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भरतदीप माथुर
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13-03-2018
रचनाकार
सरकारी सेवारत् ( भारतीय जीवन बीमा निगम)
आगरा,उत्तर प्रदेश
विगत 25 वर्षों से सरकारी सेवा में,हिन्दी अंग्रेज़ी साहित्य और उर्दू अदब में गहरी रुचि, और थोड़ा बहुत लिखने का शौक । अपना एक शेर पेश-ए-ख़िदमत है जो थे बेवफ़ा मेरी जानिब, पशेमाँ हैं मेरी वफ़ा से...
भरतदीप
माथुर
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