Category Archives: ग़ज़ल (संदेशात्मक)

पैग़ाम

दिल से अपने नफरतों को, मिटा कर तो देखिए। बंदिशें ये ज़माने की , फिर हटा कर तो देखिए। अपने सभी लगेंगे, चाहे राम हों या रहीम। एक बार इनको प्यार से, गले लगा कर तो देखिए।। मिलता है बहुत सुकून, ज़माने में इस तरह। मलहम किसी के जख्मों पर, लगा कर तो देखिए।। मैं […]

दर्द में आदत है मुस्कुराने की

2122 1212 22(112) वो भी करने लगे ज़िद जाने की हमको  आदत  नही  मनाने की हाल   बेहाल  ज़िंदगी  भी  थी उसने कोशिश की आज़माने की जख़्म गहरे बहुत थे ज़माने के साज़िश पूरी की आज़माने की ज़ख्म गहरे देते है ज़माने के दर्द में आदत है मुस्कुराने की आबरू  लूट  लेते  है  यों तो वो […]

“नहीं आता”…

°°° मुझे किसी के दिल पे उतरकर वापस आना नहीं आता । मुहब्बत पे यक़ीं है , मुझे किसी को सताना नहीं आता । •• किसी की तक़लीफ़ देखकर बस बरबस आँख भर जाती है , मेरे सजल-नयन को ज़रा भी अश्क़ छुपाना नहीं आता । •• दूसरों का भी नाज़ुक दिल होता , ये […]

“अच्छा बीज बोना होगा”…

°°° ज़िद कर लो अगर तो यहाँ वक़्त को भी अपना होना होगा । हर पल में मजा ले लो तो अकेले में नहीं रोना होगा । •• सुना है सबने ग़म बाँटने से कुछ दर्द कम हो जाता है , सो साझा करके ही सारा ग़म , दिल के आहों को धोना होगा । […]

“तू सीखता चल”…

°°° कोई भी परिपक्व नहीं इस ज़हां में , तू सीखता चल । इंसान है गल्तियों का पुतला , तू देखता चल । •• इक ऊँगली दूसरे पे तो चार अपनी तरफ होंगी , अपनी बुराइयों को भी गौर करके , तू झाँकता चल । •• हमेशा याद रखना “मैं” ले जाता है गर्त की […]

“फुरसत में”…

°°° क्या मकसद है ज़िंदगी का , मंथन कर जायें फुरसत में । सुंदर सोच को इकट्ठा करके मुस्कुरायें फुरसत में । •• बड़ी-बड़ी दुनियादारी की बातों से कभी दूर हों , सक़ून मिलेगा , ख़ुद को कभी बच्चा बनायें फुरसत में । •• कमाने के फेर में यूँ उलझे रहना भी ठीक नहीं , […]

“नाश है नशा”…

°°° हँसी-खुशी ज़िंदगी पे , ये नशा भारी अत्याचार है । नशे से सिर्फ़ तन ही नहीं , मन भी होता बीमार है । •• नशे की लत से नयी-नयी आफ़त है सामने आती , इसकी वज़ह हो जाता तहस-नहस हर घर-संसार है । •• होशो-हवास में रह पाना बिल्कुल मुमकिन नहीं यहाँ , नशे […]

“हुआ कि नहीं…?”

°°° हसरतों को जो मार दिया , वो क़ातिल हुआ कि नहीं ? अपने दिल से पूछ लो , क्या कुछ हासिल हुआ कि नहीं ? •• हज़ूमे-शहर परेशान बहुत इस बात को लेकर , इस दफ़ा नफ़ा की दौड़ में , वो शामिल हुआ कि नहीं ? •• हमेशा सूरत के पीछे भागना क्या […]

दिल की दौलतें

दिलों में बस गईं गर नफ़रतें हैं फ़क़त बस नाम को ही मिल्लतें हैं ( मिल्लत = मेलजोल/मिलाप ) जिहालत से जहाँ में दिक्कतें हैं बिना सर-पैर की बस किल्लतें हैं ज़रा सा जेब में पैसा जो आया कड़क आवाज़ है, ओछी लतें हैं अना में डूबकर रहता वो ऐसे ग़लत लहज़ा, बुरी सी आदतें […]

आश बाकी है अभी

ग़ज़ल चुनाव के लिए प्यास बाकी है अभी। बेसहारों को एक आश बाकी है अभी। हालात ए जिंदगी कैसे बयां हो यहाँ, चंद लम्हों सा विश्वास बाकी है अभी। जुलूस ए कामयाबी दौड़ रही है अब, इम्तहान होना पास बाकी है अभी। काँटों की चुभन कैसे दर्द देती है, भंवरों इसका एहसास बाकी है अभी। […]

“ये कैसी शरारत है…?”

