वो हम न थे वो तुम न थे वो रहगुज़र थी प्यार की

गोपाल दास नीरज का फ़िल्म के लिए लिखा गया गीत

वो हम न थे वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की
लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की

ये खेल था नसीब का, न हँस सके न रो सके
न तूर पर पहुँच सके, न दार पर ही सो सके
कहानी किससे ये कहें, चढ़ाव की उतार की
वो हम न थे वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की
लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की

तुम्हीं थे मेरे रहनुमा, तुम्हीं थे मेरे हमसफ़र
तुम्हीं थे मेरी रोशनी, तुम्हीं ने मुझको दी नज़र
बिना तुम्हारे ज़िन्दगी, शमा है इक मज़ार की
वो हम न थे वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की
लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की

ये कौन सा मुक़ाम है, फ़लक नहीं, ज़मीं नहीं
के शब नहीं, सहर नहीं, के ग़म नहीं, ख़ुशी नहीं
कहाँ ये लेके आ गई, हवा तेरे दयार की
वो हम न थे वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की
लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की

गुज़र रही है तुम पे क्या बना के हमको दर-ब-दर
ये सोच कर उदास हूँ ये सोच कर है चश्म तर, चश्म तर
न चोट है ये फूल की न है ख़लिश ये ख़ार की
वो हम न थे वो तुम न थे, वो रहगुज़र थी प्यार की
लुटी जहाँ पे बेवजह, पालकी बहार की
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दार – फाँसी , सूली
तूर – सीरिया का पवित्र पर्वत

★★★★★★★
गीतकार – नीरज 
गायक – मोहम्मद रफी
फ़िल्म : चा चा चा (1964)

         

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