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Manjul Mayank Mishra Manjull Manzar Lucknowi
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11-01-2018
रचनाकार
Self employed
Lucknow. Uttar Pradesh
ज़बाँ अतिश उगलती है हमारी भी तुम्हारी भी। कहीं पर कुछ तो ग़लती है हमारी भी तुम्हारी भी। भुलाकर तलखियाँ कुछ वक़्त आओ साथ जी लें हम, मुसलसल उम्र ढलती है हमारी भी तुम्हारी भी। Copy right.. Manjull Manzar Lucknowi.
Kavi sammelan aur mushayre.
Manjul Mayank Mishra
Manjull Manzar Lucknowi
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