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Raj Khyalia
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10-12-2017
रचनाकार
Student
Rohtak. 124001 Haryana
क्या करेंगे उस मंदिर का जिसमे रहने को कोई राम न होगा और क्या करेंगे उस मस्जिद का जिसमे सुनने वाला अज़ान न होगा। यू ही लड़ते रहे तो इस जमी पर कोई न हिन्दूऔर न मुसलमान होगा । मिलेंगे तो लाशो के ढेर करने वाला उनका कोई संस्कार न होगा जागो मेरे भारत जागो । अपनी आजादी को पहचानो । शांति और अमन को जानो।थोडी तेरे दिल मे और थोड़ी मेरे दिल मे जो जगह बस उसको पहचानो । न मंदिर न मस्ज़िद चाहिए न चर्चऔऱ न ही गुरद्वारा चाहिए । हर मानव के दिल में"राज़" थोडी सी इंसानियत चाहिए।
Kahani sangrah parkashit
Raj
Khyalia
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