Category Archives: ग़ज़ल (संदेशात्मक)

दलदल से निकाला जाये

इस से पहले कि मिरा नाम उछाला जाये ख़ुद को बदनामी के दलदल से निकाला जाये मैं यही रोज़ दुआ करता हूँ अपने रब से नूर-ए-हक़ का ना मिरे दिल से उजाला जाये यूं ना गुमराह कभी होगी कोई नसल नई उस के क़दमों को अगर पहले सँभाला जाये दोस्त मुख़लिस है तो बस एक […]

जय हिंद

जश्ने – आजादी मना लो मुस्करा लो ऐ वतन! है मुबारक़ दिन ये’ जिनसे उन शहीदों को नमन।। हर ख़ुशी अपनी भुला जो मुल्क पर होते फिदा। नूर है उनसे फ़लक पर ज़िन्दगी उनसे चमन।। भूलना मुमकिन नहीं उनकी शहादत को कभी। नाज़ सारे देश को है, हैं सजल सबके नयन।। माँ के आँचल की […]

खतरे में मज़हब

ग़ज़ल खतरे में मजहब है। साये में धूप,बात अजब है। देखो शहर में तमाशा गजब है। हर कोई बाँटे धर्म,जाति को, लगता अब खतरे में मजहब है। अपना अपना उल्लू सीधा करना, बस ऐसे राजनीतिक करतब है। मानवता की ज्वाला है बुझी सी, गुनहगार भी इसमें हम सब है। बूढ़े साये की कदर कहाँ पर, […]

फैसले जिनके कड़े हैं आजकल

ग़ज़ल फैसले जिनके कड़े हैं आजकल, उनके ही झंडे गड़े हैं आजकल। शीश महलों में कहाँ रहता कोई, अब कहाँ हीरे जड़े हैं आजकल। कलतलक रहते थे जो मसनदनशीं, वो ज़मीं पर गिर पड़े हैं आजकल। आग नफ़रत की लगाने के लिए, लोग कितने ही अड़े हैं आजकल। बाग़ के क़ातिल बनेंगे एक दिन, पेड़ […]

छप्पर का डर

किसी के हाथ के पत्थर का डर नहीं होता जो इस तरह मिरा शीशे का घर नहीं होता ग़मों का बोझ अगर क़लब पर नहीं होता मैं बेक़रार कभी इस क़दर नहीं होता फ़िज़ा में उड़ती ना चिनगारियां जो नफ़रत की तो मुझको सहन के छप्पर का डर नहीं होता फ़िज़ा उड़ता परिंदा फ़लक को […]

“शिकायत भी नहीं होती”…

°°° 1222 1222 1222 1222 दिल्लगी हो अगर , दिल से शरारत भी नहीं होती । अजब है इश्क़ भी , सबसे मुहब्बत भी नहीं होती । •• न जाने कौन कब-किधर बुरा महसूस कर जाए ? कहें हर जगह सब सच , ठीक आदत भी नहीं होती । •• सभी रिश्ता मधुर बनकर दिलों […]

इक बूंद पानी

मुक़द्दर आज़मा कर क्या करें हम बना कर रेत पर घर क्या करें हम लबों को चाहिये इक बूँद पानी समुन्दर का समुन्दर क्या करें हम नया ये दौर मोबाइल का आया उसे अब ख़त ही लिख कर क्या करें हम सताए याद हर मौसम में तेरी मई हो या दिसंबर क्या करें हम मिला […]

ज़िंदगी पे यकीन

झूटे फ़रेबी लोग सियासी यक़ीन क्या करता है तू भी बात पे इनकी यक़ीन क्या कब मौत आके अपनी ले आग़ोश में हमें पल-भर की ज़िंदगानी है साथी यक़ीन क्या ख़लक़त ना एतबार करे जिसकी बात पर हर एक बात उसकी है झूटी यक़ीन क्या ख़ाकी बदन पे नाज़ *का मतलब है कजरवी मिट्टी से […]

संभल कर चलो

ग़ज़ल चाहत के रस्ते को बदल कर चलो! हर पीड़ा को अपना समझ कर चलो! मानवता जिंदा है अभी भी मनुज, कठोरता के साथ थोड़ा पिघल कर चलो! तमाशा जग में हर कोई देखता है, तमाशबीन भीड़ से निकल कर चलो! चमकता सितारा बनो आसमां में, रोशनी सा यहाँ बिखर कर चलो! वजह भी बनो […]

आसमाँ से झाँक कर रोता ख़ुदा भी ज़ार ज़ार

++एक बे-रदीफ़ ग़ज़ल ++(2122 2122 2122 212 /2121 ) आसमाँ से झाँक कर रोता ख़ुदा भी ज़ार ज़ार टूटता देखा दिलों के दरमियाँ जब जब है प्यार *** फ़ासलों की जब कभी दीवार की तामीर हो किर्चियों में हैं बिखरते क़ौल क़समें और क़रार *** प्यार के गुलशन के होंगे हाल क्या मत पूछिए दस्तकें […]

