(002-D) कलमकार पाठक कैसे-क्या लिखें ,बनें ?

  • 1. कलमकार पाठक कैसे-क्या लिखें ,बनें ?
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  • 1. (D-06) ब्लॉग- मेरी नज़र से
     
           *मेरी नज़र से*
    आप नवयुवक है ,बुजुर्ग या अधेड़ उम्र के ,
    स्टूडेंट ,व्यापारी हैं ,नौकरी पेशा , रिटायर्ड पुरुष या गृहिणी।
    आपके हाथ में अखबार है और अचानक आप कोई खबर पढ़ कर मन ही मन बुदबुदा उठते हैं।
    और कभी कभी टेलिविज़न देख या कहीं सुनकर या कभी खुद से ही कोई खयाल अथवा
     आपका नज़रिया या आपका दिल जो कहता है कि यह जो हो रहा इससे अलग होना चाहिए
    जिसकी वाज़िब वजह भी आपके पास है
     चाहे वह फिर
     देश हित की बात हो
    समाज हित या नागरिक ,
    शिक्षा व्यवस्था या अंधविश्वास ,
    महिलाओं से सम्बंधित
    या बुजुर्गों की परेशानियाँ ,
     बच्चों के बचपन पर उम्मीदों का बोझ
    या बच्चों की जवानी के जोश में पिसते, दबते माँ बाप ,
    गरीबों की गरीबी ,
    पर्यावरण या खानपान
    इत्यादि
    जो भी कुछ आप कहना चाहते हैं ,सोचते हैं, देखते हैं ,पर कहाँ कहें ,कैसे कहें , और एक से कहें ,दो से कहें या तीन से ,हर बार वही बात उतने ही शब्द बिल्कुल उसी तरीके से कहने में उतना ही वक्त लगाएं , कोई
    सुनना पसन्द करेगा और कोई नही , तो अब
    यहाँ लिखिए ,
    कहिए लिख कर अपनी आवाज़ को शब्दों में ,
    अब लिखिए सिर्फ़ एक बार और *एक बटन के क्लिक से शेयर कीजिए 10 के साथ या 100 के साथ* और अपने विचारों को  और साथ मे अपनी पोस्ट को पढ़ने दीजिए काग़ज़दिल के पाठकों को भी ।
    पर इस अंदाज में कहें कि आपकी बात सामाजिक हो और पढ़ने वाला असहमत इंसान भी आपकी बात से एक बार को सहमत हो जाए कि आपकी बात सही है और तर्क भी ।
    *आपके लिखने का अंदाज़ भी बोर करने वाला ना हो तभी कोई पूरा पढ़ेगा ,* और शब्दों के चयन का भी ख्याल रखें , एक ही बात को बार बार लिखने से बचें और ना ही विषय को लम्बा खीचें ।
    कुछ इस तरह कहें कि  *पढ़ने वाले की उम्मीद से पहले आपकी बात ख़त्म हो जाए* और आपकी बात का सार भी आप रखने में कामयाब हो जाएं।
    बहुत सोचा की यह कहें आप , पर बस अपने घर के सदस्यों को सुना कर चुप रह गए या बाहर कॉलोनी या ऑफिस के एक दो लोगों से कभी विषय विशेष पर बात चलने पर कहा हो ।
    अब  लिखिए और कीजिए शेयर जिसे भी चाहें ,बताएं अपने विचार
    बाकी जो पाठक आपको पढ़ेंगे वो आपके लगातार अच्छा लिखने पर आपके पाठक ही बन जाएंगे और आप लिखते लिखते एक दिशा , किसी विषय विशेष की एक आवाज ही बन जाएं या किसी को आपके लिखे में अपने लिए राह मिल जाए
    पर
    *आपको ऊपर के अलावा नीचे विशेष नोट में लिखी कुछ बातों का विशेष ख्याल रखना है*
    *विशेष नोट*
    *01-*
    आपके लिखे में में कुछ भी अति आपत्तिजनक ( *अश्लील ,हिंसात्मक ,राजनीतिक ,जातिगत ,किसी धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला या अपमानजनक आदि एक पंक्ति/लाइन तक नहीं होनी चाहिये )*
     *लिखा होने पर बिना किसी सूचना के आपको ब्लॉग पोर्टल से ब्लॉक कर संगठन से सदस्यता निरस्त कर दी जाएगी ।*
    *02-*
    आप हिंदी अथवा हिंदी उर्दू में  अधिकतम 500 शब्दों तक लिख सकते हैं ।
    मात्राओं एवं शब्दों का विशेष ध्यान रखें।
    *03-*
    पोस्ट के ऊपर भाव ,विषय आधारित  शीर्षक अवश्य दें।
    *04-*
    आपका लिखा मौलिक, आपका खुद का लिखा ही होना चाहिए ।
    *05-* आपकी रचना में अत्यधिक मात्राओं एवं शब्दों की अशुद्धियाँ पाए जाने पर पोस्ट पोर्टल से हटा दी जाएगी ।
    *06*
    गुणवत्ता के एक मानक/स्तर से नीचे होने पर आपकी पोस्ट मंजूर नही की जायेगी।
    ****************************
    सबसे ऊपर पहले न० पर लिखे
    *(D-01)* *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
    *****************************
         CONTENT/PATTERN Subject to *Registered* Copyright Kaagaz Dil ,Under
     *INDIAN Copyright ACT*
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  • 2. ( D -07 ) 4 लाइन की बात है
     
        *4 लाइन की बात है*
    4 लाइन की बात है पर अर्थ उनका 40 या कभी कभी 400 लाइन जैसा हो ,कभी उसमें उतने ही प्यार की गहराई घुली हो तो कभी जिंदगी के तजुर्बे ,सिद्धांत और सीख ,तो कभी आईना दिखाती बातें ,
    नाम या गिनती ही तो 4 लाइन है ,पर  आप लिखेंगे ही उन्हें इस अंदाज में की हर शब्द में एक ठहराव हो , बस कुछ बातें जो इन 4 लाइन को कागज़ पर उतारते वक्त खयाल रखनी हैं उन्हें जान लेते हैं ।
    ★ कुल पंक्ति/लाइन 4 से अधिक एक शब्द भी नहीं होना चाहिये ।
    ★ कुल लाइन 04 ही होनी चाहिए ,04 से कम हरगिज़ ना हो ,और पंक्ति खुद में पूरी हो ।
    ★ एक पंक्ति में शब्द कितने भी हो सकते हैं पर एक पंक्ति में 03 से कम शब्द नहीं होने चाहिए।
     (विशेष जरूरत पर ही 02 शब्द हो सकते हैं )
    ★ सारी लाइन्स/पंक्तियों को मिलाकर कुल शब्दों की संख्या 48 से अधिक ना हो ।
    ★  लिखे को कम से कम 02 शब्दों का शीर्षक देना अनिवार्य है , जिसे आप अलग से पोस्ट के ऊपर दिए गए ऑप्शन शीर्षक में पोस्ट करेंगे ।
    ★ *यह अनिवार्य नही है आपके लिए लेकिन अगर प्रयास करने पर* पंक्ति के आखिरी शब्द या शब्द का वर्ण या मात्रा ,तुकांत इत्यादि किन्हीं भी 02 ,03 या सभी लाइन्स में मिलते हैं तब आपकी बात कहने का तरीका और भी सुंदर और प्रभावी लगेगा ।
    उदाहरण के लिए आप रचनाकारों की रचनाओं में  मुक्तक , .कता/ रूबाई  पढ़ सकते हैं और वहीं उनकी पोस्ट पर उनकी हौसला अफजाई  करते हुए ,04 या 02 लाइन में उनके लिखे पर ही अपने शब्दों को लिख कर  , अपनी प्रैक्टिस / अभ्यास भी कर सकते हैं ।
    ★ यदि तुकांत ना भी मिलें ,तो आप साधारण तरीके से भी 04 लाइन / पंक्ति लिख सकते हैं ,जिनमें कोई प्रभावशाली ,सुंदर ,सार्थक संदेश देती बात कही जाए।
    *विशेष नोट*
    *01-*
    आपके लिखे में कुछ भी अति आपत्तिजनक ( *अश्लील ,हिंसात्मक ,राजनीतिक ,जातिगत ,किसी धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला या अपमानजनक आदि एक पंक्ति/लाइन तक नहीं होनी चाहिये )*
     *लिखा होने पर बिना किसी सूचना के आपको ब्लॉग पोर्टल से ब्लॉक कर संगठन से सदस्यता निरस्त कर दी जाएगी ।*
    *02-*
    आप हिंदी अथवा हिंदी-उर्दू में ही लिख सकते हैं ।
    मात्राओं एवं शब्दों का विशेष ध्यान रखें।
    *03-*
     भाव ,विषय आधारित शीर्षक /  जरूर  लिखें ।
    *04-* आपकी रचना में अत्यधिक मात्राओं एवं शब्दों की अशुद्धियाँ पाए जाने पर पोस्ट पोर्टल से हटा दी जाएगी ।
    *05*
    गुणवत्ता के एक मानक/स्तर से नीचे होने पर आपकी पोस्ट मंजूर नही की जायेगी।
    ****************************
    सबसे ऊपर पहले न०. पर लिखे
    *(D-01)* *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
    *****************************
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  • 3. (D-01) कलमकार के लिखने के लिए क्या करें, श्रेणी , नियम अन्य जानकारी
     
