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शशांक मिश्रा 'सफ़ीर'
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03-02-2018
रचनाकार
छात्र
दनोकुइयाँ, तिलौली, बंसी,सिद्धार्थ नगर,उत्तरप्रदेश, भारत
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
हमें कहाँ कभी तिनके का सहारा था। लहरों ने ही डुबोया,लहरों ने उभारा था। हम सपने में भी पैरों को मोड़ कर सोये, क्योंकि घुटनों तक ही चादर हमारा था।
विविध विषयों को पढ़ने एवं अनुसंधान करने में रुचि। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक। चित्रकारी एवं सामाजिक विषयों की फिल्में देखना पसंद है। वर्तमान में इलाहाबाद में सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी कर रहे है। काव्यगौराव सम्मान(साहित्य सागर)
शशांक मिश्रा
'सफ़ीर'
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