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Dr. Nidhi Srivastava
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10-12-2017
रचनाकार
Asistt. Proffesor
Greater Noida,Gautam Buddh Nagar
धुँधली हुईं दिशाएँ, छाने लगा कुहासा, कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँ-सा। कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है; मुँह को छिपा तिमिर में क्यों तेज रो रहा है? दाता, पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे, बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे। प्यारे स्वदेश के हित अंगार माँगता हूँ। चढ़ती जवानियों का श्रृंगार मांगता हूँ। --रामधारी सिंह "दिनकर"
Swapnagandha (sajha kavya sangrah) me rachnaye prakashit. Sahityapedia ki member.navodit sahityakar Manch se sambadh.
Dr. Nidhi
Srivastava
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