट गईं ज़र ज़मीँ के साथ रिश्तों में ख़राशें बट गईं ** कौन रखेगा मरासिम उनसे अब ता-ज़िंदगी प्यार वाली डोरियाँ जब बीच में से कट गईं ** जुर्म देखेगीं सहेंगी भी मगर बोलें न कुछ ऐसी क़ौमें मिट गईं तारीख़ से भी […]

बशर पे रब जो कभी मेहरबान होता है

++ग़ज़ल ++(१२१२ ११२२ ११२२ २२/११२ ) बशर पे रब जो कभी मेहरबान होता है दिलों में प्यार का जज़्बा जवान होता है ** छुपा है भेड़िया इंसान में पता किसको किसी के रुख़ पे न कोई निशान होता है ** कली चमन में है महफ़ूज़ क्यों नहीं अब तक सवाल सुन के दुखी बाग़बान होता […]

रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ?

++ग़ज़ल++(२१२२ ११२२ ११२२ २२/११२ ) रंज-ओ-ग़म हो न अगर आँखें कभी रोती क्या ? बेसबब साहिल-ए-मिज़गाँ पे नमी होती क्या ? ** ज़ख़्म ख़ुद साफ़ करें और लगाएं मरहम ज़ख़्म क़ुदरत किसी के ज़िंदगी में धोती क्या ? ** चन्द लोगों के नसीबों में लिखे ग़म ही ग़म ज़ीस्त सबकी ग़मों का बोझ कभी ढोती […]

भूख लगे तो रोटी की जात नहीं पूछा करते

भूख लगे तो रोटी की जात नहीं पूछा करते पेट को लगेगी बुरी,ये बात नहीं पूछा करते 1 ये धरती बिछौना ,ये आसमाँ है शामिआना बेघरों से बारहाँ दिन -रात नहीं पूछा करते 2 मालूम है कि एक भी पूरी नहीं हो पाएगी बेटियों से उनके जज्बात नहीं पूछा करते 3 क्यों बना है बेकसी […]

“बदनाम है”…

°°° चलना आया अच्छे से नहीं और सफ़र बदनाम है । डूबने वालों के दरम्यां अक्सर लहर बदनाम है । •• मौसम के अनुसार ढलने का सलीका नहीं आया , फिज़ूल में सुबह-शाम और ये दोपहर बदनाम है । •• क़सूर हमेशा दिल का ही होता है इश्क़ में मगर , क़ातिल है नहीं फिर […]

आओ चलो मतदान करें

देश प्रेम को आगे रखके हम खुद का सम्मान करें लोकतंत्र के महापर्व में आओ चलो मतदान करें गली मोहल्ले गाँव शहर में घूम घूम कर हम भाई बूढ़े और जवानों का हम सब मिलकर आह्वान करें जाति धर्म भाषा प्रांत से कुछ पल मन को दूर रखें सही बटन पर हाथ दबाये ऐसा हम […]

“ज़रूरी तो नहीं”…

°°° जज़्बातों से हरदम हारना ज़रूरी तो नहीं ? आँखों से अश्क़ें निकालना ज़रूरी तो नहीं ? •• पलकों के बंध तोड़ आना इक कमजोरी है , अश्क़ों के साथ पल गुजारना ज़रूरी तो नहीं ? •• गौर करो , अश्क़ें होते हैं मुसाफ़िर की तरह , जानबूझकर हाथ थामना ज़रूरी तो नहीं ? •• […]

“मुकरना नहीं चाहिए”…

°°° दिल तोड़के किसी का संवरना नहीं चाहिए । ज़ुबान देकर किसी को मुकरना नहीं चाहिए । •• ग़म औ खुशी का आना-जाना तो लगा रहता , बात-बात में हमेशा सुबकना नहीं चाहिए । •• बारिश-तूफ़ानों का इरादा जब ख़तरनाक है , जानबूझकर गृह से निकलना नहीं चाहिए । •• दूजों की चुगली करने में […]

सच हो सब इस समय अख़बार जरूरी तो नही

2122-1122-1122-22(112) सारे  नेता  ही  हो  मक्कार  जरूरी  तो  नही सच हो सब इस समय अख़बार जरूरी तो नही बिक गया झूठ सरे-राह यूँ बाजार में अब सच का भी कोई हो बाजार जरूरी तो नही सब  चुनावी  घुड़की  खूब  बजाएँगे अब अब सब प्रत्याशी हो दमदार जरूरी तो नही ज़िन्दगी के कई रंग देखने को […]

“माया की संसार है…”

°°° संसार का माया है या माया की संसार है ? समझना तो ज़रूरी यहाँ , लीला अपरंपार है । •• कुछ वज़ह से ये शब्द भी कभी खामोश हो जाते , तो कहीं खामोशियों को बोलने का अधिकार है । •• खुशी उधार की है या फिर उधारी में मिली खुशी ? माँगने जाओ […]

