खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को

गोपाल दास नीरज का फ़िल्म के लिए लिखा गया गीत

खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ , मिलके बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ , मिलके बिछड़ने को

कल रहे ना रहे, मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके, डोला बहार का
चार पल मिले जो आज, प्यार में गुज़ार दे
खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ , मिलके बिछड़ने को

झीलों के होंठों पर , मेघों का राग है
फूलों के सीने में , ठंडी ठंडी आग है
दिल के आइने में तू , ये समा उतार दे
खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ , मिलके बिछड़ने को

प्यासा है दिल सनम , प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी दबी , कोई मीठी बात है
इन लम्हों पे आज तू हर खुशी निसार दे
खिलते हैं गुल यहाँ ,खिलके बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ , मिलके बिछड़ने को

★★★★★★★

  गीत – गोपाल दास नीरज
फ़िल्म – शर्मीली
गायक – किशोर कुमार

         

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