शेर-ओ-शायरी – ( Top Post )

 

"फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?"...

“फिर कैसे बेवफ़ा मैं ?”…

°°° दिल की हर धड़कन तेरे नाम , फिर कैसे बेवफ़ा मैं ? मेरी हर साँस तेरा ग़ुलाम , फिर ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
ग़ज़ल-प्यार का दर्द

ग़ज़ल-प्यार का दर्द

ग़ज़ल आह...तिरा प्यार तो सितमगर है बहुत। आह...तिरा प्यार तो सितमगर है बहुत। शायद इस सरकार का असर है बहुत। ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
"कुछ क़सक़ ऐसा भी"...

“कुछ क़सक़ ऐसा भी”…

°°° बेरंग ज़िंदगी को रंगने का , कुछ क़सक़ ऐसा भी । रिश्तों के दरम्यां गुज़रने का , कुछ क़सक़ ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
"ये मकान उसका था"...

“ये मकान उसका था”…

°°° बात बस ये जाना , मेरे पास कुछ सामान उसका था । रहे कोई कैसे मेरे दिल में , ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
बेवफा मोहब्बत

बेवफा मोहब्बत

ग़ज़ल रुठकर हमसे यूँ, सताने की सोच रहे हो। दूर होकर भी, तड़फाने की सोच रहे हो। वैसे भी कुछ ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
नगमा ए दिल

नगमा ए दिल

ग़ज़ल .नगमा ए दिल मेरी बर्बादी का जश्न मना के लौट रहे हो। अच्छा है कुछ प्यार जता के लौट ...
Read More
"क्या कह दूँ तुम्हें"...

“क्या कह दूँ तुम्हें”…

°°° दिल में सनम कुछ अच्छी बात है , क्या कह दूँ तुम्हें ? कुछ दिलक़श अनकही जज्बात है , ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
वक्त से लड़ी दिखती है

वक्त से लड़ी दिखती है

वक्त से भी वो लड़ी दिखती है एक कोने में खड़ी दिखती है हो चुकी है वो इतनी दुबली अब ...
Read More
रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा!

रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा!

गजल छलकने वाले जाम का मयख़ाना कहां रहा! आजकल दिलजलों का ये ठिकाना कहां रहा! वो बैच गए पैसों पर ...
Read More
ग़ज़ल (दर्द)
मुसाफ़िर बन गया हूँ!

मुसाफ़िर बन गया हूँ!

गजल आईने सी टूटी हुई तस्वीर बन गया हूँ! रूठे हुए भाग्य की लकीर बन गया हूँ! अब कहाँ बसेरा ...
Read More
Loading...