Category Archives: मेरी गृहस्थी ,कलम ,डायरी, मैं

एक क्रंदन जो चाहकर भी नहीं तोड़ पाता परिणय सूत्र बंधन।

एक क्रंदन जो चाहकर भी नहीं तोड़ पाता परिणय सूत्र बंधन। सुनो, कोशिश तो बहुत की, इक तरफ़ा प्यार में, जीवन के कोरे कागज़ पर प्रेम रंग से पुष्प खिलाने की। परिणय सूत्र में बंधकर भी जो न हो सका मेरा उसको अपना बनाने की। कभी चुप रहकर कभी हंसकर खुद को बहलाने की। पर […]

**सहयात्री किताब और यात्रा**

यात्रा के समय किताबों का साथ शायद अब एक याद हीं बन कर रह जायेगी ।वैसे तो अब भी कुछ लोग यात्रा शुरू करने के ठीक पहले स्टेशन पर के किताब की दुकान से पत्रिका व कहानी की किताब या उपन्यास खरीद लेते हैं।पन्नों पर लिखे अक्षरों को पढ़ने की वैसी चाहत और लगन अब […]