      कलमकार पाठक के माध्यम से काग़ज़ दिल का प्रयास उन पाठकों ,व्यक्तियों को मौका देना है जिन्होंने लिखने की शुरुआत नहीं की ,यहाँ तक कि फेसबुक पर भी लिख कर पोस्ट नहीं करते , दूसरों के लिखे को पढ़ते जरूर हैं *या फिर* खुद के साथ , अपनी कोई डायरी है जहाँ दिल की  बात कह या लिख लेते हैं ,
    *कुछ ऐसे होंगे जो लिख सकते हैं पर समयाभाव  या उपयुक्त मंच ना मिलने पर नहीं लिख पाते*,
    *कुछ झिझक से नही लिखते और कुछ लिखना तो बहुत कुछ चाहते हैं पर बस दूसरों की रचनाओं को पढ़ कर ,मन ही मन बुदबुदा कर रह जाते*
     और
    *कुछ बस खामोशी से अपने एहसासों को अपने अंदर समेटे हुए रहते हैं जिन्हें सिर्फ़ वह जानते हैं या सिर्फ़ उनकी खुद से बातें ,*
    यह सभी कुछ ख्याल में रखकर ही
     कुछ विषय/ टॉपिक लिखने के लिए रखे गए हैं जिनके लिखने के नियम ,तरीके पढ़ कर सुविधानुसार आप उस श्रेणी में लिख /पोस्ट कर सकते हैं ।
    आप सभी कलम को अपना साथी ,दोस्त बना सके और देखें कि लिखने से अच्छा दोस्त मिलना मुश्किल है
     लेखन के लिए ,बस लिखने की लगन होनी चाहिए और लिखे नियमों तथा बातों का गंभीरता से अनुसरण और प्रयास ,साथ में सब्र तो बेहद ही आवश्यक है ये कभी ना भूलें ,
     जिन्हें की वो इस क्लिक के नीचे उनके हैडिंग्स/नाम से अलग अलग पढ़ और समझ सकते हैं की किस टॉपिक में लिखने का क्या आधार रखना है और आपको किन बातों का खयाल/एहतियात रखना है।
    सभी विषयों तथा श्रेणियों के चयन एवं बनाते वक्त यह कोशिश की गई है की वह इतने खुले और आसान हों कि आपको अपनी जिंदगी में ही कहीं घुले मिले नज़र आएँ और उनसे सम्बंधित ,पहचानते सभी भाव/एहसास जो पहले से आपके अंदर छिपे हुए हैं ,वह शब्द/हर्फ़ में बदल कागज़ पर उतर आएं और आपकी कलम , कदम दर कदम आगे बढ़ना शुरू करे *और आपका दिल कागज़* बन जाये ।
    इस सब में ही एक श्रेणी
    *" एक रचना मेरी भी "*
    आपके लिए काग़ज़ दिल के द्वारा विशेष बनाई गई है ,
     जिसमें  *D , C , B , A*  श्रेणी में आप सीख,समझ लिख सकते हैं ,
    एक रचना मेरी भी
    जिसे की काग़ज़ दिल ने खास आपके लिए अलग तरह से तैयार कर 07 मार्च 2018 को रखा है।
     जिसमें आपकी कलम एक सरल नियम में बंध कर लिखना भी सीखे  और आपके लेखन में खूबसूरती बढ़ती जाए साथ में आपका आत्मविश्वास/कॉन्फिडेंस खुद में यकीन भी ।
     किस कैटेगरी में कैसे और क्या लिखना है वह आप नीचे अलग से दिए गए  NO- *(D-02 )* पर क्लिक कर समझ सकते हैं ।
    इसके साथ ही No.- *(D-03)*
    *" मेरी अभिव्यक्ति एहसास मेरे "*
    में आपकी कलम को खुलापन दिया गया है ताकि आप कुछ भी लिख सको अपनी अभिव्यक्ति , अपने एहसास अपने तरीके से बयाँ कर सको , उसे थोड़ी खूबसूरती भी देने की कोशिश करते हुए और
     बाकी अन्य श्रेणी  *4 लाइन की बात है* इत्यादि है , इन सभी को आप अलग अलग उनके नाम से क्लिक कर  ,पढ़ कर, समझ कर लिखें ,
    *देख लें कौन सी श्रेणी आपके लिए उपयुक्त है बस यह ख्याल रखें कि अपने एहसासों को शब्दों में बदलने की जल्दी ना करें* ,अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए खूबसूरत तरीके से लिखने की कोशिश करें और अपने लिखे को फिर से पढें , कम लिखें पर अच्छा और वज़नदार लिखने की कोशिश करें , और  लिखे में वज़न देने से भी ज्यादा जरूरी है अपने एहसासों को शब्दों के माध्यम से काग़ज़ पर रख कर अपना दिल हल्का करें , *आपके दिल का वज़न कम होने भर से या आपको दिली खुशी मिलने से भी आपके लिए इस मंच को बनाने का हमारा मकसद हम सफल समझेंगे* ,जो लिखने के बाद और किसी के पढ़ने से आपको सुकून  तथा मुस्कुराहट देगी ,आपकी उस मुस्कान से काग़ज़ दिल का हर पन्ना मुस्कुराएगा
     *फिर कलम से सच्चा दोस्त ,साथी आपको दूसरा नज़र नहीं आएगा यह भी एक हकीकत है ,* लिखना सिर्फ़ नाम के लिए नहीं होता है , उसके कई मायने हो सकते हैं , हालात , जरूरत और नज़रिया भी हो सकता हैं , और क्या पता आपकी कलम से किसी को , समाज को  एक नई दिशा या सोच मिल जाए और आपका लिखना आपकी जिंदगी का मकसद ,आपकी पहचान  और एक नई आवाज़ बन जाए ।
    कुछ भी समझ ना आने पर तथा किसी विशेष परिस्थिति में आप MESSAGE US का इस्तेमाल कर सकते हैं अन्यथा ना करें ,
    *अपने लेखन को बेहतर बनाने के लिए आप यह एक काम जरूर करें* ,काग़ज़ दिल मंच पर रचनाकारों में जाएं और जो भी रचना आपको पसंद आए उसे पढ़ें ,और जरा ठहर कर ख्यालों में जाएँ
    और उनके शब्दों पर गौर करें ,कितने शब्दों का इस्तेमाल , किस तरह से करके ,क्या बात उन्होंने कही है।
    *एक बेहद खास बात और*
    उस पर टिप्पणी / कमेंट जरूर करें खुले शब्दों में जो भी आपके अंदर चला उस रचना को पढ़ कर, झिझक या आलस ना करें ,इसे भी अपने लिखने का एक हिस्सा समझें , ये समझिए कि आपके अंदर जो एहसास  उस रचना को पढ़ कर जागे वह शब्दों में बदल गए ,वह सिर्फ कमेंट नहीं ,कुछ शब्दों की आपकी रचना है ,कमेंट में सिर्फ़ वाह ,बहुत खूब नहीं ,उस रचना के लिए कुछ अपने शब्द लिखें फिर तारीफ़ करें वाह वाह इत्यादि और एक दिन यही आपके लिखने में बदलता चला जायेगा । टिप्पणी करते वक्त यह ना सोचें की मैं क्यों करूँ ,जैसा फेसबुक पर 99% होता है की ये मेरी पोस्ट पर नहीं आया तो मैं क्यों जाऊँ या इन्हें मैं नहीं जानता, आपका कमेंट उस रचना के लिए होगा , आपके अपने एहसासों के लिए होगा ,खुद से बातों के लिए होगा और कभी कभी आपका कमेंट/टिप्पणी खुद ही एक दो लाइन की रचना सा होगा जिसका आधार वह होगा जो आपने पढ़ा दिल से , और आपके दिल से निकला , इसलिए की
    *यहाँ फेसबुक की वह भागमभाग लाइक कमेंट के लिए नहीं ,जहाँ  बिना पढ़े लाइक कमेंट ज्यादातर लोग इसलिए कर रहे कि बदले में मेरी रचना पर भी आ जाए बस ।*
    यह कमेंट आपका खुद के लिए है ,किसी को दिखाने के लिए नहीं बस हमेशा यह सोच दिल में रखें,  आपके अंदर से साहित्य रस का जो एहसास है वो शब्दों के खूबसूरत रूप में बाहर आना है उसके लिए है , बस इस पर कुछ महीने अमल कीजिए और परिवर्तन आप खुद महसूस करेंगे ऐसी हमारी आशा है दुआ है।
    हमारी हर संभव कोशिश है की हर विषय ,श्रेणी /केटेगरी में लिखने की जानकारी अधिक से अधिक सरलता से विस्तृत, खुली ,आसान तरीके से शब्दों में रखी और लिखी जाए जिससे की आपको किसी प्रकार की असुविधा/परेशानी ना हो और बिना किसी सोच, झिझक ,संकोच के आप अपने दिल के भाव/ एहसासों को काग़ज़ दिल के कागज़ पर उतार सको।
    *आपके दिल को काग़ज़ करने में काग़ज़ दिल आपके साथ है अपनी असीम दुआओं ,शुभकामनाओं के साथ ।*
    एक दिन आपकी तसवीर ,या रचना   KAAGAZ DIL  पोस्ट पर तथा साहित्य जगत में देखना चाहते हैं ।
    *लिखने के बाद अपनी रचना के लिंक को व्हाट्सएप्प या फेसबुक पर अपने साथियों से जरूर शेयर करें , ज़रा भी झिझकें नहीं* कोई क्या कमेंट करेगा या नहीं करेगा , बस अपनी धुन में चलते जाएं ,आगे बढ़ते जाएं और अपने लिखे को अपने प्रोफाइल के साथ संग्रहित करते जाएं।
    बहुत बहुत शुभकामनाएँ
    बहुत बहुत शुक्रिया आपका
    (भविष्य में और भी विषय/श्रेणी सभी के सुझावों से बढ़ाये जाएंगे एवं सुधार भी किए जाएंगे )
         *आवाज़ आपके दिल की*
              *KaagazDil.Com*
    ****************************
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  • 4. (D-02) एक रचना मेरी भी
     
