शेर-ओ-शायरी – ( Top Post )

 

ग़ज़ल (दर्द)
ग़ज़ल-प्यार का दर्द

ग़ज़ल-प्यार का दर्द

ग़ज़ल आह...तिरा प्यार तो सितमगर है बहुत। आह...तिरा प्यार तो सितमगर है बहुत। शायद इस सरकार का असर है बहुत। ...
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ग़ज़ल (दर्द)
"कुछ क़सक़ ऐसा भी"...

“कुछ क़सक़ ऐसा भी”…

°°° बेरंग ज़िंदगी को रंगने का , कुछ क़सक़ ऐसा भी । रिश्तों के दरम्यां गुज़रने का , कुछ क़सक़ ...
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ग़ज़ल (दर्द)
बेवफा मोहब्बत

बेवफा मोहब्बत

ग़ज़ल रुठकर हमसे यूँ, सताने की सोच रहे हो। दूर होकर भी, तड़फाने की सोच रहे हो। वैसे भी कुछ ...
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ग़ज़ल (दर्द)
नगमा ए दिल

नगमा ए दिल

ग़ज़ल .नगमा ए दिल मेरी बर्बादी का जश्न मना के लौट रहे हो। अच्छा है कुछ प्यार जता के लौट ...
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रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा!

रिश्तों की अहमियत का जमाना कहाँ रहा!

गजल छलकने वाले जाम का मयख़ाना कहां रहा! आजकल दिलजलों का ये ठिकाना कहां रहा! वो बैच गए पैसों पर ...
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ग़ज़ल (दर्द)
"ये मकान उसका था"...

“ये मकान उसका था”…

°°° बात बस ये जाना , मेरे पास कुछ सामान उसका था । रहे कोई कैसे मेरे दिल में , ...
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ग़ज़ल (दर्द)
वक्त से लड़ी दिखती है

वक्त से लड़ी दिखती है

वक्त से भी वो लड़ी दिखती है एक कोने में खड़ी दिखती है हो चुकी है वो इतनी दुबली अब ...
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ग़ज़ल (दर्द)
मुसाफ़िर बन गया हूँ!

मुसाफ़िर बन गया हूँ!

गजल आईने सी टूटी हुई तस्वीर बन गया हूँ! रूठे हुए भाग्य की लकीर बन गया हूँ! अब कहाँ बसेरा ...
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#ख्वाइशें

#ख्वाइशें

#ख्वाइशे ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आज भी उन ख्वाईशो से मैं लिपटकर सोता हूँ भले आज वो लाशें ही सही इन ठिठुरती सर्दियों ...
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सच की जमी पर ये जीना अजीब है

सच की जमी पर ये जीना अजीब है

सच की जमी पर ये जीना अजीब है “चली मृत्यु जीवन से मिलने"  नसीब है . जीवन में भरी मृत्यु ...
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