°°° दुनिया में हर किसी को हर किसी से कुछ न कुछ शिकायत है । भूल जाते मगर ये ख़ुद की दूसरों पे क्या इनायत है । •• दूसरों को परेशां करके बहुत ज्यादा आता है मज़ा , आत्म-संतुष्टि के लिए सोचो ये कैसी शरारत है ? •• सच्चा प्यार चिराग़ लेकर ढूँढों तो भी […]

दिल की दौलत

दिलों में बस गईं गर नफ़रतें हैं फ़क़त बस नाम को ही मिल्लतें हैं ( मिल्लत = मेलजोल/मिलाप ) जिहालत से जहाँ में दिक्कतें हैं बिना सर-पैर की बस किल्लतें हैं ज़रा सा जेब में पैसा जो आया कड़क आवाज़ है, ओछी लतें हैं अना में डूबकर रहता वो ऐसे ग़लत लहज़ा, बुरी सी आदतें […]

“ये ज़िंदगी”…

°°° ये ज़िंदगी , ज़िंदगी है यार मेरे बेहाल मत समझना । महसूस करना दोस्त , ख़्वाहिशों का हड़ताल मत समझना । •• अहसासों का क्या है , आना- जाना तो लगा रहता है , सुलझा हुआ है ये हरदम , अनसुलझा जाल मत समझना । •• परवाह हो जब एक-दूसरे का तो क्या ख़ूब […]

“क्या हो गया है…?”

°°° आजकल हर किसी को इस ज़हान में ये क्या हो गया है ? बेवज़ह अपनी किस्मत से कुछ-कुछ फासला हो गया है । •• पर अपनी गलती को मानने को तैयार नहीं इंसां , औ मुकद्दर में कुछ नहीं सोचकर ख़ुद ख़फ़ा हो गया है । •• मेहनत से दूर भागने का इधर हर […]

मज़दूर का बेटा

दरून ए-चशम जाकर कुछ हसीं मंज़र तलाशेगा वो अपनी ज़ात का हिस्सा मेरे अंदर तलाशे गा किसी का थाम ले आँचल अगर मंज़िल की ख़ाहिश है भटकता ही फिरेगा क्या सदा रहबर तलाशेगा दुआओं से भरी होगी तुझे ख़ाली नज़र आई किसी दरवेश की झोली में क्या ख़ंजर तलाशेगा जो गुल डाली से टूटा, टूट […]

“क़दर करते जाना”…

°°° काम कुछ ऐसा हो कि गहरा असर करते जाना । वज़ूद है कुछ अलग , सभी को ख़बर करते जाना । •• ग़म और खुशी एक ही सिक्के के हैं दो पहलू , आशा की किरण के साथ बस सफ़र करते जाना । •• अपनी ख़्वाहिश के चक्कर में ज्यादा उलझना मत , अपने […]

सफ़र में लोग सभी हमसफ़र नहीं होते

++ग़ज़ल ++(1212 1122 1212 22 /112 ) सफ़र में लोग सभी हमसफ़र नहीं होते जो हमसफ़र नहीं वो हमनज़र* नहीं होते(*समान दृष्टि के ) *** किसी ने वादा किया आज वस्ल का वरना हम इतनी देर से यूँ मुंतज़र* नहीं होते (*प्रतीक्षारत ) *** गुरेज़ करता शजर गर पनाह से तो समझ कि साया-दार सभी […]

“चल सको तो चलो”…

°°° सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो । दुनिया की ये भीड़ से जो निकल सको तो चलो । •• राह में बेहिसाब मिलेंगे कंकड़ औ पत्थर , रूकावटों के बीच जो सम्हल सको तो चलो । •• ख़ुद की अकड़ से यहाँ भला नहीं होने वाला , अच्छे-अच्छे साँचे हैं […]

बातों का इंकार

लब पे जब कोई पुराना मिरे नग़मा जागा फिर नया आह-ओ-फ़ुग़ां का कोई लम्हा जागा हमको ख़ुशहाली ने बख़शी है फ़क़त आसाइश दर्द जब चीख़ा सर-ए-बज़म ज़माना जागा बेक़रारी में कटी शब ना मिला चैन कहीं जब तिरी याद का कल रात परिंदा जागा यक-ब-यक हो गया ख़ामोश वो मजमा सारा दर्द में डूबा हुआ […]

जहां की मुहब्बत

तू जब गुनाह की लज़्ज़त में डूब जाएगा कसम ख़ुदा की हलाकत में डूब जाएगा नज़र जो आने लगे झूट आईने में फिर हर एक आदमी हैरत में डूब जाएगा अगर उतार ली दस्तार आपने उस की ग़रीब शख़्स है ग़ैरत में डूब जाएगा झुकेगा सर तिरा सज्दे में बहते पानी पर तू जब ख़ुदा […]