    यह कैटेगिरी/श्रेणी काग़ज़ दिल के द्वारा कलमकार पाठकों के लिखने के लिए तैयार की गयी है।
    *आपके सहयोग और सुझावों से सभी श्रेणियों में बदलाव करते रहेंगे।*
    *एक रचना मेरी भी* में आप नीचे दिए *D ,C, B  और A*  *04 प्रकार* में से अपनी सुविधा के आधार पर किसी भी एक या दो के अनुसार लिख सकते हैं ,उनसे संबंधित कुछ नियम,तरीके तथा इनके *नीचे विशेष नोट में दी गई  सभी 1,2,3.... जानकारी भी* D,C,B,A से अलग पढ़ लें ।
     *एक रचना मेरी भी -( D )*
     *एक रचना मेरी भी -( C )*
    *एक रचना मेरी भी -(  B)*
    *एक रचना मेरी भी -( A )*
    *विशेष नोट*
    *01-*
    आप हिंदी अथवा हिंदी-उर्दू में ही लिख सकते हैं ।
     मात्राओ एवं शब्दों का विशेष ध्यान रखें।
    आपकी रचना में अत्यधिक मात्राओं व शब्दों की अशुद्धियाँ पाए जाने पर पोस्ट पोर्टल से हटा दी जाएगी।
    *02-*
     जिस भी कैटेगरी में आप रचना लिख रहे हैं उसी श्रेणी/केटेगिरी में ही पोस्ट करें , उसके ऊपर  ,भाव
    *.शीर्षक* जरूर  लिखें ,इसके बिना आपकी कोई भी पोस्ट नहीं हो पाएगी।
    *03-*
    आपकी रचना मौलिक, आपकी खुद की लिखी हुई होनी चाहिए ।उसके नीचे आपका नाम लिखा होना अनिवार्य है ।किसी और की रचना अपने नाम से पोस्ट करने पर संगठन से आपकी *सदस्यता निरस्त भी की जा सकती है।*
    *04-*
    आपके लिखे में कुछ भी अति आपत्तिजनक ( अश्लील ,हिंसात्मक ,राजनीतिक ,जातिगत ,किसी धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला या अपमानजनक आदि एक पंक्ति/लाइन तक नहीं होनी चाहिये )
     लिखा होने पर *बिना किसी सूचना के आपको ब्लॉग पोर्टल से ब्लॉक कर,सदस्यता निरस्त कर दी जाएगी।*
    *05-*
    सबसे ऊपर पहले no. पर लिखे
    *(D-01)*
     *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
    ★★★★★★★★★★★★★
    *****************************
                 एक रचना मेरी भी - D
               -0D0-..
    *(D-01)* आपकी रचना में 16 पंक्ति/लाइन से ज्यादा और 04 से कम नहीं होनी चाहिए।
     *(D-02)* एक पंक्ति में 12 से अधिक शब्द ना हों ।
    किसी पंक्ति/लाइन में कम शब्द और किसी में ज्यादा शब्द हो सकते हैं
    *(D-03)* इसका भाव /विषय का आधार एक ही होना चाहिए शुरू से आखिर तक और आखरी पंक्ति/लाइन में आपकी लिखी बात भाव पूरा होता सा लगना चाहिए। बात पूरी हो जानी चाहिए ,अधूरी सी ना लगे।
    *(D-04)* एक विशेष बात जितनी भी पंक्ति/ लाइन हो वो गिनती करने पर जोड़ा बन जाना चाहिए। कोई अकेली एक लाइन नही रह जानी चाहिए।
    जैसे कि आपने 13 लाइन में लिखा तो 02 ,02 करके 12 लाइन के तो 06 जोड़े बन गए अब 13वीं लाइन अकेली रह गई, *यह गलत मानी जायेगी।*
    *(D-05)* रचना के शीर्षक के साथ आप  *"-0D0 " जरूर लिखें ।*
      उदाहरण -  *-0D0 - ज़िंदगी का सफर*
    या जैसे कि *-0D0 - ज़िंदगी*
    यह नियम/मानकों में सबसे ऊपर है
    *( ऊपर लिखे मानकों को पूरा ना नज़र आने पर आपकी पोस्ट Approve नहीं की जाएगी हटा दी जाएगी )*
    ★★★★★★★★★★★★★
    *एक रचना मेरी भी -( C )*
             *" -0C0 "*
    *(C-01)* आपकी रचना में 16 पंक्ति/लाइन से ज्यादा और 04 से कम नहीं होनी चाहिए।
    *(C-01)* एक पंक्ति में 12 से अधिक शब्द ना हों ।
    *(C-02)* *विशेष बात-* पहली 02 पंक्ति/लाइन में से किसी एक पंक्ति/लाइन में ज्यादा शब्दों वाली पंक्ति/लाइन में जितने भी शब्द हों ,
     बाद की/नीचे की किसी भी पंक्ति/लाइन में उससे ज़्यादा शब्द नहीं होने चाहिए ।
    हाँ शब्द कम जरूर हो सकते है
    जैसे पहली 02 पंक्ति में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    1.2.3.4.5.6.7.8.
    हैं
    तो बाद की किसी भी पंक्ति/लाइन में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10.11
    शब्द नहीं हो सकते
    लेकिन 10 हो सकते हैं या 10 से कम 09, 08 ,07...., हो सकते हैं।
    *(C-03)* इसकी हर पंक्ति/ लाइन को लिखते में आपको एक बात का खास ध्यान रखने की कोशिश करनी है कि ,
    हर लाइन देखने,पढ़ने में पूरी सी लगे और फिर उसके नीचे की दूसरी लाइन एक नई शुरुआत सी लगे , ना की आप अपनी एक बात को लगातार बस लिखे जा रहे हैं और उस लाइन के शब्द पूरे होने पर आपने फिर लाइन बदली और वही लिखते रहे ।
    जैसे उदाहरण के तौर पर यह जो आप पढ़ रहे हैं यह एक ही बात तो लिखी जा रही है बस लाइन भरने पर अगली लाइन में बात चली जाती है फिर तो यह कहानी या अखबार के लिखने जैसा हो जाएगा ।इसमें हर लाइन में शब्दों की गिनती या सारी रचना की कुल लाइन की गिनती से क्या फायदा ।
    शायद हमारी बात आप तक पहुँची हो ।
    *उदाहरण-*
    के लिए आप काग़ज़ दिल रचनाकारों में जा कर उनकी रचनाएँ क्लिक करें जैसे कि
    *मुक्तक , गीतिका*
    *.कता शायरी , ग़ज़ल*
    हर लाइन को रुक रुक कर सोच सोच कर पढें
    फिर कहानी क्लिक करके पढें , फिर और बेहतर समझ आएगा ।
     *फिर भी एक बेहद साधारण उदाहरण देखिए*
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    यह एक ही बात है पर लाइन बदल गई ,शब्द कम ज्यादा कर ही लेंगे थोड़ा इधर उधर कर के
    फिर ? पर नहीं ,यह नही करना , इसी बात को कहने का तरीका बदलिए और अंदाज़ भी
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    अब देखिए
    *गया था बाज़ार पसंद की खरीदने सब्जियाँ सभी*
    *साथ थकान के, बस तोरई ही ला पाया हूँ मैं*
    इसमें हर लाइन खुद में काफी कुछ पूरी है
     बात का सार ,अर्थ ,वजह फिर चाहे दूसरी लाइन में निकलकर सामने आ रहा है
    इन दोनों लाइन के शब्द भी 08 और 10 हैं
    इसी तरह आपकी बात 4 लाइन से 16 लाइन तक में रख सकते हैं।
    *(C-04)* एक विशेष बात जितनी भी पंक्ति/ लाइन हो वो गिनती करने पर जोड़ा बन जाना चाहिए। कोई अकेली एक लाइन नही रह जानी चाहिए।
    जैसे कि आपने 13 लाइन में लिखा तो 02 ,02 करके 12 लाइन के तो 06 जोड़े बन गए अब 13वीं लाइन अकेली रह गई, *यह गलत मानी जायेगी।*
    *(C-05)* रचना के ऊपर आप आप  *" .-0C0 " और उसका भाव/ विषय शीर्षक* के तौर पर जरूर लिखें ।
      उदाहरण -  *.0C0 - ज़िंदगी का सफर*
    या जैसे कि *-0C0 - ज़िंदगी*
    यह नियम/मानकों में सबसे पहले है।
    *( ऊपर लिखे मानकों को पूरा ना नज़र आने पर आपकी पोस्ट Approve/स्वीकार नही की जाएगी हटा दी जाएगी )*
    ★★★★★★★★★★★★★
    *एक रचना मेरी भी -( B )*
          *-0B0-....*
    *(B-01)* आपकी रचना में 16 पंक्ति/लाइन से ज्यादा और 04 से कम नहीं होनी चाहिए।
    *(B-02)* एक पंक्ति में 12 से अधिक शब्द ना हों ।
    *(B-03)* *विशेष बात-* पहली 02 पंक्ति/ लाइन में शब्दों की संख्या गिनती बराबर होनी चाहिए ।
    1 ,2 ,3 ,4, 5 ,6,9,10
    1 ,2 ,3 ,4, 5 ,6,9,10
     *(B-04)*
    बाद की/नीचे की सभी पंक्ति/लाइन में उतने शब्द से ज्यादा नहीं होने चाहिए ।
    पर 2 शब्द तक हर पंक्ति/लाइन में
    कम जरूर हो सकता है या ऊपर के बराबर हो सकता है
    जैसे पहली 02 पंक्ति में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    हैं
    तो बाद की किसी भी पंक्ति/लाइन में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    शब्द हो सकते हैं
    या फिर
    1.2.3.4.5.6.7.8
    1.2.3.4.5.6.7.8.9
    या फिर
    1.2.3.4.5.6.7.8.
    1.2.3.4.5.6.7.8.
    हो सकते हैं
    लेकिन 10 से ज्यादा नहीं हो सकते हैं मतलब 11,12 या 08 से कम 07, 06  नहीं हो सकते हैं।
    *(B-05)* इसकी हर पंक्ति/ लाइन को लिखते में आपको एक बात का खास ध्यान रखने की कोशिश करनी है कि ,
    हर लाइन देखने,पढ़ने में पूरी सी लगे और फिर उसके नीचे की दूसरी लाइन एक नई शुरुआत सी लगे , ना की आप अपनी एक बात को लगातार बस लिखे जा रहे हैं और उस लाइन के शब्द पूरे होने पर आपने फिर लाइन बदली और वही लिखते रहे ।
    जैसे उदाहरण के तौर पर आप यह जो आप पढ़ रहे हैं यह एक ही बात तो लिखी जा रही है बस लाइन भरने पर अगली लाइन में बात चली जाती है फिर तो यह कहानी या अखबार के लिखने जैसा हो जाएगा ,इसमें हर लाइन में शब्दों की गिनती या सारी रचना की कुल लाइन की गिनती से क्या फायदा ।
    शायद हमारी बात आप तक पहुँची हो ।
    *उदाहरण-*
    के लिए आप काग़ज़ दिल रचनाकारों में जा कर उनकी रचनाएँ क्लिक करें जैसे कि
    *मुक्तक , गीतिका*
    *.कता शायरी , ग़ज़ल*
    हर लाइन को रुक रुक कर सोच सोच कर पढें
    फिर कहानी क्लिक करके पढें , फिर और बेहतर समझ आएगा ।
     *फिर भी एक बेहद साधारण उदाहरण देखिए*
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    यह एक ही बात है पर लाइन बदल गई ,शब्द कम ज्यादा कर ही लेंगे थोड़ा इधर उधर कर के
    फिर ? पर नहीं ,यह नही करना , इसी बात को कहने का तरीका बदलिए और अंदाज़ भी
