Category Archives: ग़ज़ल (संदेशात्मक)

“चल सको तो चलो”…

°°° सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो । दुनिया की ये भीड़ से जो निकल सको तो चलो । •• राह में बेहिसाब मिलेंगे कंकड़ औ पत्थर , रूकावटों के बीच जो सम्हल सको तो चलो । •• ख़ुद की अकड़ से यहाँ भला नहीं होने वाला , अच्छे-अच्छे साँचे हैं […]

बातों का इंकार

लब पे जब कोई पुराना मिरे नग़मा जागा फिर नया आह-ओ-फ़ुग़ां का कोई लम्हा जागा हमको ख़ुशहाली ने बख़शी है फ़क़त आसाइश दर्द जब चीख़ा सर-ए-बज़म ज़माना जागा बेक़रारी में कटी शब ना मिला चैन कहीं जब तिरी याद का कल रात परिंदा जागा यक-ब-यक हो गया ख़ामोश वो मजमा सारा दर्द में डूबा हुआ […]

जहां की मुहब्बत

तू जब गुनाह की लज़्ज़त में डूब जाएगा कसम ख़ुदा की हलाकत में डूब जाएगा नज़र जो आने लगे झूट आईने में फिर हर एक आदमी हैरत में डूब जाएगा अगर उतार ली दस्तार आपने उस की ग़रीब शख़्स है ग़ैरत में डूब जाएगा झुकेगा सर तिरा सज्दे में बहते पानी पर तू जब ख़ुदा […]

चिराग़ तीरगी से ऊलझा

हर जगह हर किसी से उलझा है आदमी आदमी से उलझा है हौसला तो चिराग़ का देखो किस क़दर तीरगी से उलझा है ख़ुद ही दरिया वो रह गया प्यासा जो मिरी तिश्नगी से उलझा है इब्न-ए-आदम तो असर-ए-हाज़िर का अपनी ही बेखुदी से उलझा है तल्ख़ लहजा तुम्हारी बातों का मेरी शाइस्तगी से उलझा […]

दहेकते रास्ते

हमारी अक़्ल पर ताले पड़े हैं खन्डर है ज़हन और जाले पड़े हैं बज़ाहिर साफ़ आते हैं नज़र दिल मगर अंदर से तो काले पड़े हैं ये पहला तो नहीं है आस्तीं में बहुत से साँप हम पाले पड़े हैं मयस्सर कैसे हो दो वक़्त रोटी कि जब इक वक़्त के लाले पड़े हैं करें […]

गुलज़ार है आतिश

लगी है जिससे कारी ज़र्ब वो पत्थर सलामत है जो तुमने पीठ पर मारा था वो ख़ंजर सलामत है तास्सुब और हसद के बेशतर शोले उठे लेकिन ख़ुदा का शुक्र है बस्ती में मेरा घर सलामत है परेशां हो नहीं सकता कभी वो शख़्स दुनिया में ख़ुदा-ए-पाक का जिसके भी दिल में डर सलामत है […]

कुफ़्फ़ार के लश्कर

हों जो हक़ पर तो बहत्तर नहीं देखे जाते रन में कुफ़्फ़ार के लश्कर नहीं देखे जाते हम हुसैनी हैं कटा देंगे सरों को हमसे दर पे बातिल के झुके सर नहीं देखे जाते अज़्म ए कामिल है तो मंज़िल की तरफ़ बढ़ते रहो फिर निशाँ पांव के मुड़ कर नहीं देखे जाते ये बग़ावत […]

दरवेश की झोली

अपनी फ़ित्रत में दग़ा जिसने बसा रखी है तुमने उम्मीद-ए-वफ़ा उस से लगा रखी है चूड़ियां तोड़ दी सिंदूर मिटाया जिनका उनकी मासूम हथेली पे हिना रखी है ख़ौफ़ इन बुझते चराग़ों से उसे हो कैसे जिसने सूरज से कभी आँख मिला रखी है भीक तालाब से वो मांगे ये मुम्किन ही नहीं जिसने ख़ुद […]

“पिता”… जीवन का आधार…

°°° रिश्ता अनमोल है , पिता जीवन का आधार है । दिखता नहीं मगर पिता में छुपा अनंत प्यार है । •• सभी रिश्तों की परवाह रहता है जिसे हरदम , सारे घर की जान , पिता संपूर्ण परिवार है । •• बाहर से कठोर मगर अंदर से बेहद कोमल , अनुशासन है मगर स्नेह […]

औरत खामोश रही होगी

दिल की ही सुनी होगी दिल से ही कही होगी| वो आँख न वैचारी बे वजह बही होगी| ++ दौलत में हुनर कब था इन्सान बनाने का, दीवार अदावत की उल्फत से ढही होगी| ++ रूकती न हिचकियों का इल्जाम किसे मैं दूँ, तोड़ा था ये दिल मेरा दावे से वही होगी| ++ हँसकर जो […]

