दिल आज शायर है , ग़म आज नग़मा है

गोपाल दास नीरज का फ़िल्म के लिए लिखा गया गीत

दिल आज शायर हैं, ग़म आज नग्मा हैं ,शब ये ग़ज़ल हैं सनम
गैरों के शेरों को ओ सुननेवाले, हो इस तरफ भी करम

आ के ज़रा देख तो तेरी खातिर हम किस तरह से जिये
आँसू के धागे से सीते रहे हम जो ज़ख्म तूने दिये
चाहत की महफ़िल में गम तेरा ले कर किस्मत से खेला जुआ
दुनियाँ से जीते , पर तुझ से हारे, यूँ खेल अपना हुआ

हैं प्यार हम ने किया जिस तरह से , उस का ना कोई जवाब
जर्रा थे लेकिन तेरी लौ में जलकर, हम बन गये आफ़ताब
हम से हैं ज़िंदा वफ़ा और हम ही से हैं तेरी महफ़िल जवां
हम जब ना होंगे तो रो रोके दुनियाँ  ढूँढेगी  मेरे  निशां

ये प्यार कोई खिलौना नहीं हैं , हर कोई ले जो खरीद
मेरी तरह जिंदगी भर तड़प लो, फिर आना इसके करीब
हम तो मुसाफ़िर हैं, कोई सफ़र हो हम तो गुजर जायेंगे ही
लेकिन लगाया हैं जो दाँव हम ने वो जीतकर आयेंगे ही

★★★★★★★

 गीत – गोपाल दास नीरज
फ़िल्म – गैम्बलर (1971 )
गायक – किशोर कुमार

         

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