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    अब देखिए
    *गया था बाज़ार पसंद की खरीदने सब्जियाँ सभी*
    *साथ थकान के, बस तोरई ही ला पाया हूँ मैं*
    इसमें हर लाइन खुद में काफी कुछ पूरी है
    फिर बात का सार ,अर्थ ,वजह फिर चाहें दूसरी लाइन में निकलकर सामने आ रहा है
    इन दोनों लाइन के शब्द भी 08 और 10 हैं
    इसी तरह आपकी बात 4 लाइन से 16 लाइन तक में रख सकते हैं।
    *(B-06)* एक विशेष बात जितनी भी पंक्ति/ लाइन हो वो गिनती करने पर जोड़ा बन जाना चाहिए। कोई अकेली एक लाइन नही रह जानी चाहिए।
    जैसे कि आपने 13 लाइन में लिखा तो 02 ,02 करके 12 लाइन के तो 06 जोड़े बन गए अब 13वीं लाइन अकेली रह गई, *यह गलत मानी जायेगी।*
    *(B-07)* रचना के ऊपर आप आप  *" .-0B0 " और उसका भाव/ विषय शीर्षक* के तौर पर जरूर लिखें ।
      उदाहरण -  *-0B0 - ज़िंदगी का सफर*
    या जैसे कि *.-0B0 - ज़िंदगी*
    ( ऊपर लिखे मानकों को पूरा ना नज़र आने पर आपकी पोस्ट Approve/स्वीकार नही की जायेगी , हटा दी जाएगी )
    ★★★★★★★★★★★★★
    *एक रचना मेरी भी -( A )*
             *-0A0-....*
    *(A-01)* आपकी रचना 16 पंक्ति/लाइन से ज्यादा और 04 से कम नहीं होनी चाहिए।
    *(A-02)* एक पंक्ति में 12 शब्द हो ।
    *(A-03)* *विशेष बात-* पहली 02 पंक्ति/ लाइन में शब्दों की संख्या/ गिनती बराबर होनी चाहिए ।
    1 ,2 ,3 ,4, 5 ,6,9,10
    1 ,2 ,3 ,4, 5 ,6,9,10
     *(A-04)*
    बाद की/नीचे की सभी पंक्ति/लाइन में शुरू की पहली 02 पंक्ति जितने ही शब्द हों तो बेहतर
    वर्ना
    02 शब्द तक हर पंक्ति/लाइन में जरूरत पर
    कम हो सकते हैं और विशेष परिस्थिति में 02 ज्यादा भी
    जैसे पहली 02 पंक्ति में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    हैं
    तो बाद की किसी भी पंक्ति/लाइन में
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10
    शब्द हो सकते हैं
    या फिर
    1.2.3.4.5.6.7.8
    1.2.3.4.5.6.7.8.9
    या फिर
    1.2.3.4.5.6.7.8.
    1.2.3.4.5.6.7.8.
    हो सकते हैं
    या फिर
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10.11.
    1.2.3.4.5.6.7.8.9.10.11.12.
    हो सकते हैं
    शुरू की पंक्ति के हिसाब से 12 से ज्यादा नही हो सकते है मतलब 13,14 या 08 से कम 07, 06  नही हो सकते हैं।
    वैसे 14 से ज्यादा नही हो सकते हैं ,क्योंकि हम 12 शब्द तक इस्तेमाल कर ही सकते है नई शुरुआत में।
    *(A-04)* इसकी हर पंक्ति/ लाइन को लिखते में आपको वही एक बात का खास ध्यान रखने की कोशिश करनी है कि जो हमने इसके पहले *C,B* में की थी वही नीचे लिखी भी है , पर उसके अलावा जो करना है वह अगले पॉइंट *(A-05)* में आएगा।
    तो
    हर लाइन देखने,पढ़ने में पूरी सी लगे और फिर उसके नीचे की दूसरी लाइन एक नई शुरुआत सी लगे , ना की आप अपनी एक बात को लगातार बस लिखे जा रहे हैं और उस लाइन के शब्द पूरे होने पर आपने फिर लाइन बदली और वही लिखते रहे ।
    जैसे उदाहरण के तौर पर आप यह जो पढ़ रहे हैं यह एक ही बात तो लिखी जा रही है बस लाइन भरने पर अगली लाइन में बात चली जाती है फिर तो यह कहानी या अखबार के लिखने जैसा हो जाएगा ,इसमें हर लाइन में शब्दों की गिनती या सारी रचना की कुल लाइन की गिनती से क्या फायदा ।
    शायद हमारी बात आप तक पहुँची हो ।
    *उदाहरण-*
    के लिए आप काग़ज़ दिल रचनाकारों में जा कर उनकी रचनाएँ क्लिक करें जैसे कि
    *मुक्तक , गीतिका*
    *.कता शायरी , ग़ज़ल*
    हर लाइन को रुक रुक कर सोच सोच कर पढें
    फिर कहानी क्लिक करके पढें , फिर और बेहतर समझ आएगा ।
     *फिर भी एक बेहद साधारण उदाहरण देखिए*
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    यह एक ही बात है पर लाइन बदल गई ,शब्द कम ज्यादा कर ही लेंगे थोड़ा इधर उधर कर के
    *फिर ? -* पर नहीं ,यह नही करना , इसी बात को कहने का तरीका बदलिए और अंदाज़ भी
    *मैं थका हारा बाज़ार यह सोच कर गया था की आज ही सारी पसंद की सब्जियां खरीद लूँगा लेकिन सिर्फ़ तोरई मिली और बस लेकर लौट आया*
    अब देखिए
    *गया था बाज़ार पसंद की खरीदने सब्जियाँ सभी*
    *साथ थकान के, बस तोरई ही ला पाया हूँ मैं*
    इसमें हर लाइन खुद में काफी कुछ पूरी है
    फिर बात का सार ,अर्थ ,वजह फिर चाहे दूसरी लाइन में निकलकर सामने आ रहा है
    इन दोनों लाइन के शब्द भी 08 और 10 हैं
    इसी तरह आप अपनी बात 4 लाइन से 16 लाइन तक में रख सकते हैं।
    *(A-05)*
    इसमें आपको यह कोशिश और करनी है कि हर पंक्ति के आखिर में नीचे दिए गए विकल्प में आप क्या कोई एक काम कर सकते हैं
    जिसमें आप अपनी बात भी कहते जाये और साथ ही वह काम भी होता चले ।
    वह काम इनमें से कोई भी एक कीजिए
    *(a)* पंक्ति के आखिर का 01 ,02 , या ज्यादा शब्द बाकी सभी पंक्ति में भी आये तो बहुत अच्छा
    वर्ना कुछ में तो जरूर आए ।
    शब्द जैसे कि
    जाता है
    जाता है
    तो हर लाइन या जितनी ज्यादा का हो सके अंत " जाता है "से ही हो।
    *(b)* या आप यह कोशिश करें कि आखिरी शब्द ही मिलता जाए ।
    जैसे
    चाहत , राहत ,फजीहत , एहतियात
    या
    इसमें आप इनका इस्तेमाल कर के उसे आखिरी शब्द मानकर मिलाने से बचें जरा ,जो अक्सर ही किसी भी बात में अंत में आ जाते हैं अपना वर्तमान ,भूत या भविष्य बताने के लिए या किसी और रूप में
    जैसे कि
    है , हूँ , था ,थी
    अगर इनका इस्तेमाल हो तो , जो शब्द या शब्द का आख़री अक्षर आप मिलाने की कोशिश कर रहे हैं वो हर बार आखिर में जरूर आये हर उस शब्द के बाद
    जैसे कि
    चाहत है , राहत है ,इबादत है
    *(c)* या आप कोशिश कीजिए कि आखिरी शब्द की आख़िरी मात्रा मिले
    जैसे कि
    जाती , जिंदगी , कहती
    या शब्द और मात्रा दोनों एक साथ मिले ,फिर तो बहुत ही अच्छा है
    जाता , खाता , पाता , नहाता
    जाती , खाती ,कहती
    ऊपर  "है ,हूँ " का ख्याल अब भी रखें
    और कोशिश करें कि जिन आखिरी शब्दों को आप लेकर चलें उनका उच्चारण/ गूंज/ तुक/ सुनने बोलने में आवाज़ एक जैसी
    जैसे कि जा रहा , आ रहा और टमाटर ,स्वेटर और  आरती , मारती
     जितना ज्यादा एक जैसा होगा बोलने में उतनी सुंदरता आएगी।
    *(A-06)* तो अब आपको ऊपर दिए गए 03 तरीके *A,B,C* में से किसी एक पर या मिला जुला कर लिखने पर ध्यान देना है ।
    कोशिश यह करनी है कि कुल/टोटल पंक्तियों/ लाइन्स में से  कितनी लाइन में आप यह काम कर पाते हैं कितनी ज्यादा बार ।
    अगर 50% लाइन में कर पाते हैं तो बहुत ही अच्छा है बस उसमें एक कोशिश करें कि *पहली छोड़ कर हर दूसरी लाइन का* आखरी शब्द मिलाने की कोशिश करें ।
    अगर चार लाइन में लिखते हैं तब तो 02 लाइन में यह करना ही होगा ।
    और 04 से ज्यादा होने पर जितनी ज्यादा में हो सके।
    तो अब ऊपर में कहे गए तरीकों के लिए  कुछ उदाहरण देखिए फिर उसी बेहद साधरण बात , सब्जी खरीदने वाली बात की जो आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल है।
    **************************
    *सोचा था खरीद ही लूँगा सब्जियाँ सभी बाज़ार की*
    *किस्मत में मिली तोरई जैसे उन्हें भी तलाश थी किसी बीमार की*
    *****************************
    *गया था बाज़ार खरीदने सब्जियाँ सभी*
    *लौटा हूँ तो हाथ सिवा तोरई के कुछ नहीं*
    *****************************
    *गया था बाज़ार खरीदने सब्जियाँ सभी*
    *मिलेगी तोरई सिर्फ़ ना सोचा था मैंने कभी*
    *अब भूखा तो ना सोया जाएगा हम पर अभी*
    *दिल को समझा खा ही लेंगे अब यही*
    *स्वाद बदलने के तरीके बहुत,ज़हमत तो कीजिए*
    *लाइए तो भुना जीरा ,काला नमक और दही*
    *****************************
    *बाकी आप काग़ज़दिल रचनाकारों की सूची से ग़ज़ल , गीतिका , मुक्तक , .कता ,रूबाई पढें ।लिखने में जल्दी ना करें और खुद को वक्त दें*
    *(A-07)* एक विशेष बात जितनी भी पंक्ति/ लाइन हो वो गिनती करने पर जोड़ा बन जाना चाहिए। कोई अकेली एक लाइन नही रह जानी चाहिए।
    जैसे कि आपने 13 लाइन में लिखा तो 02 ,02 करके 12 लाइन के तो 06 जोड़े बन गए अब 13वीं लाइन अकेली रह गई, *यह गलत मानी जायेगी।*
    *(A-08)* रचना के ऊपर आप आप  *" -0A0 " और उसका भाव/ विषय शीर्षक* के तौर पर जरूर लिखें ।
      उदाहरण -  *-0A0 - ज़िंदगी का सफर*
    या जैसे कि *-0A0 - ज़िंदगी*
    *यह अति आवश्यक है, मानकों और नियम में सबसे पहला यही है।*
    *( ऊपर लिखे मानकों को पूरा ना नज़र आने पर आपकी पोस्ट Approve नहीं की जाएगी , हटा दी जाएगी )*
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  • 5. (D-03) मेरी अभिव्यक्ति एहसास मेरे
     