किताबें

***************************** सबक ज़िन्दगी का सिखाती किताबें हमें नेक रस्ता दिखाती किताबें सफ़र ज़िन्दगी का बड़ा बेरहम है हमें बद्हवा से बचाती किताबें दिमाग़ों की सारी थकन के मुक़ाबिल हमें छेड़ती गुदगुदाती किताबें कोई फूल अपने वरक़ से गिराकर हमें याद-ए-दिलबर दिलाती किताबें मिरी राह के ‘दीप’ सब जल उठे हों अँधेरे में यूँ जगमगाती किताबें […]

हिज्र की कश्ती

हिम्मत जो दिल तक पहूँची थी आख़िर मन्ज़िल तक पहूँची थी उस के पीछे भाग रहा हूँ दस्तक जो दिल तक पहूँची थी देख के उस मासूम के छाले हिम्मत बुज़दिल तक पहूँची थी मेरा पीछा करते करते मुश्किल मंज़िल तक पहूँची थी धीरे धीरे हिज्र की कशती वस्ल के साहिल तक पहूँची थी आहों […]

जवानी का ज़ोर

कब तक करेगा ज़ुल्म जवानी के ज़ोर पर झूटी दलील झूटी कहानी के ज़ोर पर मुट्ठी में क़ैद कर नहीं सकता कोई उसे चलता किसी का ज़ोर ना पानी के ज़ोर तन्हा हुई तो चंद ही लम्हों में ढह गई दीवार-जो नई थी पुरानी के ज़ोर पर साबित मुझे वो कर गया किज़्ज़ाब बज़्म में […]

, जुगनू की औकात नहीं है।

                  ग़ज़ल दर्द दिलों में लेकर हँसना, सबके बस की बात नहीं है । सूरज की भरपाई कर दे, जुगनू की औक़ात नहीं है। भेड़ बकरियों के जैसे तुम, भाग रहे हो इधर-उधर क्यूँ, इंसां हो तो रखो हौसला, तेजाबी बरसात नहीं है। अगर नहीं है दिन […]

दो दिन बचे हुए हैं अभी भी बहार के।

                 गजल  मत रोइए हुज़ूर शब-ए-ग़म गुज़ार के, दो दिन बचे हुए हैं अभी भी बहार के। दरिया जो एक रूठा समंदर है सामने , मत हौसला गँवाना मुहब्बत में हार के। तू इस क़दर बढ़ा दे मुहब्बत की ये कशिश, रख दे वो चाँदनी तेरी छत पर […]

बात जबसे मैं कहने लगा था खरी

ले रही ये अजब इम्तिहाँ मुफ़लिसी l भूख जितनी दबाई, ये उतनी बढ़ी ll ज़िन्दगी आ गई इक अजब मोड़ पर, अब मुक़द्दर मेरा तिश्नगी-तिश्नगी l सिर्फ इतना वसीयत में उसने लिखा, जान भी आपकी, रूह भी आपकी l बाँट देंगे भला कैसे धरती-गगन, हो गया क्या खुदा से बड़ा आदमी l ख़ुद-ब-ख़ुद हो गईं […]

रौशन कर गया

लगा है आज फिर दिल-ए-पर तुम्हारी याद का पत्थर बिगाड़ेगा मगर क्या अब दिल-ए-बर्बाद का पत्थर परिंदा चुनते चुनते हो गया ज़ख़मी अचानक क्यों पस-ए-दीवार से आया किसी सय्याद का पत्थर? सितम-गर याद रखना तू तुझे बर्बाद कर देगा लगा तुझको अगर मज़लूम की फ़र्याद का पत्थर बिखरता जा रहा हूँ मैं ख़ुद अपनी ज़ात […]

उम्र दर उम्र यूं रह – नुमाई करो

गजल उम्र दर उम्र यूं रह – नुमाई करो | उम्र दर उम्र से आशनाई करो | उम्र दर उम्र का तकाजा रहा | उम्र दर उम्र तुम बे – वफाई करो | उम्र दर उम्र गर इश्क़ होता रहे | उम्र दर उम्र बस ‘ दिलरुबाई करो | उम्र दर उम्र आला ‘ खुदा […]

इंसानियत का सवाल

ग़ज़ल इंसानियत का सवाल पैदा किया जाए! सड़क पर आकर बवाल पैदा किया जाए! क्या सही है इस तरह हंगामा खड़ा करना, इसके प्रति दिल में ख्याल पैदा किया जाए! बस एक हाथ के पीछे लाखों हाथ उठे हों, कुछ इस तरह का हाल पैदा किया जाए! तीर नहीं तो बस तुक्का ही सही यारो, […]

दलदल से निकाला जाये

इस से पहले कि मिरा नाम उछाला जाये ख़ुद को बदनामी के दलदल से निकाला जाये मैं यही रोज़ दुआ करता हूँ अपने रब से नूर-ए-हक़ का ना मिरे दिल से उजाला जाये यूं ना गुमराह कभी होगी कोई नसल नई उस के क़दमों को अगर पहले सँभाला जाये दोस्त मुख़लिस है तो बस एक […]