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Hamid Rajasthani
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27-01-2018
रचनाकार
Jaipur, Rajasthan
भीड़ का हिस्सा बनूँ ये फितरत ही नहीं मेरी मुझे आदत है अपने काफ़िले ख़ुद बनाने की
साहित्य की समझ नहीं बस आप सब से सीखना चाहता हूँ, मैं हर सब्जेक्ट पर लिखकर बस हर रंग में भीगना चाहता हूँ
Hamid
Rajasthani
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काग़ज़ दिल रचना (1) हास्य / व्यंग (1) गीतिका (वेदना) (2) गीतिका (अन्य) (3) 32
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