    *मेरी अभिव्यक्ति एहसास मेरे*
    इस कैटेगिरी में कलमकार पाठक अपने एहसासों की अभिव्यक्ति 02- दो तरह से कर सकते हैं , जिनके नियम और तरीके अलग अलग पढ़ समझ कर किसी एक में या दोनों में अलग अलग लिख सकते हैं ,
     ऊपर उनका श्रेणी कोड शीर्षक के साथ डालकर ( *.-0A0* या  *-0B0*)
       पहला -- *0A0*
        दूसरा -   *0B0*
      *मेरी अभिव्यक्ति -0A0-* में
    *(01)* आपकी रचना में पंक्ति/लाइन कितनी भी छोटी या बड़ी हो सकती  हैं परंतु उसमें पहली कोशिश आपकी यह होनी चाहिए कि आपकी  अभिव्यक्ति 100 शब्दों के अंदर हो ।
    या दूसरी कोशिश 125 शब्दों तक , तब बहुत अच्छा है ।
    वर्ना वह 170 शब्दों से अधिक हरगिज़ ना हो अन्यथा वो अमान्य /अस्वीकृत हो जाएगी ।
    *(02)* इसे सुंदर बनाने के लिए आप कोशिश कीजिए कि कोई एक लाइन ,तुक या किसी लाइन का आखिरी शब्द , या किसी आख़िरी शब्द की मात्रा , मिलते जुलते शब्द बोलने में उसका उच्चारण कुछ पंक्ति छोड़ कर किसी एक पंक्ति में आ जाये।
    अब वह हर तीसरी या चौथी पंक्ति भी हो सकती है या जैसे भी आपको सुविधा हो ।
    या फिर
    कुल लिखे को अलग अलग टुकड़ों , पंक्तियों में अलग अलग मिलाने की कोशिश कीजिए।
    मतलब यह कि
    कुछ हिस्से में कोई एक आख़िरी शब्द आपने मिलाए  एक दो पंक्ति में
    और फिर उससे आगे फिर से कोई नई मात्रा, शब्द या शब्द की आवाज़ ,उसे बोलने का तरीका मिलाएं
    उससे आगे फिर अलग और अपनी बात पूरी कर दी ।
    *(03)* ऊपर बताए तरीके से पंक्ति या शब्द का मिलान कम से कम पूरी रचना के 25%  में तो यह कोशिश कीजिए , 3 या 4 पंक्ति तो आ ही जाए । पर हर तीसरी चौथी या पांचवी में या जरूरत अनुसार भी हो जाता है तो बहुत अच्छा है।
    *और अच्छे से समझने के लिए*
    आप रचनाकारों की सूची या *पढ़ें* को क्लिक कर के उसमें इस तरह की कोई
    कविता या नज़्म पढ़ /देख सकते हैं ।
    या
    इससे ऊपर वाली कैटेगरी *एक रचना मेरी भी* को क्लिक कर उसका *A*  तरीका पढ़ सकते हैं
    *(04)* कुछ पंक्तियों की तुक ,आख़िरी शब्द ,मात्रा या पूरी पंक्ति फिर से आ जाये ,इनमें से कुछ ना कुछ करना अनिवार्य है अन्यथा यह अमान्य होगी।
    *(05)* लिखे के आखिर में यह कोशिश भी कीजिए कि बात पूरी हो जाए उसका अर्थ समझ आए ना कि वह अधूरी सी लगे।
    *(06)* पोस्ट के ऊपर शीर्षक के साथ इसका कोड *0A0* लिखना अनिवार्य है अन्यथा पोस्ट aprove नही होगी/ हटा दी जाएगी।
    इस तरह
      *.-0A0-*.शीर्षक
    अन्य जरूरी जानकारी नीचे आखिर में देखें ,किन कारणों से आपकी *पोस्ट रुक सकती है।*
    ***************************
    दूसरा तरीका
    *मेरी अभिव्यक्ति -0B0* में
    *(01)*
    यह आपकी खुली अभिव्यक्ति है
     , *इसमें 175 शब्दों से  अधिक नहीं होने चाहिए*
    *(02)*
    *आपका शीर्षक कम से कम 02 और ज्यादा से ज़्यादा 06 शब्दों से अधिक का नहीं होना चाहिये* ,
    *( 03)*
     वह शीर्षक/शब्द  पूरी
     अभिव्यक्ति में *कम से कम 02-दो* बार किसी भी रूप में अलग अलग पंक्तियों में ,शुरू से आखिर तक किन्हीं भी पंक्तियों/लाइन्स में *जरूर-जरूर* आना चाहिए।
    *(03)*
    लिखे का आधार /सार आपके शीर्षक पर ही होना चाहिए , और आखिर में अभिव्यक्ति एक साथ अधूरी सी भी ना लगे , विषय ,भाव आप कुछ भी ले सकते हैं।
    *(04)*
    पर यह कहानी ,लेख, निबंध के रूप में *नही लिखा होना चाहिये* , यह *कविता ,नज़्म की तरह होनी चाहिये।*
    इसके लिए आप काग़ज़ दिल रचनाकारों की कविता या नज़्म पढ़ सकते हैं और अगर बच्चों के लिए लिखना है तो आप बाल कविता/नज़्म देख सकते हैं।
    *( 05 )*
    पोस्ट के सबसे ऊपर हैडिंग के तौर
      *-0B0.....शीर्षक*
    जैसे कि
    *-0B0-मेरी दुनियाँ*
    ऐसा ना होने पर पोस्ट मंजूर नहीं होगी।
    अन्य जरूरी जानकारी नीचे पढ़े।
    *नोट*
    *1-* आप हिंदी अथवा हिंदी उर्दू में ही लिख सकते हैं एवं मात्राओं ,शब्दों का विशेष ध्यान रखें।
    *2-* आपकी रचना मौलिक, आपकी खुद की लिखी हुई होनी चाहिए ।उसके नीचे आपका नाम लिखा होना बेहद अनिवार्य है ।
    *3-* जिस भी कैटेगिरी में आप रचना लिख रहे हैं उसी श्रेणी/कैटेगिरी में पोस्ट करें/ रखें , उसके ऊपर उसके विषय के साथ
    *शीर्षक* जरूर लिखें ।
    *4-* *आपके लिखे में में कुछ भी अति आपत्तिजनक ( अश्लील ,हिंसात्मक ,राजनीतिक ,जातिगत ,किसी धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला या अपमानजनक आदि एक पंक्ति/लाइन तक नही होनी चाहिये )*
     *लिखा होने पर बिना किसी सूचना के आपको ब्लॉग पोर्टल से ब्लॉक कर दिया जाएगा ।*
    *5-* आपकी रचना में अत्यधिक मात्राओं व शब्दों की अशुद्धियाँ पाए जाने पर पोस्ट पोर्टल से हटा दी जाएगी ।
    *6-* सबसे ऊपर पहले *D-01*. पर लिखे
    *(D-01)* *कलमकार पाठकों के लिए संदेश एवं*
     *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
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  • 6. (D-04) सच्ची कथाएं मेरी कलम से
     
