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साथी मुख़र्जी
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07-02-2018
रचनाकार
self empoly
Narela Delhi 40
यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता, तो दूसरे दरवाजे से जाऊँगा या नया दरवाजा बनाऊंगा| क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार में हो, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही|( Guru Ravinder Nath Record)
Sum time I work in blind esosition.
साथी
मुख़र्जी
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कविता (प्रेम) (2) कविता (वेदना) (1) कविता (अन्य) (2) शेर (मोहब्बत) (1) 8