Category Archives: सत्य कथा-आँखों देखी-कानों सुनी

गूंगी की चीखें

एक सच्ची लघुकथा गूंगी की चीखें _________ घर के कामो में इतना व्यस्त हो गयी थी , कि अपनो से मिलना मिलाना भी नहीं हो पा रहा था। मन एक जगह रहते रहते बिल्कुल ऊब चुका था। सो अपनी ननद से मिलने उसके घर जा पहूंची। मुझे देख ननद काफी खुश हुई ,पर साथ में […]

कुछ गाने सच में कमाल कर जाते हैं।

शुक्रवार की शाम जब ऑफिस खत्म होता है तो बचपन के स्कूल की छुट्टी याद आ जाती है। बस जल्दी घर भाग जाएँ। पर दिल्ली की ट्रैफिक भी कहाँ मानती है। आई टी ओ से लेकर काश्मीरी गेट तक ट्रैफिक गजगामिनी की तरह ठहर-ठहर के चल रही थी। मैं श्रीमतीजी के साथ कार में बैठा […]

बहू और बेटी

अरे भाभी !! तुमने अचानक रोहित की शादी कैसे तय कर दी ? करुणा ,, क्या बताऊं तुम्हें …..तुम्हें तो पता ही है यह मुई स्लिप डिस्क वाली प्रॉब्लम…. यह मुझे जीने ही नहीं देती है , अब तो डॉक्टर ने साफ मना कर दिया है कि कोई काम नहीं करना है…. सिर्फ बैड रेस्ट […]

मेरी कलकत्ता यात्रा

हर तरफ विशाल अटटीकाएँ जो आकाश को झूमती हुई मालूम होती थी । पग-पग पर बड़े-बड़े मॉल व मनोरंजन स्थलों की भरमार । हर ओर बेहतरीन सड़के,जिनको बनाने में सरकार को तो व्यय करना ही पड़ा होगा, मगर उसकी सफाई की जिम्मेदारी को वहां के लोगों ने ही निभाया होगा । साफ-सुथरी सड़कें सांप की […]

पहली शरारत

*मेरी पहली शरारत* पहले शरारत वो भी पहली ? वो तो याद नहीं। पर,,,,,एक शरारत याद आ रही । उसे बताता हूँ। लगभग सन 70 की बात है , भारत पाकिस्तान के बीच संबंधों में कडुवाहट बढ़ चुकी थी, बंगला देश पार्टी के उदय उपरांत लोक तंत्र से विजित शेख मुजीब को पश्चिमी पाकिस्तान में […]

यादों के पृष्ठ

यादों के पृष्ठ……….एक संस्मरण…… दस पटाख़े! पिछले महीने की ही बात है मेरी खास मित्र के होमटाउन जाने का हमारा 10 जनों का प्रोग्राम बना और करीब एक माह पहले हमारी वॉल्वो बस की टिकटें भी बुक हो गई।सभी बहुत उत्साहित थे।व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाया गया और नाम दिया गया “कांडी”।हररोज़ हमारे उस ग्रुप पर […]

मानसिकता

मानसिकता समझ समझ का फेर…… जिस प्रकार दीया प्रज्वलित करने के उपरांत किसी से प्रकाश उधार माँगने की आवश्यकता नहीं होती, हर तरफ उजाला फ़ैल जाता है।ठीक वैसे ही कुंठित-लुंठित विचारों की मानसिकता का भी सामने वाले के मुँह खोलते ही पता चल जाता है। चम्पा ऐसी ही मानसिकता का उदाहरण है।सबसे हँस कर बोलना, […]

काश!! तुम समझ पाते…….

सादर प्रेषित मेरी अदृश्य डायरी से एक पृष्ठ……. काश! तुम समझ पाते मेरे दिल के हालात् ! कैसे कहूँ? शब्द निशब्द हुए जाते हैं………………कहने को……………… ॥ काश!!!तुम समझ पाते कि जब चुना था तुम्हें, तो अटूट विश्वास था तुमपे, हालांकि सामने होते हुए भी घबराहट और सकुचाहट की वजह से चेहरा नहीं देख पाई थी […]

घुसपैठिया

शाम के 6/7 के करीब का वक्त,मैं बेड पर बैठी थी,टी वी चल रहा था,घर मे कोई नही था उस वक्त।अचानक भान हुआ, कोई लॉबी में है और कमरे में झांका,,,, मैंने जाकर देखा ,शायद गेट खुला छोड़ भूल गई हूँ मैं,,,कही कोई नही,,।अपने बालों को समेटने लगी ,,,लगता है बालों की लटे आंखों पर […]

परा शक्तियाँ

करीब एक साल पहले पड़ोस के शर्मा जी का बेटा समीर ,जो करीब 40 साल का था साइलेंट हार्ट अटैक से गुजर गया । रीतिरिवाज के अनुसार तीसरे दिन उनके एकलौते पुत्र को अस्थि विसर्जित करने हरिद्वार जाना था । हमारे यहाँ प्रायः सभी वर्णो में रिवाज है कि मृत व्यक्ति के छोटे भाई ,भतीजे […]

—-वो शराबी—

—-वो शराबी— गाड़ी में तीन सीट वाली जगह पर चारों लड़कियाँ बैठ गई थीं। मैं ड्राईवर के साथ वाली सीट पर आगे बैठ गया था। विवाह समारोह से लौटते वक्त रात के ग्यारह बज चुके थे। हर तरफ अँधकार का साम्राज्य। ड्राईवर रास्ता भटक गया और एक अंजान वीरान सड़क का रास्ता….। थोड़ी ही देर […]

पहला दिन पाठ शाला का

*पाठ शाला में पहला दिन* पाठशाला जाने का डर, दहशत शिक्षक के हाथ छड़ी, कड़ा अनुसाशन और एक निश्चित अवधि तक परिवार से दुर अनजानों के मध्य ,शायद यही सोच ,बच्चो को शाला डरावने लगते होंगे । आज मैं अपनी बड़ी बेटी पूर्वी को जो 4 जुलाई 96 को ठीक 3 साल की हुयी 15 […]

दोहरा व्यक्तित्व

कल एक पार्टी में अचानक मेरी मुलाकात मिसेज खन्ना से हुई । आकर्षक और प्रभावशाली व्यक्तित्व की स्वामिनी ,अपने चेहरे पर शिष्ट सी मुस्कान ओढ़े पार्टी में लोगों के बीच आकर्षण का मुद्दा बनी हुई काफी खुश नजर आ रही थी । अपने पति को बिजनेस में मदद करती हुई यकीनन वो एक सफल महिला […]

स्वयंसिद्धा

आज थोड़ा सा हट कर….एक सत्य कथा.. स्वयंसिद्धा……. सुबह सबेरे डॉ के क्लीनिक में गये स्वास्थ्य की जाँच करवाने हेतु मेरी बेटी की उम्र की एक लड़की वहाँ झाडू पोछा का काम कर रही थी डा.साहब के आने में थोड़ा समय बाकी था सो उस बच्ची से उत्सुकता वश वार्तालाप शुरू किया.. . मैने पूछा […]

ईद

एक सच्ची लघुकथा………… आज ईद हैं.. मेरा मन भी सेवई खाने का हुआ मैं अपने पति से बोली…मुझे दूध चीनी और सेवई ला दो, आज ईद हैं मेरा मन भी सेवई खाने का कर रहा हैं, पति बोले अभी अच्छे दिन नही आये हैं, हम आम आदमी को आज प्याज रोटी खाना मुश्किल हो रहा […]