    जिंदगी में कई किस्से ,कहानी ,हादसे ऐसे सामने आते हैं या सुनते हैं जो अक्सर हमें याद आ जाते हैं
     और उस तरह की कोई भी बात कहीं चलती है तो हमारी याद में भी वह बात ज़ुबान पर आए बिना रुक नही पाती,और हम सुनाने लगते हैं या ज़िक्र करते हैं
    और आपके रुकने पर
     सुनने वाला भी बरबस बोल ही पड़ता है
    *फिर क्या हुआ?*
    बस ऐसी ही आप बीती ,या किसी भरोसेमंद से सुनी हुई कोई भी सच्ची कहानी या किस्सा आप यहाँ सुनाएं अपनी कलम के साथ से ,
    शब्दों की आवाज़ से कि पढ़ने वाला दूसरा काम छोड़ दे पर आपके लिखे को बीच में ना छोड़ पाएँ जब तक कि उसे पूरा ना पढ़ ले।
    क्योंकि कहानी की सच्चाई के साथ आपके बयां करने का अंदाज़ ,खूबसूरती ,तरीका ही तय करेगा कि पढ़ने वाला अंत तक पढ़ेगा या बीच में छोड़ देगा , तो ज़रा ठहर कर लिखिए और खुद उसे कम से कम 02 बार पढ़िए एक समय के अंतराल पर
    बस उठाइये कलम और हो जाइए शुरू, लिखना जो चलने लगा है आपके दिमाग में अभी इसे पढ़ते पढ़ते ।
    जरूरी नही एक बार लिखना शुरू किया तो अब रुकना नही , पूरा लिख कर ही रुकेंगे । थोड़ा थोड़ा कई दिन में लिखिए , जब जो याद आए बस लिख लीजिए और सही तरीक़े से उन्हें जोड़िए और फिर उसे सजाना शुरू कीजिए वजनदार ,खूबसूरत ,जरूरत अनुसार आवाज़ करते ,बोलते शब्दों से ।
    जो पढ़ने वाले के मुँह से उन शब्दों की
    *ना सिर्फ़ शब्दों की आवाज़ आने लगे*
    *आपके लिखे अंदाज़ की याद आने लगे*
    अब आपकी नई कहानी कब आएगी
    *पढ़ने वाले यह देखने रोज़ आने लगे*
    बस लिखना है और लिखते चले जाना है
    *बस साथ में नीचे लिखी कुछ बातों का ख्याल भी दिल में लाना है*
     *नोट-* जरूरी बातें
    *01-* आपके लिखे में कुछ भी अति आपत्तिजनक ( अश्लील ,हिंसात्मक ,राजनीतिक ,जातिगत ,किसी धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला या अपमानजनक आदि एक पंक्ति/लाइन तक नहीं होनी चाहिये )
     *लिखा होने पर बिना किसी सूचना के आपको ब्लॉग पोर्टल से ब्लॉक कर दिया जाएगा ।*
    *02-* आप हिंदी अथवा हिंदी उर्दू में ही लिख सकते हैं एवं मात्राओं ,शब्दों का विशेष ध्यान रखें,पोस्ट के पहले अच्छे से चेक कर लें।
    *02-*  शब्दों की संख्या 500 से अधिक बिल्कुल भी ना हो एवं एक लिखे के भाव को प्रदर्शित करता शीर्षक जरूर दें।
    *03-* आपकी रचना मौलिक, आपकी खुद की लिखी हुई होनी चाहिए ।
    *04-* आपकी रचना में अत्यधिक मात्राओं ,शब्दों की अशुद्धियाँ पाए जाने पर पोस्ट पोर्टल से हटा दी जाएगी ।
    *05-*  सबसे ऊपर पहले no. पर लिखे
    *(D-01)* *कलमकार पाठकों के लिए संदेश एवं*
     *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
    *****************************
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  • 7. ( D-05 ) आओ बच्चों तुम्हें सिखाऊँ
     
