Category Archives: कविता

छिप छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों

छिप छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुआ आँख का पानी और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नींद जवानी गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों कुछ पानी के बह जाने से, सावन […]

मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ तुम शहज़ादी रूप नगर की

महाकवि श्री गोपालदास नीरज की कविता मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ तुम शहज़ादी रूप नगर की हो भी गया प्यार हम में तो बोलो मिलन कहाँ पर होगा मीलों जहाँ न पता खुशी का मैं उस आँगन का इकलौता तुम उस घर की कली जहाँ नित होंठ करें गीतों का न्योता मेरी उमर अमावस काली […]

अब बुलाऊँ भी तुम्हें तो तुम न आना

महाकवि श्री गोपालदास नीरज की कविता अब बुलाऊँ भी तुम्हें तो तुम न आना टूट जाए शीघ्र जिससे आस मेरी छूट जाए शीघ्र जिससे साँस मेरी इसलिए यदि तुम कभी आओ इधर तो द्वार तक आकर हमारे लौट जाना अब बुलाऊँ भी तुम्हें तो तुम न आना देख लूं मैं भी कि तुम कितने निठुर […]