क़त्ल-ए-उल्फ़त के सभी इल्ज़ाम सर पर ले गया

++ग़ज़ल++(2122 2122 2122 212 ) क़त्ल-ए-उल्फ़त के सभी इल्ज़ाम सर पर ले गया | वो भरोसे की मगर मैयत उठाकर ले गया | *** मंज़िलें कैसे मिलेगी अब किसी नादान को रहगुज़र की चाबियाँ जब सारी रहबर ले गया | *** क्या ज़रूरी है कोई दुश्मन करे मुझको हलाल यार भी तो एक कल खंज़र […]

प्यार की रहगुज़र पर चलोगे अगर तो मज़ा आएगा

++ग़ज़ल++(212 212 212 212 212 212 212 212 ) ऐ मेरे हमसफ़र प्यार की रहगुज़र पर चलोगे अगर तो मज़ा आएगा रास्ता पुरख़तर और मुश्किल मगर जीत के देखो डर तो मज़ा आएगा *** आप अपने ही दिल का कहा मानिये लोग क्या कह रहे गौर मत कीजिये आपकी शर्त पर तय करें आप गर […]

गरीब अब तलक मज़लूम ,बेतहाशा है

गरीब अब तलक मज़लूम ,बेतहाशा है इस मुल्क में होता रोज़ यही तमाशा है चिराग सो गया अँधेरे में दुबकके कहीं हर ओर फैला हुआ घनघोर निराशा है सब-के-सब सफेदपोश हो गए बेपर्दा हर अखबार में हो रहा यही खुलासा है कल फिर पूर्णिमा की चाँद आ जाएगी इस रात को इतना भी नहीं दिलासा […]

“विश्वास नहीं होता”…

°°° इस ज़हां में हर कोई हर किसी का ख़ास नहीं होता । किसपे कर लें भरोसा , किसी पर विश्वास नहीं होता । •• कोई हुनरमंद पढ़ता , कोरे काग़ज़ को आसानी से , कोई पूरी किताब पढ़ भी ले , अहसास नहीं होता । •• कोई परवाह करता है तो उसका ज़रा क़दर […]

ग़ज़ल -सच की दीवार पर, ताला लगा दो यारो! !

ग़ज़ल सच की दीवार पर, ताला लगा दो यारो! ये जलते हुए सारे, चिराग बुझा दो यारो ! हम आशिक नहीं गुलशन के कहीं ओर चलो, इस पथ पर आज, कांटे बिछा दो यारो! बहुत रहम कमाया, सच में पनाह करके, अब झूठ पर, पर्दे गिरा दो यारो! हर वक्त होता आया है, इंसानियत का […]

“बाकी है”…

°°° 1222 1222 1222 1222 अभी तो इन नज़ारों में खुशी की किरण बाकी है । सुनो तो यार , मौज़ों की कहानी , अमन बाकी है । •• न हो ख़ामोश कुछ बीते हुए गुमसुम पलों से तुम , ज़रा रूको इधर , सच में सुखों का मिलन बाकी है । •• ग़मों का […]

खोल दिए आज सारे राज़ मैंने दिल के

खोल दिए आज सारे राज़ मैंने दिल के नींद से लड़ के और ख़्वाबों में चल के आज जब अपनी बेटी हुई क़त्ल तब गुनहगार रोया अपने गुनाहों से मिल के ज़माने ने बना दी है कुछ रीत ही ऐसी बच्चियाँ घरों में रहती है ज़ुबानें सिल के दौलत जब से गया रिश्तों के सिरहाने […]

शर्म की दहलीज वो पार कर गया

शर्म की दहलीज वो पार कर गया जीते हुए घर को दूकान कर गया बूढ़े बरगद की टहनियां काट कर चिड़ियों को लहू-लुहान कर गया कुछ आवाज़ें आयी, तलवारें उठी भ्रम शहर को श्मसान कर गया एक गलत निगाह व गिरी हरकत मासूम बच्ची को बेज़ुबाँ कर गया खून की होली की चाहत की थी […]

गुफ्तार मे लज़्ज़त

आती ना कभी मिस्र के बाज़ार में लज़्ज़त यूसुफ़ से ही दर आई ख़रीदार में लज़्ज़त दुश्मन ने बड़े प्यार से फिर मुझसे कहा है आएगी तिरे ख़ून से तलवार में लज़्ज़त इन्सान का किरदार भी इंसां सा नहीं अब लहजे में सदाक़त है ना गुफ़तार में लज़्ज़त लम्हों में गुज़र जाती है सदियों की […]

तमन्ना भी है यक़ीन भी है वतन में उल्फ़त का नूर होगा

++ग़ज़ल++(12122 12122 12122 12122 ) तमन्ना भी है यक़ीन भी है वतन में उल्फ़त का नूर होगा न दहशतें हों न नफ़रतें हों कभी तो ऐसा ज़रूर होगा *** सियासतें लाख दम लगा लें अवाम में फ़ूट डालने की हमारी कोशिश के आगे इक दिन ये चूर लेकिन ग़ुरूर होगा *** मगर है मुमकिन कि […]