“और क्या…”

°°° ज़िंदगी का मतलब गिरना फिर सँभलना और क्या ? इस ज़हां के आग में पककर चमकना और क्या ? •• क्यों पैदा हुए यहाँ , ये भी जानना है ज़रूरी , नसीब में लिखा परवाने का जलना और क्या ? •• अंधेरे के बाद तो उजाला आता ही है , धीरज के साथ राह […]

पैग़ाम

दिल से अपने नफरतों को, मिटा कर तो देखिए। बंदिशें ये ज़माने की , फिर हटा कर तो देखिए। अपने सभी लगेंगे, चाहे राम हों या रहीम। एक बार इनको प्यार से, गले लगा कर तो देखिए।। मिलता है बहुत सुकून, ज़माने में इस तरह। मलहम किसी के जख्मों पर, लगा कर तो देखिए।। मैं […]

दर्द में आदत है मुस्कुराने की

2122 1212 22(112) वो भी करने लगे ज़िद जाने की हमको  आदत  नही  मनाने की हाल   बेहाल  ज़िंदगी  भी  थी उसने कोशिश की आज़माने की जख़्म गहरे बहुत थे ज़माने के साज़िश पूरी की आज़माने की ज़ख्म गहरे देते है ज़माने के दर्द में आदत है मुस्कुराने की आबरू  लूट  लेते  है  यों तो वो […]

“नहीं आता”…

°°° मुझे किसी के दिल पे उतरकर वापस आना नहीं आता । मुहब्बत पे यक़ीं है , मुझे किसी को सताना नहीं आता । •• किसी की तक़लीफ़ देखकर बस बरबस आँख भर जाती है , मेरे सजल-नयन को ज़रा भी अश्क़ छुपाना नहीं आता । •• दूसरों का भी नाज़ुक दिल होता , ये […]

“अच्छा बीज बोना होगा”…

°°° ज़िद कर लो अगर तो यहाँ वक़्त को भी अपना होना होगा । हर पल में मजा ले लो तो अकेले में नहीं रोना होगा । •• सुना है सबने ग़म बाँटने से कुछ दर्द कम हो जाता है , सो साझा करके ही सारा ग़म , दिल के आहों को धोना होगा । […]

“तू सीखता चल”…

°°° कोई भी परिपक्व नहीं इस ज़हां में , तू सीखता चल । इंसान है गल्तियों का पुतला , तू देखता चल । •• इक ऊँगली दूसरे पे तो चार अपनी तरफ होंगी , अपनी बुराइयों को भी गौर करके , तू झाँकता चल । •• हमेशा याद रखना “मैं” ले जाता है गर्त की […]

“फुरसत में”…

°°° क्या मकसद है ज़िंदगी का , मंथन कर जायें फुरसत में । सुंदर सोच को इकट्ठा करके मुस्कुरायें फुरसत में । •• बड़ी-बड़ी दुनियादारी की बातों से कभी दूर हों , सक़ून मिलेगा , ख़ुद को कभी बच्चा बनायें फुरसत में । •• कमाने के फेर में यूँ उलझे रहना भी ठीक नहीं , […]

“नाश है नशा”…

°°° हँसी-खुशी ज़िंदगी पे , ये नशा भारी अत्याचार है । नशे से सिर्फ़ तन ही नहीं , मन भी होता बीमार है । •• नशे की लत से नयी-नयी आफ़त है सामने आती , इसकी वज़ह हो जाता तहस-नहस हर घर-संसार है । •• होशो-हवास में रह पाना बिल्कुल मुमकिन नहीं यहाँ , नशे […]

“हुआ कि नहीं…?”

°°° हसरतों को जो मार दिया , वो क़ातिल हुआ कि नहीं ? अपने दिल से पूछ लो , क्या कुछ हासिल हुआ कि नहीं ? •• हज़ूमे-शहर परेशान बहुत इस बात को लेकर , इस दफ़ा नफ़ा की दौड़ में , वो शामिल हुआ कि नहीं ? •• हमेशा सूरत के पीछे भागना क्या […]

दिल की दौलतें

दिलों में बस गईं गर नफ़रतें हैं फ़क़त बस नाम को ही मिल्लतें हैं ( मिल्लत = मेलजोल/मिलाप ) जिहालत से जहाँ में दिक्कतें हैं बिना सर-पैर की बस किल्लतें हैं ज़रा सा जेब में पैसा जो आया कड़क आवाज़ है, ओछी लतें हैं अना में डूबकर रहता वो ऐसे ग़लत लहज़ा, बुरी सी आदतें […]