       *आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ*
    🤵👩‍🏫👩‍🌾👩‍🍳👩‍🔧👮🕵️👷🤵
    आओ बच्चों तुम्हें सुनाऊँ
    बिल्कुल ऐसा ही कुछ सुनाइए की आप शुरू करें तो बच्चे भी सुने/पढ़े बिना रह ना पाएं ,
    आप उन्हें बताएं कि आपने क्या कहाँ लिखा और आए तो बस देखने ,पर जाएँ पूरा पढ़कर ही ,
    बहुत सी बातें जो बोलकर नहीं समझाई , कही या सुनाई जा सकती , वह लिखकर उनके दिल तक को छू सकती है ,बस उसका रूप बदलने की जरूरत अंदाज़ ज़रा उनके मन का सा हो , बच्चे जो हैं मन के सच्चे हैं ।
    अब बात उन्हें समझाने की हो , शिक्षा की या ज्ञान और अच्छी सीख की
    कहानी तो बनानी पड़ेगी ना !
    जो पढ़ने में आंनददायक भी हो और साथ ही कोई सीख भी उसमें शामिल हो ,तो कभी मनोरंजन और थोड़ा रिफ्रेशमेंट भी ,
    ★कभी उन्हें अपने माता पिता और घर के प्रति जिम्मेदार बनाती हुई हो ,
    ★तो क्या है जरूरी उनके भविष्य और कैरियर के लिए
    ★क्या फर्क है फ़िल्म और हकीकत में
    ऐसी बहुत सारी बातें जो उनके लिए जरूरी हैं , पर यह भी ख्याल रखिये कि सीधे शब्दों में वह ये सब पसंद भी नहीं करेंगे ,
     पर उनका मन कभी कुछ और भी तो हो सकता है कहानी के अलावा ,तो लाओ आज कुछ बनाना सिखाते हैं  , या नए जमाने की कुछ नई जानकारी या फिर वो जमाना जिसे आज के बच्चे जानते ही नहीं ,
    बदलती दुनियाँ की चमक में पुराने जमाने की खूबसूरती के साथ नई दुनियाँ में तालमेल , अच्छे दोस्त और घरवालों में फर्क ,
    इसमें बुजुर्ग महिला , पुरुष बहुत अच्छा लिख सकते हैं अपना तजुर्बा और थोड़ा अपना लिखना शामिल कर के लिख सकते हैं।
    पर बात बच्चों की है ,  जो भविष्य है हर घर का ,भविष्य है देश का ,भविष्य है हमारे भविष्य का , बात कोमल मन की है ,तो कुछ बातों का ख्याल रखना तो हमारी जिम्मेदारी खुद से बन जाती है ।जब बात हमारे बच्चों की हो ,वहाँ कोई नियम की बात नही
    फिर भी अंजाने में भूल से बचने के लिए ,
    *कुछ बातों पर, नियमों पर गौर कर लेते हैं*
    *01*
    आप हिंदी अथवा हिंदी -उर्दू में  , अधिकतम 500 शब्दों तक लिख सकते हैं।
    *(02)*
    पोस्ट के ऊपर विषय,भाव आधारित शीर्षक जरूर दें।
    *(03)*
    बच्चों के लिए लिखा गया ऐसा हो जो  उनके मन मस्तिष्क (दिलो-दिमाग ) के विकास में सहायक हो मतलब शिक्षाप्रद ,मनोरंजक तथा संदेशात्मक, प्रेरणादायक होना चाहिए ।
    उनमें देश ,समाज ,परिवार के प्रति संस्कार ,समर्पण, सद्भावना जगाए ।
    इसलिए ख्याल रखें कि आपकी रचना बच्चों की मनोदशा पर बुरा प्रभाव हरगिज़ न डाले ।
    *04*
    :आपका लिखा मौलिक होना  चाहिए
    आपकी लिखा  मौलिक न होने पर ब्लॉग पोर्टल से पोस्ट हटा दी जाएगी ।
    *05*
    यदि आपकी रचना किसी भी प्रकार से बाल मन के विकास में बाधक प्रतीत होती है या उनकी मनोदशा पर बुरा असर डालती है तो वह ब्लॉग पोर्टल से हटा दी जाएगी ।
    *06*
    *आपका लिखा गुणवत्ता के एक मानक/स्तर से नीचे होने पर आपकी पोस्ट मंजूर नहीं की जाएगी।*
    *07*:
    *आपकी रचना में कुछ भी अति आपत्तिजनक ,अश्लील ,हिंसात्मक , राजनीतिक ,जातिगत आदि) लिखा होने पर बिना किसी सूचना के आपको पोर्टल से सीधा ब्लॉक कर दिया जाएगा ।*
    सबसे ऊपर पहले न०. पर लिखे
    *(D-01)* *कलमकार पाठकों के लिए संदेश एवं*
     *आपके लेखन के लिए जानकारियाँ ,जरूर पढ़ें*
    *****************************
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  • 8. (D-08) पाठक कलमकार पाठक कैसे बन सकते हैं ,कलमकार पाठक बनाने के उद्देश्य इत्यादि
     

    कृपया About Us क्लिक कर पढें - कलमकार पाठक
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    कागज़ दिल आमंत्रित करता है उन सभी पाठकों को जो ,ज़रा भी लिखने का शौक रखते हैं , या लिखना चाहते हैं , या कभी कभी उनका भी दिल कुछ लिखने को बोल उठता है चाहे उन्हें कोई साहित्यिक जानकारी न सही पर उन्हें भी मौका देता है अपनी कलम से दुनिया को रूबरू करवाने का कुछ आसान विषयों पर लिखते हुए ।
    और उनका भी प्रोफ़ाइल मय परिचय एवं फ़ोटो के LOGIN/PASSWORD प्राप्त करने के बाद अपडेट वह स्वयं कर सकेंगे।जहाँ उनकी चयनित रचनाएँ संग्रहित रहेँगी ।

    कलमकार पाठक नाम 7 December 2017 को कागज़ दिल साहित्यसेवी संगठन के द्वारा पाठकों को लेखन में शामिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया है।
    कलमकार पाठक कोई पहले प्रचलित शब्द नहीँ है । ( हमारी जानकारी में )

    *कलमकार पाठक बनाने का उद्देश्य*

    कलमकार पाठक सदस्य बनाने का एक मात्र उदेश्य साहित्य सेवा तथा साहित्य के प्रचार प्रसार के साथ अधिक से अधिक लोगों की रूह को उससे महकाने की कोशिश के अलावा जो भाव दिलों में ही घुटते रहते हैं और दम तोड़ देते हैं उन भावों को  दिल के कागज़ पर शब्दों में बदलने के साथ उन दिलों को हल्का करने का भी प्रयास है ।

    *कलमकार पाठक कौन बन सकता है ?*

    वह कोई भी व्यक्ति जो पढ़ने के साथ कभी कभार थोड़ा सा भी लिखने का शौक रखता हो, भले उसे कोई साहित्यिक जानकारी न सही , पर उसे लगता है कि वो लिख सकता है या लिखना चाहता है ।

    उनके लिए कुछ आसान विषय रखने की कोशिश की है , जहाँ वह अपनी नई कलम से लिखे पन्नों को कागज़ दिल पर सजा कर अन्य पाठकों के सामने रख सकते हैं और वरिष्ठ एवं बुद्धजीवी साहित्यकारों के मार्गदर्शन , सलाह एवं सहयोग से काग़ज़ दिल प्रयास करेगा कुछ नई श्रेणियां एवं फ़ीचर्स भविष्य में और लाने का जिससे कि ये नई कलम और  धारदार बन सके।

    *पाठक और कलमकार पाठक में अंतर*

    पाठक -

    पाठक वह जो पढ़ने में रुचि रखते हैं एवँ अपने ज्ञान एवँ पसंद से रचनाकारों की हौसला अफजाई करते हुए साहित्य सेवा कर आनंदित होते हैं ।

    * कलमकार पाठक -

    पाठक पढ़ते पढ़ते कभी कभी जो मन ही मन बुदबुदा उठते हैं कि ये भी लिख सकते थे या इसके आगे की पंक्ति ये हो सकती थी । और वह पाठक जो लिखते हैं पर उनका लिखना नियमित नहीं या लिख सकते हैं पर नही लिखते या कभी कभी किसी सामाजिक मुद्दे पर उनके भी दिल से आवाज़ आती है अपने विचार व्यक्त करने की , या अपना कोई तजुर्बा वह भी कागज़ पर उतार कर रखना चाहते हैं इत्यादि

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  • 9. (D-10) आपके लिखे पर आपका कॉपीराइट
     
    काग़ज़ दिल साइट पर मौजूद काग़ज़ दिल द्वारा अपनी बात कहने के लिए लिखे और इस्तेमाल किये गए शेर , तरीके एवं नाम पर काग़ज़ दिल का रजिस्टर्ड कॉपीराइट है।
     सदस्य कलमकार पाठकों द्वारा पोस्ट अथवा प्रेषित की गई किसी भी सामग्री पर काग़ज़ दिल का निजी स्वामित्व नहीं है । साइट पर मौजूद सभी रचनाएँ किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा अपने विवेक से लिखी एवं पोस्ट की गई अथवा भेजी गई होती हैं ।
    और उनका श्रेय उसी को जाता है । काग़ज़दिल का उन पर कोई अधिकार नहीं है ।
    काग़ज़दिल उनके लिखे को अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचाने , संकलन करने एवं लिखने के लिए उन्हें एक मंच उपलब्ध करवाने तथा लिखने के लिए प्रोत्साहित करने का
     माध्यम मात्र है।
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  • 10. बेबसाइट पर फ़ीचर्स की जानकारी
     

    वेबसाइट पर सभी फ़ीचर्स की जानकारी अपडेट की जाएगी, जैसे कि
    KaagazDil post क्या है , कैसे उसमे विषय या व्यक्ति विशेष लेख , काव्य रचना ,शायरी इत्यादि प्रकाशित होती हैं , Highligter. , Pouplar post of the week and writers , प्रोफाइल इस्तेमाल इत्यदि
    जबतक आप किसी भी जानकारी के लिए Message Us का इस्तेमाल कर जानकारी ले सकते हैं ।
    और सदस्यों की सहूलियत के लिए ENQUIRY में किन सवालों के जवाब और रखे जाने चाहिए यह सुझाव भी अवश्य भेजें ।

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